नई दिल्ली/मदुरै: लोकसभा में शुक्रवार को बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने तमिलनाडु की डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे 'एंटी-सनातन धर्म' का प्रतीक बताया।
उन्होंने मदुरै के तिरुपरनकुंड्रम में कार्तिगई दीपम त्योहार को लेकर उठे विवाद को उठाया, जहां मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद श्रद्धालुओं को पहाड़ी की चोटी पर दीप प्रज्वलित करने से रोका गया।
ठाकुर ने दावा किया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और हिंदू भक्तों को मंदिर पहुंचने से रोक दिया। उनके बयान पर डीएमके सांसदों ने सदन में कड़ा विरोध जताया, जिससे हंगामा हुआ।
क्या है पूरा विवाद? तमिलनाडु के मशहूर तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर भगवान मुरुगन का प्राचीन सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर है, जो मुरुगन के छह पवित्र निवास स्थलों (अरुपडई वीडु) में से एक है। इसी पहाड़ी पर सुल्तान सिकंदर बादशाह की दरगाह भी स्थित है।
सदियों से यहां हिंदू-मुस्लिम सद्भाव का प्रतीक माना जाता रहा है। हर साल कार्तिगई दीपम के मौके पर पहाड़ी पर महादीपम जलाने की परंपरा है।
हिंदू संगठनों ने मांग की कि दीप प्राचीन 'दीपथून' (पत्थर का दीप स्तंभ) पर जलाया जाए, जो दरगाह के करीब है। दिसंबर 2025 में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन के आदेश में हिंदू संगठनों की याचिका स्वीकार की और मंदिर प्रशासन को पहाड़ी की चोटी पर दीप जलाने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने इसे तमिल परंपरा का हिस्सा बताया और कहा कि इससे किसी की भावनाएं आहत नहीं होंगी।
हालांकि, तमिलनाडु सरकार और मंदिर प्रशासन ने इसे निचले स्तर पर जलाया। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट की अवमानना का मामला दायर किया।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 10 लोगों के साथ सीआईएसएफ सुरक्षा में दीप जलाने की अनुमति दी, लेकिन पुलिस ने पहाड़ी पर जाने से रोक दिया। इससे प्रदर्शन हुए, जिसमें पुलिस और भक्तों के बीच झड़प हुई। कुछ रिपोर्ट्स में लाठीचार्ज और पत्थरबाजी की खबरें आईं।
सरकार का पक्ष है कि पिछले 100 साल से दीप निचले मंडपम में जलाया जा रहा है और चोटी पर जलाने से सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है।
राज्य ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
राजनीतिक तूफान बीजेपी ने इसे हिंदू आस्था पर हमला बताया।
अनुराग ठाकुर ने कहा, "एक राज्य एंटी-सनातन बन गया है, जहां मंत्री हिंदू विरोधी बयान देते हैं।
कोर्ट के आदेश के बावजूद भक्तों पर लाठीचार्ज क्यों?"
डीएमके ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। विवाद इतना बढ़ा कि जज के खिलाफ महाभियोग की चर्चा तक हुई।
यह मामला धार्मिक परंपरा, कोर्ट आदेश की अवमानना और सांप्रदायिक सद्भाव के बीच फंसा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बातचीत से ही समाधान निकल सकता है, ताकि सदियों पुराना सद्भाव बना रहे।
सज्जाद अली नायाणी ✍🏼