मॉस्को। पूर्वी एशिया में तनाव की नई लहर दौड़ गई है। रूस ने जापान को साफ लहजे में चेतावनी जारी की है कि ताइवान के करीब मिसाइलों की तैनाती की उसकी योजना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मॉस्को ने कहा है कि वह ऐसी किसी भी हरकत का "कड़ा और निर्णायक" जवाब देने का पूरा हक सुरक्षित रखता है।
गुरुवार को रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "जापान इन सीमावर्ती द्वीपों पर आक्रामक हथियार प्रणालियों की तैनाती कर रहा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। यह पड़ोसी देशों के लिए गंभीर खतरा है।" ज़खारोवा ने जोर देकर कहा कि अमेरिका के "आदेशों" पर चलते हुए टोक्यो ओकिनावा जैसे द्वीपों को हथियारों से लैस कर रहा है, जो न सिर्फ रक्षात्मक बल्कि आक्रामक क्षमता वाले हैं।
यह बयान जापान के रक्षा मंत्री शिन्जिरो कोइज़ुमी के हालिया ऐलान के बाद आया है। रविवार को कोइज़ुमी ने कहा था कि ताइवान के पूर्वी तट से महज 110 किलोमीटर दूर स्थित योना गुनी द्वीप पर मध्यम दूरी की सतह-से-हवा मिसाइल इकाई की तैनाती "तेजी से आगे बढ़ रही है"। उनका दावा था कि यह कदम जापान की सुरक्षा को मजबूत करेगा और हमले की संभावना को कम करेगा। लेकिन मॉस्को इसे "खतरनाक उकसावा" बता रहा है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने जापान को डिप्लोमेटिक चैनलों के जरिए सख्त नोटिस भी भेजा है। ज़खारोवा ने कहा, "हम किसी भी बहाने से, चाहे स्थायी हो या अस्थायी, इन अमेरिकी मिसाइलों की तैनाती का विरोध करते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के नतीजों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को जापान ने अभी तक पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है।" मॉस्को का आरोप है कि वॉशिंगटन की कठपुतली बने टोक्यो के ये कदम एशिया-प्रशांत क्षेत्र को हथियारों की होड़ में झोंक देंगे।
इस बीच, चीन ने भी जापान की योजना की कड़ी निंदा की है। चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग बिन ने कहा, "ताइवान का मामला चीन का आंतरिक है। अगर जापान इस लाल रेखा को पार करेगा, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।" बीजिंग ने इसे "क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने और सैन्य टकराव भड़काने" की साजिश करार दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि जापान का यह फैसला अमेरिका-जापान सुरक्षा संधि के तहत ताइवान संकट के मद्देनजर लिया गया है। लेकिन रूस और चीन की एकजुट प्रतिक्रिया से पूर्वी एशिया में नया संकट पैदा हो सकता है। मॉस्को ने साफ कर दिया है कि वह जापान की "पुनर्सैन्यीकरण" की कोशिशों पर नजर रखे हुए है और किसी भी उल्लंघन पर "कठोर प्रतिक्रिया" के लिए तैयार है।
क्या यह चेतावनी सिर्फ शब्दों तक सीमित रहेगी या एशिया में नया शीत युद्ध छिड़ जाएगा? दुनिया की निगाहें मॉस्को-टोक्यो रिश्तों पर टिकी हैं।
सज्जाद अली नायाणी ✍️