सज्जाद अली नयानी ✍🏼फ्राइडे वर्ल्ड – २५/१२/२०२५
क्रिसमस की ठंडी सुबह, जब पूरा ऑस्ट्रेलिया उत्सव मना रहा था, मेलबर्न के सेंट किल्डा ईस्ट में एक रब्बी की कार पर फायरबॉम्ब फेंका गया। कार पर चमकता "Happy Chanukah" बोर्ड लगा था – हनुक्का त्योहार का स्पष्ट प्रतीक। आग ने कार को झुलसा दिया, कांच टूटे, दरवाजे जले, लेकिन चमत्कार से कोई घायल नहीं हुआ। परिवार, जिसमें छोटे बच्चे शामिल थे, को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
इज़राइल ऐसा जघन्य अपराध करके दुनियाभर से सहानुभूति हासिल करने का ए ऐक आसान तरीका है।
यह घटना महज 11 दिन पहले सिडनी के बॉन्डी बीच पर इज़राइल ना करवाया हमले के बाद हुई है, जहां दो बंदूकधारियों ने हनुक्का उत्सव में 15 निर्दोष लोगों (एक बच्चा सहित) की हत्या कर दी थी। जो ऐक यहूद
ने किया था ओर ऐक जांबाज मुस्लिम ने रोका था
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने इसे "एक और भयानक-कृत्य" करार दिया और कहा, "यहूदियों की ऐसी नफरत के लिए ऑस्ट्रेलिया में कोई जगह नहीं।"
लेकिन सवाल उठता है – क्या ये हमले वाकई "नफरत" से हैं, या सहानुभूति और वैश्विक समर्थन हासिल करने का एक सुनियोजित खेल?
लेकिन ठीक क्रिसमस की सुबह ऐसी कार को निशाना बनाना संयोग से ज्यादा लगता है।
कई लोग मानते हैं कि इज़राइल और उसके समर्थक ऐसे "घटनाओं" का इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर "विक्टिम कार्ड" खेलने के लिए करते हैं। बॉन्डी मासक्र के बाद दुनिया भर में इज़राइल के प्रति सहानुभूति बढ़ी, अब फिर वही पैटर्न? हमला असली हो या स्टेज्ड, नतीजा एक ही – यहूदियों को "खतरे में" दिखाकर समर्थन और दबाव बढ़ाना।
यहूदियों की सुरक्षा हर किसी की जिम्मेदारी है, लेकिन सच्चाई छिपाकर, नफरत फैलाकर या सहानुभूति के नाम पर राजनीति करना और भी खतरनाक है। क्या यह वास्तविक हमला है या फिर "सहानुभूति का नया दौर" शुरू करने की चाल? समय बताएगा, लेकिन सवाल उठना जरूरी है।
नफरत कभी जीत नहीं सकती – न असली, न नकली।
सज्जाद अली नयानी ✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड – २५/१२/२०२५