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Monday, 15 December 2025

दोहा फोरम में ज़रीफ़ का तीखा तंज: अरब देशों की रणनीतियाँ फेल, मध्य पूर्व मे अमरीकन हस्तक्षेप खतरनाक!

दोहा फोरम में ज़रीफ़ का तीखा तंज: अरब देशों की रणनीतियाँ फेल, मध्य पूर्व मे अमरीकन हस्तक्षेप खतरनाक!
दोहा, कतर: हाल ही में संपन्न दोहा फोरम 2025 में ईरान के पूर्व विदेश मंत्री डॉ. मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर एक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अरब और यूरोपीय अधिकारियों पर जमकर निशाना साधा और कहा कि उनकी कोई भी रणनीति कामयाब नहीं हुई। ज़रीफ़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका ने अरब देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करके सब कुछ बिगाड़ दिया है। 

पैनल का विषय था "ईरान और बदलता क्षेत्रीय सुरक्षा परिवेश"। इसमें ज़रीफ़ के साथ गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी और इटली की अंतरराष्ट्रीय मामलों की संस्था की निदेशक नताली टोची भी मौजूद थे। चर्चा के दौरान ज़रीफ़ ने ईरान की क्षेत्रीय नीति का पुरजोर बचाव किया और अरब देशों से सहयोग की अपील की।

 ज़रीफ़ ने कहा, "हमने फिलिस्तीनी मुद्दे और अरब कारणों के लिए अरब देशों से ज्यादा समर्थन किया है, और फिर भी हमें ही दोषी ठहराया जाता है। ईरान ने इसके लिए भारी कीमत चुकाई है।" उन्होंने अरब देशों से कहा कि वे "जागें और कॉफी की खुशबू सूंघें" – अर्थात वास्तविकता को समझें। ज़रीफ़ के अनुसार, अरब देशों को ईरान के साथ सहयोग से फायदा होगा, क्योंकि ईरान का किसी अरब पड़ोसी के साथ क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा नहीं है। 

एक गर्मागर्म बहस में अराश गैस फील्ड के मुद्दे पर जीसीसी महासचिव से ज़रीफ़ की तीखी नोकझोंक हुई। ज़रीफ़ ने कहा कि कुवैत और सऊदी अरब ने बातचीत से इनकार किया, जबकि ईरान तैयार था। उन्होंने इजरायल को क्षेत्र की "बीमारी" करार देते हुए अरब देशों से एकजुट होने की अपील की।

 ज़रीफ़ ने अमेरिकी हस्तक्षेप की कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि अमेरिका ने अरब देशों के आंतरिक मामलों में दखल देकर क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाया है। न तो अरब देशों की रणनीतियाँ सफल हुईं और न ही यूरोपीय प्रयासों से कोई फायदा हुआ। उन्होंने ईरान की लचीलापन पर जोर देते हुए कहा कि ईरान सदियों से तूफानों का सामना करता आया है और आज भी मजबूत खड़ा है। 

इस बयान से क्षेत्रीय तनाव फिर सुर्खियों में आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज़रीफ़ के ये बयान ईरान की नई रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें फिलिस्तीनी मुद्दे को नैतिक आधार बनाकर अरब दुनिया में समर्थन जुटाया जा रहा है। दोहा फोरम जैसे मंच पर ऐसे तीखे बयान क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं को चुनौती दे रहे हैं, लेकिन साथ ही नए संवाद की गुंजाइश भी पैदा कर रहे हैं।
सज्जाद अली नायाणी ✍