सज्जाद अली नायाणी✍🏼फ्राइडे वर्ल्ड 26/12/2025
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता **इस्माइल बक़ाई** ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिकी प्रतिनिधि के हालिया बयानों को प्रचार का खेल"- करार देते हुए कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ये बयान जनता को धोखा देने और वास्तविकता को तोड़-मरोड़कर पेश करने के अलावा कुछ नहीं हैं।
24 दिसंबर 2025 को ईरानी मीडिया आईआरएनए को दिए बयान में बक़ाई ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रतिनिधि मॉर्गन ऑर्टगस के "कूटनीति और सार्थक वार्ता" के दावे महज एक '-प्रचार ट्रिक -हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को गुमराह करना है। उन्होंने जोर देकर कहा, "ईरान हमेशा से सार्थक और सम्मानजनक कूटनीति के प्रति प्रतिबद्ध रहा है, जबकि अमेरिका ने न तो शुभ इरादे दिखाए और न ही गंभीरता।"
प्रवक्ता ने अमेरिका के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि ईरान ने बातचीत की प्रक्रिया कभी नहीं छोड़ी। बल्कि, अमेरिका ने ही इसे -बल प्रयोग- से तबाह कर दिया।
उन्होंने कहा, "हम सदियों पुरानी घटनाओं की बात नहीं कर रहे। विश्वासघात अभी कुछ महीने पहले हुआ है और पूरी तरह ताजा है।" बक़ाई ने प्रमुख उदाहरण दिए:
→ 2018 में JCPOA (ईरान परमाणु समझौता) से अमेरिका का एकतरफा बाहर निकलना, जो ईरान की वादाखिलाफी नहीं थी।
→ 13 जून 2025 को इजरायल द्वारा ईरान पर हमला, जबकि दोनों पक्षों के बीच वार्ता चल रही थी और 15 जून को छठे दौर की बैठक निर्धारित थी।
→ इसके बाद अमेरिका का भी शामिल होकर ईरानी परमाणु सुविधाओं (फोर्डो, नतांज, इस्फहान) पर बमबारी करना, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और NPT का स्पष्ट उल्लंघन था।
प्रवक्ता ने तंज कसते हुए पूछा, "क्या लगातार वादाखिलाफी और हमले 'कूटनीति का हाथ बढ़ाने' की अभिव्यक्ति हैं?" उन्होंने कहा कि जब ईरान वार्ता कर रहा था, तभी अमेरिका और उसके सहयोगी ने हमला किया और कूटनीति को नष्ट कर दिया।
बक़ाई ने आगे कहा कि अमेरिका की मांगें - जैसे शून्य यूरेनियम संवर्धन - अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित नहीं हैं। ईरान NPT का सदस्य है और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा, जिसमें संवर्धन शामिल है, उसके अविभाज्य अधिकार हैं। उन्होंने UNSC रेजोल्यूशन 2231 का हवाला देते हुए कहा कि इसकी सभी धाराएं 18 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो चुकी हैं, और सुरक्षा परिषद अब ईरान के परमाणु मुद्दे की समीक्षा का अधिकार नहीं रखती।
यह तीखी प्रतिक्रिया ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है, जहां जून 2025 के 12-दिवसीय संघर्ष के बाद अविश्वास चरम पर है।
ईरान बार-बार कह रहा है कि वह सम्मान और संतुलन पर आधारित वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका की शर्तें और सैन्य कार्रवाई इसे असंभव बना रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका ईरान के वैध अधिकारों को स्वीकार नहीं करेगा और अतीत की गलतियों से सबक नहीं लेगा, तब तक सार्थक प्रगति मुश्किल है। ईरान की यह मजबूत स्थिति स्पष्ट संदेश दे रही है
- प्रचार और धोखे से नहीं, बल्कि ईमानदार कूटनीति से ही बात बनेगी।
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 26/12/2025