फ्राइडे वर्ल्ड 31,12,2025
ईरान और कनाडा के बीच लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक खाई अब एक अनोखे और प्रतीकात्मक स्तर पर पहुंच गई है। 30 दिसंबर 2025 को ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर रॉयल कैनेडियन नेवी (Royal Canadian Navy) को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया।
यह कदम कनाडा द्वारा जून 2024 में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल करने के जवाब में उठाया गया है।
कनाडा का IRGC पर फैसला
19 जून 2024 को कनाडा सरकार ने IRGC को अपने **क्रिमिनल कोड** के तहत **आतंकवादी इकाई** घोषित किया था। कनाडाई पब्लिक सेफ्टी मिनिस्टर डोमिनिक ले ब्लैंक ने तब कहा था कि "IRGC ने जानबूझकर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया है, उनका समर्थन किया है या ऐसे संगठनों के साथ मिलकर काम किया है जो आतंकवाद में शामिल हैं।" इस फैसले के तहत:
- IRGC से जुड़ी किसी भी संपत्ति को फ्रीज कर दिया गया।
- कनाडा में IRGC के सदस्यों का प्रवेश प्रतिबंधित हो गया।
- कनाडाई नागरिकों या संस्थाओं के लिए IRGC से किसी भी तरह का लेन-देन अपराध घोषित कर दिया गया।
कनाडा ने इस कदम को ईरान की ओर से मानवाधिकारों के उल्लंघन, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिशों और 2020 में यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट PS752 को मार गिराने (जिसमें 176 लोग मारे गए, जिनमें 85 कनाडाई थे) से जोड़ा था।
ईरान ने इस फैसले की तुरंत कड़ी निंदा की थी और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया था। तेहरान का तर्क है कि IRGC ईरान की आधिकारिक सशस्त्र सेनाओं का हिस्सा है, और इसे आतंकवादी घोषित करना एक संप्रभु राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला है।
ईरान का जवाब: 2019 के कानून के तहत प्रतिकार
ईरान ने अपना यह कदम 2019 में पारित "अमेरिका द्वारा IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करने के खिलाफ प्रतिकार कानून" के धारा 7 के आधार पर उठाया है। इस कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि अमेरिका के इस फैसले का समर्थन या पालन करने वाले किसी भी देश के खिलाफ ईरान पारस्परिक कार्रवाई (reciprocity) कर सकता है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है:
"कनाडा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जो ईरान की आधिकारिक सशस्त्र शाखा है। इसलिए, पारस्परिकता के सिद्धांत के तहत रॉयल कैनेडियन नेवी को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता दी जाती है।"
ईरान ने स्पष्ट किया है कि इस घोषणा के कानूनी और राजनीतिक परिणामों की जिम्मेदारी कनाडा सरकार पर होगी। हालांकि, बयान में इस बात का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया कि इस घोषणा से व्यावहारिक रूप से क्या प्रभाव पड़ेंगे—जैसे संपत्ति जब्ती, यात्रा प्रतिबंध या अन्य प्रतिबंध। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुख्य रूप से **प्रतीकात्मक और राजनीतिक संदेश** है, क्योंकि कनाडा और ईरान के बीच पहले से ही कोई महत्वपूर्ण सैन्य या आर्थिक संपर्क नहीं है।
दोनों देशों के बीच तनाव का इतिहास ईरान और कनाडा के संबंध 2012 से ही टूटे हुए हैं, जब कनाडा ने तेहरान के साथ कूटनीतिक संबंध तोड़ दिए थे और ईरान को "वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा" करार दिया था। तब से दोनों देशों के बीच कई दौर के प्रतिबंध और आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे हैं।
- अमेरिका ने 2019 में IRGC को पहली बार फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन घोषित किया था।
- उसके बाद ईरान ने अमेरिकी सेना के कुछ हिस्सों को आतंकवादी घोषित किया।
- अब कनाडा इस सूची में शामिल हो गया है।
यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर पारस्परिक प्रतिबंधों और आतंकवाद की परिभाषा** पर बहस को और तेज कर सकता है। कई देश IRGC को आतंकवादी मानते हैं (जैसे अमेरिका, स्वीडन, बहरीन, सऊदी अरब और हाल ही में ऑस्ट्रेलिया), जबकि ईरान इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बताता है।
प्रतीकात्मक युद्ध या नया टकराव? ईरान का यह फैसला कूटनीतिक दुनिया में टाइट-फॉर-टैट (एक के बदले एक) की राजनीति का नया उदाहरण है। जहां कनाडा ने IRGC को ब्लैकलिस्ट कर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की, वहीं तेहरान ने कनाडा की नौसेना को निशाना बनाकर अपना जवाब दिया। हालांकि व्यावहारिक प्रभाव सीमित लगते हैं, लेकिन यह दोनों देशों के बीच बढ़ती दुश्मनी को दर्शाता है।
विश्व समुदाय अब देख रहा है कि क्या यह घटनाक्रम आगे और तनाव पैदा करेगा या सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहेगा।
फिलहाल, ईरान और कनाडा के बीच शांति की संभावना और दूर होती दिख रही है।
सज्जाद अली नायाणी ✍
फ्राइडे वर्ल्ड 31,12,2025