फ्राइडे वर्ल्ड 29 December
29 दिसंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर पूरी तरह रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने स्पष्ट कहा कि इस मामले की “विशेष और गंभीर परिस्थितियां” सामान्य नियमों से अलग हैं, इसलिए सजा निलंबित करने और जमानत देने का आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है।
क्या है पूरा मामला? → 2018 उन्नाव रेप केस की कड़वी यादें 2018 में उन्नाव जिले में एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उनके साथ बलात्कार करवाया और विरोध करने पर उनके पिता की हत्या करवा दी गई। इस मामले ने पूरे देश में आक्रोश फैलाया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की और CBI ने जांच संभाली।
- ट्रायल कोर्ट का फैसला (2020) दिल्ली की विशेष CBI अदालत ने कुलदीप सेंगर को बलात्कार (IPC 376), गैंगरेप और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही IPC 304-II (गैर-इरादतन हत्या) के तहत भी 10 साल की सजा दी गई, क्योंकि पीड़िता के पिता की मौत को अभियुक्तों से जुड़ा माना गया।
दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला (23 दिसंबर 2025) हाई कोर्ट ने सेंगर की सजा को निलंबित कर दिया और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अपील लंबित है और लंबे समय से जेल में रह चुके हैं।
- पीड़ित पक्ष का विरोध: इस फैसले के तुरंत बाद पीड़िता, उनकी मां, कई महिला संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने भारी विरोध जताया। सोशल मीडिया पर #JusticeForUnnaoGirl ट्रेंड करने लगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक? पीठ के मुख्य तर्क सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा:
→ “सामान्यतः जब ट्रायल कोर्ट या हाई कोर्ट किसी दोषी को जमानत पर रिहा करता है, तो इस अदालत को आरोपी को सुने बिना रोक नहीं लगानी चाहिए। लेकिन इस मामले में हालात अलग हैं।”
→ “अभियुक्त को IPC 304-II (गैर-इरादतन हत्या) के तहत भी सजा सुनाई गई है, जो पीड़िता के पिता की मौत से जुड़ा है। वह इस धारा में अभी भी हिरासत में है।”
→ “मामले की गंभीरता, पीड़िता की स्थिति और अपराध की प्रकृति को देखते हुए हम दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हैं। यानी सेंगर को उस आदेश के आधार पर रिहा नहीं किया जाएगा।”
पीठ ने आगे कहा कि अपील पर अंतिम सुनवाई तक सजा निलंबन का आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।
पीड़िता पक्ष और समाज की प्रतिक्रिया → न्याय की जीत
- पीड़िता की मां ने कहा: “हमारा विश्वास सुप्रीम कोर्ट पर था। आज फिर से उम्मीद जगी है कि न्याय होगा।”
- महिला अधिकार संगठनों ने इसे “महिला सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक फैसला” बताया।
- कई विपक्षी नेताओं ने ट्वीट कर कहा कि “सत्ता का दुरुपयोग करने वालों को कोई राहत नहीं मिलनी चाहिए।”
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव यह मामला 2018 से ही राजनीतिक तूफान का केंद्र रहा है। सेंगर के खिलाफ कार्रवाई के बाद बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाला था, लेकिन कई लोग इसे राजनीतिक प्रतिशोध भी मानते थे। अब सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिखाता है कि गंभीर अपराधों में, खासकर महिलाओं के खिलाफ हिंसा और हत्या से जुड़े मामलों में, अदालतें किसी भी राजनीतिक दबाव से ऊपर हैं।
यह फैसला उन हजारों पीड़िताओं के लिए संदेश है कि न्याय की राह भले लंबी हो, लेकिन आखिरकार सत्य और पीड़ित की आवाज जीतती है। मामले की अपील पर अब सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत सुनवाई होगी, जहां सेंगर की सजा की वैधता पर अंतिम फैसला आएगा।
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
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