सज्जाद अली नायाणी✍🏼फ्राइडे वर्ल्ड 26/12/2025
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिकी प्रतिनिधि मॉर्गन ऑर्टगस के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची ने अमेरिका को सीधे चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की कथित "कूटनीति" असल में एकतरफा शर्तें थोपने का खेल है, न कि सच्ची बातचीत।
23 दिसंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिकी उप विशेष दूत मॉर्गन ऑर्टगस ने ईरान को संबोधित करते हुए कहा था, "अमेरिका अभी भी ईरान के साथ औपचारिक वार्ता के लिए तैयार है,
लेकिन केवल तभी जब तेहरान सीधी और सार्थक बातचीत के लिए तैयार हो।"
उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से "कूटनीति का हाथ" बढ़ाए जाने का दावा किया और ईरानी प्रतिनिधि से कहा, "आग से दूर हटिए और ट्रंप की कूटनीति का हाथ थाम लीजिए।"
इस बयान के जवाब में 24 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए विदेश मंत्री अराकची ने तंज कसते हुए लिखा:
"अमेरिका की नई कूटनीति की परिभाषा - हम सार्थक बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अधिकारों को भूल जाइए!"
अराकची ने आगे जोर देकर कहा, "यह एकतरफा शर्तें थोपना है, बातचीत नहीं; सार्थक बातचीत तो दूर की बात है!" उन्होंने अमेरिका के दोहरे रवैये की आलोचना की और याद दिलाया कि दुनिया ने देखा है - जब ईरान वार्ता कर रहा था, तभी अमेरिका ने हमला करने का फैसला किया।
जून 2025 में इजरायल-अमेरिकी आक्रमण के दौरान ईरान के लोगों पर हमला किया गया और कूटनीति को तबाह करने की कोशिश की गई। विदेश मंत्री ने लिखा, "हमने वही किया जो हमेशा करते हैं - हमलावरों का मुकाबला किया और उन्हें अपने किए पर पछतावा हुआ।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि "कूटनीति का हाथ बढ़ाना" का मतलब बमवर्षक विमान भेजना और फिर उनकी विफलता को सफलता बताकर घमंड करना नहीं है।
अराकची ने अमेरिका को सलाह दी: "दुनिया को धोखा देने की कोशिश छोड़िए। वास्तविक, ईमानदार और सम्मानजनक कूटनीति अपनाइए।" उन्होंने जोर दिया कि ईरान अपने NPT (परमाणु अप्रसार संधि) के तहत शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकारों से कभी समझौता नहीं करेगा, खासकर यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से।
यह तीखी प्रतिक्रिया ईरान-अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता के गतिरोध को और उजागर करती है।
ईरान बार-बार कह रहा है कि वह सम्मानजनक और संतुलित वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका की शर्तें - जैसे शून्य संवर्धन - को "डिक्टेशन" मानता है।
जून 2025 के 12-दिवसीय संघर्ष के बाद दोनों पक्षों में अविश्वास और गहरा गया है, जहां ईरान ने सफल प्रतिरोध दिखाया और अमेरिका-इजरायल को पीछे हटना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता नहीं देगा, तब तक सार्थक प्रगति मुश्किल है। ईरान की यह मजबूत स्थिति स्पष्ट संदेश दे रही है
- सम्मान के बिना कोई बातचीत संभव नहीं।
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 26/12/2025