बैंकॉक: थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने शुक्रवार को संसद भंग कर दी, जिससे देश में 45 से 60 दिनों के अंदर आम चुनाव का रास्ता साफ हो गया। यह फैसला कंबोडिया के साथ जारी घातक सीमा झड़पों के बीच आया है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। अनुतिन ने कहा कि उनकी अल्पमत सरकार को सीमा पर संघर्ष सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और संसद भंग करना "जनता को सत्ता वापस सौंपने" का तरीका है।
क्या है सीमा विवाद? थाईलैंड और कंबोडिया के बीच 817 किलोमीटर लंबी सीमा पर सदियों पुराना विवाद है, जो मुख्य रूप से प्राचीन मंदिरों और फ्रांसीसी औपनिवेशिक काल की सीमा रेखा से जुड़ा है। 2025 में तनाव बढ़ा, जब जुलाई में लैंडमाइन विस्फोट और झड़पों से दर्जनों लोग मारे गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से अक्टूबर में युद्धविराम हुआ, लेकिन दिसंबर में फिर झड़पें शुरू हो गईं।
8 दिसंबर से शुरू हुई ताजा लड़ाई में तोपखाने, एफ-16 लड़ाकू विमान और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। दोनों तरफ कम से कम 20 लोग मारे गए, 200 घायल हुए और 5 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित। थाईलैंड ने कंबोडिया पर हमला शुरू करने का आरोप लगाया, जबकि कंबोडिया ने थाई आक्रमण की निंदा की। ट्रंप ने फिर मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोग संशय में हैं।
राजनीतिक संकट का कारण व्यवसायी से नेता बने अनुतिन सितंबर 2025 से थाईलैंड के प्रधानमंत्री हैं। उनकी अल्पमत सरकार को मुख्य विपक्षी पीपुल्स पार्टी का समर्थन था, लेकिन संविधान संशोधन पर मतभेद से गठबंधन टूट गया। अविश्वास प्रस्ताव की धमकी के बीच अनुतिन ने संसद भंग की। उन्होंने कहा कि यह फैसला सीमा ऑपरेशंस को प्रभावित नहीं करेगा।
थाईलैंड की अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है - उच्च कर्ज, कम खपत और अमेरिकी टैरिफ का खतरा। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा संघर्ष से अनुतिन को राष्ट्रवादी समर्थन मिल सकता है, लेकिन चुनाव अनिश्चितता बढ़ाएगा।
दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन युद्धविराम टूटने से क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की अपील कर रहा है।
सज्जाद अली नायाणी✍