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Sunday, 28 December 2025

गुजरात में कुपोषण का सवाल: बच्चों का हक़ कहाँ गायब हो रहा है?

गुजरात में कुपोषण का सवाल: बच्चों का हक़ कहाँ गायब हो रहा है?
फ्राइडे वर्ल्ड 28/12//2025
गुजरात, जो विकास और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, वहाँ आज भी लाखों बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। हाल के आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग (बौनापन) की दर 39% तक पहुँच चुकी है, जबकि वेस्टिंग (कम वजन) 25% से ऊपर बनी हुई है। नीति आयोग और अन्य सर्वेक्षण बताते हैं कि करीब 40% बच्चे कम वजन या बौनेपन से जूझ रहे हैं। पुरानी Poshan Tracker रिपोर्ट्स में भी गुजरात में 3-4 लाख से अधिक गंभीर कुपोषित बच्चों का जिक्र मिलता है, और जनसंख्या के हिसाब से यह संख्या लाखों में पहुँच सकती है। आदिवासी इलाकों की स्थिति और भी चिंताजनक है। दक्षिणी और पूर्वी गुजरात के आदिवासी बहुल जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, जागरूकता का अभाव और योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होने से बच्चे और महिलाएँ सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

 केंद्र सरकार ने -POSHAN Abhiyaan (Mission Poshan 2.0) के तहत पिछले तीन सालों में गुजरात को करीब 

2,879 करोड़ रुपये जारी किए—2021-22 में 840 करोड़, 2022-23 में 913 करोड़ और 2023-24 में 1,127 करोड़। राज्य सरकार ने भी बाल कल्याण पर सैकड़ों करोड़ खर्च करने का दावा किया है। फिर सवाल उठता है—यह पैसा आखिर गया कहाँ?

 रिपोर्ट्स बताती हैं कि: - लाभार्थियों की संख्या लगातार घट रही है (2021-22 में 42 लाख से 2024 में 38 लाख से कम)। - आदिवासी क्षेत्रों में योजनाएँ कागजों पर तो मौजूद हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर पहुँच सीमित है। 

- कुछ रिपोर्ट्स में भ्रष्टाचार और मध्यस्थों द्वारा फायदे उठाने के आरोप भी लगे हैं, जिससे असल जरूरतमंद—खासकर आदिवासी बच्चे और गर्भवती महिलाएँ—वंचित रह जाते हैं। सरकारी योजनाएँ जैसे Kasturba Poshan Sahay Yojana, Bal Amrutam, Nutrition Rehabilitation Centres और Poshan Vatika चल रही हैं, लेकिन इनका असर दिखाई नहीं दे रहा। विकास के दावों के बीच आदिवासी बच्चे भूख और कुपोषण से जूझते रहते हैं। 

यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि करोड़ों बच्चों के भविष्य का सवाल है। जब तक पारदर्शिता, सख्त निगरानी और जमीनी क्रियान्वयन नहीं होगा, तब तक "सबका साथ, सबका विकास" सिर्फ नारा ही रहेगा। समय है कि सरकार जवाब दे

—आदिवासियों और बच्चों का हक़ का पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है?
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 28/12//2025