वाशिंगटन। कैरेबियन सागर में अमेरिकी सेना के एक संदिग्ध ड्रग तस्करी नाव पर हमले का वीडियो सामने आया है, जिसमें पहले हमले से बचे दो लोग हाथ हिलाकर मदद या रुकने का इशारा कर रहे थे, लेकिन फिर भी उन पर दूसरा हमला कर दिया गया। यह घटना अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की संभावना पैदा कर रही है और युद्ध अपराध के रूप में देखी जा रही है।
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 2 सितंबर 2025 को हुए इस पहले हमले में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के आदेश पर ड्रोन से मिसाइल दागी गई। वीडियो में दिखता है कि नाव को निशाना बनाने के बाद दो बचे हुए व्यक्ति, जो शर्टलेस और निहत्थे थे, लगभग एक घंटे तक मलबे से चिपके रहे। वे हाथ लहराकर संकेत दे रहे थे, जो या तो सहायता की गुहार था या हमले को रोकने की कोशिश। लेकिन एडमिरल फ्रैंक ब्रैडली के आदेश पर दूसरा हमला किया गया, जिसमें दोनों मारे गए। कुल 11 लोग मारे गए, और अमेरिकी सेना का दावा है कि नाव 'ट्रेन डे अरागुआ' गैंग के ड्रग तस्करों की थी।
यह घटना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के ड्रग तस्करी के खिलाफ अभियान का हिस्सा है, जिसमें सितंबर से अब तक कैरेबियन और पूर्वी प्रशांत महासागर में 22 से अधिक हमले हो चुके हैं। इनमें 87 से ज्यादा मौतें हुई हैं। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर वीडियो शेयर कर इसे "नार्को-टेररिस्टों" के खिलाफ सफल कार्रवाई बताया, लेकिन वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट ने खुलासा किया कि हेगसेथ ने "कोई बचा न छोड़े" का मौखिक आदेश दिया था। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की कि दूसरा हमला हुआ, लेकिन इसे "नाव के पूर्ण विनाश" के लिए जरूरी बताया, न कि बचे लोगों को निशाना बनाने के लिए।
कानूनी विशेषज्ञों और सांसदों के बीच बहस छिड़ गई है। वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन ने सीबीएस के 'फेस द नेशन' में कहा, "अगर रिपोर्ट सही है, तो यह युद्ध अपराध है। ये लोग घायल और hors de combat (लड़ाई से बाहर) थे।" ओहियो के रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइक टर्नर ने इसे "अवैध कार्रवाई" करार दिया। हार्वर्ड के प्रोफेसर जैक गोल्डस्मिथ ने अपनी न्यूजलेटर में लिखा कि बचे हुए निहत्थे लोगों पर हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। क्विंसी इंस्टीट्यूट के मार्कस स्टैनली ने इसे "सैन्य बल का दुरुपयोग" बताया, जो नागरिक अपराधियों पर लागू नहीं होता।
अमेरिकी सेना ने बचाव में कहा कि ये हमले यूएस कानून और सशस्त्र संघर्ष के नियमों के अनुरूप हैं, क्योंकि ड्रग तस्करी को "आतंकवाद" माना जा रहा है। लेकिन आलोचक तर्क देते हैं कि ड्रग तस्करी अपराध है, न कि युद्ध। कांग्रेस ने जांच शुरू कर दी है – सीनेट और हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमिटी दोनों ने वीडियो देखा और गवाही मांगी है। पूर्व रक्षा सचिव लियोन पनेट्टा ने कहा, "यह घायलों को मारना युद्ध अपराध है।"
यह विवाद ट्रंप की "ड्रग्स पर युद्ध" नीति पर सवाल खड़े कर रहा है। वेनेजुएला और कोलंबिया जैसे देशों ने भी निंदा की है। क्या यह जांच ट्रंप प्रशासन को झुकाएगी, या ड्रग तस्करी के नाम पर सैन्य कार्रवाइयां जारी रहेंगी? दुनिया की नजरें वाशिंगटन पर टिकी हैं, जहां न्याय और सुरक्षा के बीच संतुलन की परीक्षा हो रही है।
सज्जाद अली नायाणी ✍️