सज्जाद अली नायाणी ✍🏼 फ्राइडे वर्ल्ड 24/12/2025
उन्नाव बलात्कार मामले में न्याय की लड़ाई एक नया और दर्दनाक मोड़ ले चुकी है। 2019 में ट्रायल कोर्ट द्वारा पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (23 दिसंबर 2025) को उनकी सजा को अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन की बेंच ने सेंगर को 15 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के तीन जमानतदार पेश करने का आदेश दिया।
सजा निलंबित होने के कुछ घंटों बाद ही पीड़िता, उनकी मां और महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ने दिल्ली के इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। पीड़िता ने गहरे दर्द के साथ कहा, "मुझे और मेरी मां को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। अगर अदालत को लगता है कि सेंगर निर्दोष हैं, तो उनकी सुरक्षा के लिए मुझे ही जेल भेज दो। वहां कम से कम मेरी जान तो सुरक्षित रहेगी।"
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा कांड 2017 का है, जब उन्नाव की एक नाबालिग ने कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया। आरोप के बाद पीड़िता के परिवार पर जबरदस्त दबाव डाला गया। 2018 में पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत हो गई और 2019 में एक रिश्तेदार की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। इन घटनाओं ने पूरे देश को हिला दिया था।
2019 में दिल्ली की विशेष अदालत ने सेंगर को बलात्कार, अपहरण और अन्य गंभीर धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी। लेकिन छह साल बाद हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर सजा निलंबित कर दी। कोर्ट ने कहा कि अपील की सुनवाई में समय लगेगा, इसलिए अंतरिम जमानत दी जा सकती है।
पीड़िता और कार्यकर्ताओं का गुस्सा- प्रदर्शन के दौरान पीड़िता ने भावुक होकर कहा, "यह फैसला मेरे जैसे हर पीड़ित महिला के लिए बड़ा झटका है। अपराधी को सजा मिलनी चाहिए, न कि राहत। क्या हमारी न्याय व्यवस्था सिर्फ ताकतवरों के लिए काम करती है?" योगिता भयाना ने भी कहा कि यह निर्णय महिलाओं की सुरक्षा को खतरे में डालता है और पीड़िताओं को फिर से असुरक्षित बना देता है।
कानूनी स्थिति- सजा निलंबित होने का मतलब यह नहीं कि सेंगर पूरी तरह बरी हो गए हैं। अपील की अंतिम सुनवाई पूरी होने तक वे जमानत पर बाहर रह सकते हैं। लेकिन पीड़िता पक्ष का कहना है कि जमानत मिलने से अपराधियों को हौसला मिलता है और पीड़िताओं का डर बढ़ता है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि न्याय की राह कितनी लंबी और कठिन होती है। पीड़िता की अदम्य हिम्मत और उनके परिवार के बलिदान को सलाम है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या हमारा सिस्टम वाकई पीड़िताओं के साथ खड़ा है, या फिर ताकतवरों की ढाल बन जाता है?
सज्जाद अली नायाणी ✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 24/12/2025