सज्जाद अली नायाणी✍🏼फ्राइडे वर्ल्ड 26/12/2025
ये तस्वीरें सिर्फ़ फोटो नहीं हैं... ये बेलूर मठ की वो जीवंत साँसें हैं, जहाँ हुगली नदी की लहरें भी रुककर सुनती हैं – सभी धर्म एक हैं। 1897 में
स्वामी विवेकानंद ने इस मंदिर को खड़ा किया, ताकि हर दिल को पता चले कि ईश्वर एक है, नाम अलग-अलग हैं। और आज भी, जब दुनिया नफ़रत की आग में जल रही है, बेलूर मठ की ये दीवारें चुपके से रोती हैं और कहती हैं –
हमारी भारतीयता यही है, यही रहेगी
क्रिसमस ईव की वो शाम, जब साधु जीसस के चरणों में झुकते हैं 24 दिसंबर की संध्या... संध्या आरती की मधुर धुन थमती है। रामकृष्ण परमहंस के मंदिर में ईसा मसीह की बड़ी-बड़ी आँखों वाली तस्वीर स्थापित होती है। साधु, जिनके हाथों में हमेशा गीता या वेद रहते हैं, आज मोमबत्तियाँ जलाते हैं, फूल चढ़ाते हैं, केक और फल अर्पित करते हैं। आरती की थाली घूमती है... और आँखें भर आती हैं। बाइबिल के पाठ अंग्रेजी और बांग्ला में होते हैं। क्रिसमस कैरल्स की मधुर स्वर लहरियाँ मंदिर को भर देती हैं। यह सिर्फ़ पूजा नहीं – यह एक माँ का अपने सभी बच्चों को गले लगाना है। ये दृश्य देखिए, जहाँ साधुओं की आँखों में आँसू और प्रेम दोनों हैं:
उस रात की याद, जब विवेकानंद ने संन्यास लिया – क्रिसमस ईव पर 1886... दिसंबर की ठंडी रात। श्री रामकृष्ण के महासमाधि के बाद, नरेंद्र (विवेकानंद) और उनके गुरु-भाई अंतपुर में आग के सामने बैठे। जीसस के जीवन, उनके बलिदान, उनकी करुणा पर बातें हुईं। दिल भर आया... और उसी रात उन्होंने संन्यास की शपथ ली। सुबह पता चला – वह रात क्रिसमस ईव थी। तब से हर साल बेलूर मठ में यह पूजा होती है
– एक चुपके से दिया गया वादा कि हम कभी विभाजन नहीं मानेंगे। यह परंपरा सिर्फ़ इतिहास नहीं, हमारी आत्मा का दर्द है, हमारा प्रेम है। और ये तस्वीरें उस पल को कैद करती हैं:
आज का सच और बेलूर मठ का संदेश – आँखें भर आती हैं- जब चारों ओर नफ़रत की बोली बोलने वाले भारत को बाँटने पर तुले हैं, तब बेलूर मठ की ये मधुर शामें चीख-चीखकर कहती हैं – नहीं! हमारा भारत ऐसा नहीं है। यहाँ हिंदू मठ में ईसा मसीह की आरती होती है। यहाँ कोई छोटा-बड़ा नहीं – सिर्फ़ प्रेम है, सिर्फ़ एकता है। स्वामी विवेकानंद की वो बात याद आती है
– "जितने मत उतने पथ"। ये तस्वीरें देखकर मन रोता है... क्योंकि ये बताती हैं कि हमारी असली ताकत नफ़रत में नहीं, प्रेम में है।
हमारी भारतीयता तब तक अमर रहेगी, जब तक हम एक-दूसरे के त्योहारों को अपना त्योहार मानेंगे। बेलूर मठ हमें पुकार रहा है:
उठो, जागो, और प्रेम से एक हो जाओ... क्योंकि सच्चा भारत यही है
– जहाँ हर दिल एक साथ धड़कता है, जहाँ हर आँसू एक साथ बहता है।
हम चुप नहीं रहेंगे। हम इस प्रेम की रक्षा करेंगे।
हम इस एकता को जीवित रखेंगे। क्योंकि बेलूर मठ सिर्फ़ एक मठ नहीं – हमारा दिल है। और दिल कभी नहीं टूटता।
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 26/12/2025