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Wednesday, 24 December 2025

न्याय व्यवस्था का सच??: रेप दोषी कुलदीप सेंगर को राहत, सोनम वांगचुक को जेल– स्वतंत्रता या अपराधियों का बचाव?

न्याय व्यवस्था का सच??: रेप दोषी कुलदीप सेंगर को राहत, सोनम वांगचुक को जेल– स्वतंत्रता या अपराधियों का बचाव?
सज्जाद अली नायाणी ✍🏼 फ्राइडे वर्ल्ड 24/12/2025
भारतीय न्याय व्यवस्था आज एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक तरफ उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को अंतरिम जमानत दे दी और उनकी उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी। दूसरी तरफ, लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक 

सोनम वांगचुक-सितंबर 2025 से 

नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत जेल में बंद हैं, जहां से उनकी रिहाई पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ। 

कुलदीप सेंगर को मिली राहत 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में 2019 में सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर सजा निलंबित कर 15 लाख रुपये के मुचलके और तीन जमानतदारों के साथ जमानत मंजूर की। कोर्ट ने शर्तें लगाईं कि सेंगर पीड़िता के घर से 5 किमी के दायरे में नहीं जाएंगे और उन्हें धमकाएंगे नहीं। पीड़िता ने तुरंत विरोध जताया और कहा, "अगर सेंगर निर्दोष हैं तो मुझे ही जेल भेज दो, कम से कम मेरी जान सुरक्षित रहेगी।" 

सोनम वांगचुक की जेल यात्रा
 सोनम वांगचुक लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे थे। सितंबर 2025 में उन्हें NSA के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में उनकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई हो रही है, लेकिन अभी तक रिहाई नहीं हुई। वांगचुक ने जेल से भी शांति और संवाद की अपील की है।

 बिहार CM का हिजाब विवाद - इसी बीच बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब खींचने का आरोप लगा। वीडियो वायरल होने पर विपक्ष ने तीखी आलोचना की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह घटना महिलाओं की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है। 

सवाल उठते हैं - रेप जैसे गंभीर अपराध में दोषी को जमानत मिल जाती है, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ता को NSA में जकड़ लिया जाता है?

 - क्या यह स्वतंत्रता है या अपराधियों का बचाव और असहमति को कुचलने का तरीका? 

- पीड़िताओं की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी दोनों खतरे में हैं।

 यह दोहरा मापदंड समाज में गहरा असंतोष पैदा कर रहा है। न्याय सबके लिए बराबर होना चाहिए – न कि ताकतवरों के लिए ढाल और कमजोरों के लिए जेल। 

 सज्जाद अली नायाणी ✍🏼 
फ्राइडे वर्ल्ड 24/12/2025