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Tuesday, 30 December 2025

महायुती में दरार: छत्रपती संभाजीनगर और पुणे में भाजप-शिंदे शिवसेना आमने-सामने! गठबंधन टूटा, आरोप-प्रत्यारोप की बौछार

महायुती में दरार: छत्रपती संभाजीनगर और पुणे में भाजप-शिंदे शिवसेना आमने-सामने! गठबंधन टूटा, आरोप-प्रत्यारोप की बौछार
फ्राइडे वर्ल्ड 30,12,2025
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर! राज्य की सत्ता में एक साथ बैठे महायुति के सहयोगी दल भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना अब महानगरपालिका चुनावों में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरने को तैयार हैं। खासकर छत्रपती संभाजीनगर (पूर्व औरंगाबाद) और पुणे महानगरपालिका में सीट-शेयरिंग पर बातचीत पूरी तरह विफल हो गई है। 15 जनवरी 2026 को होने वाली इन चुनावों (मतगणना 16 जनवरी) के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 30 दिसंबर 2025 तक थी, और इसी दौरान गठबंधन टूटने की खबरों ने राजनीतिक हलचल मचा दी। 

राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में से कई जगहों पर महायुति की एकता टेस्ट हो रही है, लेकिन छत्रपती संभाजीनगर और पुणे में यह सबसे ज्यादा साफ नजर आ रही है। दोनों पार्टियां अब अलग-अलग चुनाव लड़ने जा रही हैं, जिससे त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला तय है। 

सीट-शेयरिंग पर फंसा पेच: अहंकार और धोखे के आरोप विवाद की जड़ सीट-शेयरिंग में है। छत्रपती संभाजीनगर में भाजपा की बढ़ती ताकत को लेकर शिवसेना नाराज है। शिवसेना के मंत्री और विधायक संजय शिरसाट ने खुलकर आरोप लगाया कि भाजपा ने "अहंकार" में आकर गठबंधन तोड़ा। उन्होंने कहा, "भाजपा का दबदबा बढ़ने से अहंकार आ गया। कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं ने जानबूझकर गठबंधन तोड़ा। हमने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात की थी, लेकिन विवाद जानबूझकर उठाया गया। भाजपा ने शिवसेना को अंधेरे में रखकर अपनी तैयारी की।" 

शिरसाट ने आगे कहा कि शिवसेना ने अपने सभी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र भरने के निर्देश दे दिए हैं और कोई भी हमला हुआ तो जवाब दिया जाएगा। 

दूसरी ओर, भाजपा के मंत्री अतुल सावे ने शिवसेना के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा, "शिवसेना बार-बार अपना रुख बदल रही है। भाजपा के कोरपोरेटरों की वो सीटें मांग रही है जहां हम लगातार जीतते आए हैं। उनका अहंकार ही गठबंधन तोड़ने का कारण है।" पुणे में भी यही कहानी दोहराई गई – भाजपा ने शिवसेना को सिर्फ 16 सीटें ऑफर कीं, जबकि शिवसेना 25 पर अड़ी रही। नतीजा? शिवसेना ने 165 सीटों पर अकेले लड़ने का फैसला किया। 


 महायुती की एकता पर सवाल: मुंबई में साथ, बाकी शहरों में जंग 
मुंबई (BMC) में दोनों पार्टियां एक साथ हैं – भाजपा 137 और शिवसेना 90 सीटों पर। लेकिन पुणे, छत्रपती संभाजीनगर, नाशिक, नवी मुंबई, उल्हासनगर, पिंपरी-चिंचवड समेत 12-14 महानगरपालिकाओं में गठबंधन टूट चुका है। इससे महायुति की ताकत बंटने का खतरा है, और विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) को फायदा मिल सकता है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर "बड़े भाई" बनने की भाजपा की रणनीति और शिवसेना की "सम्मानजनक हिस्सेदारी" की मांग ने गठबंधन को कमजोर किया। राज्य में महायुति की सत्ता मजबूत है, लेकिन स्थानीय चुनावों में वोटों का बंटवारा विपक्ष को मजबूत बना सकता है। 


क्या होगा नतीजा? त्रिकोणीय जंग में कौन बाजी मारेगा? ये चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति का "मिनी विधानसभा" टेस्ट हैं। छत्रपती संभाजीनगर में भाजपा का दबदबा बढ़ रहा है, लेकिन शिवसेना का पारंपरिक आधार मजबूत है। पुणे में शिवसेना के पूर्व नगरसेवकों का भाजपा में जाना और नई उम्मीदवारों की लिस्ट ने स्थिति जटिल कर दी। 

अगर दोनों पार्टियां अलग-अलग लड़ीं तो हिंदू वोट बंट सकता है, और कांग्रेस, शिवसेना (UBT), MNS या NCP (SP) को फायदा हो सकता है। महायुति के लिए ये चुनौती है कि सत्ता में एकजुट रहकर भी स्थानीय स्तर पर कैसे एकता बनाए रखें? 

राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता – बस स्थायी हित होते हैं। लेकिन इस बार हितों का टकराव महायुति को महंगा पड़ सकता है। देखना दिलचस्प होगा कि 16 जनवरी को जनता क्या फैसला सुनाती है! 
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 30,12,2025