फ्राइडे वर्ल्ड 30,12,2025
मुंबई की सियासी सरगर्मियां अब चरम पर हैं। 15 जनवरी 2026 को होने वाली **बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC)** सहित महाराष्ट्र की 29 नगरपालिकाओं की चुनावी जंग से पहले ही विपक्षी एकता की दीवार में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं।
सबसे बड़ा धमाका शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने किया है, जिसने अब खुले तौर पर **‘कांग्रेस मुक्त मुंबई’** का नारा बुलंद कर दिया है। यह नारा सिर्फ चुनावी जुमला नहीं, बल्कि कांग्रेस पर गहरी नाराजगी और विश्वासघात का इजहार है।
कांग्रेस ने पीठ में छुरा भोंका: आनंद दुबे का तीखा हमला शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता **आनंद दुबे** ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आग उगलते हुए कहा, “कांग्रेस ने हमारी पीठ में छुरा भोंका है। पहले भाजपा ने यह काम किया था और अब कांग्रेस भी वही कर रही है। मुंबई की जनता सब देख रही है।”
दुबे ने आगे कहा कि कांग्रेस अब सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने **वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA)** को 60 से ज्यादा सीटें देने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “जिस VBA का मुंबई में कोई इतिहास नहीं है, कोई जमीनी आधार नहीं है, उसे कांग्रेस ने ‘बड़ा भाई’ बनाने की कोशिश की है। यह समझ से परे है।”
VBA और कांग्रेस को भाजपा की ‘B टीम’ बताया आनंद दुबे ने VBA और कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा,
“यह सब मिलकर मुंबई के हित के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र है। ऐसा लगता है कि वंचित अघाड़ी और कांग्रेस दोनों भाजपा की ‘B टीम’ की तरह काम कर रहे हैं। मुंबई की जनता इस खेल को समझ चुकी है।”
उन्होंने दावा किया कि 16 जनवरी को परिणाम आने पर इन पार्टियों का “पूर्ण सफाया” हो जाएगा। ###
MVA सिर्फ राज्य-केंद्र के लिए था, BMC में अलग रणनीति
दुबे ने महा विकास अघाड़ी (MVA) की स्थिति पर भी स्पष्टता दी। उन्होंने कहा,
“MVA गठबंधन राज्य और केंद्र सरकार के लिए था। लेकिन यह BMC का चुनाव है – यह स्थानीय चुनाव है। यहां सिर्फ एक ही नारा है – कांग्रेस मुक्त मुंबई।”
उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि इस चुनाव में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे साथ हैं।
“जो हमारे साथ आएगा, उसका स्वागत है। लेकिन जो हमारे खिलाफ लड़ेगा, उसे महाभारत के युद्ध की तरह बाणों से विद्ध कर दिया जाएगा।”
क्या टूट रहा है विपक्षी एकता का भ्रम? यह बयान महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। जहां एक तरफ महायुति में भाजपा और शिंदे शिवसेना के बीच सीट-शेयरिंग पर विवाद चल रहा है, वहीं दूसरी ओर MVA में भी अब खुलेआम दरार दिख रही है।
शिवसेना (UBT) का यह नया रुख कई सवाल खड़े करता है:
- क्या कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बीच अब कोई गठबंधन संभव नहीं रहा?
- क्या राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ कोई अनौपचारिक समझ बनी हुई है?
- क्या ‘कांग्रेस मुक्त मुंबई’ का नारा BMC में हिंदुत्व वोट को एकजुट कर पाएगा?
मुंबई की जनता क्या फैसला लेगी? मुंबई हमेशा से ही राजनीतिक प्रयोगशाला रही है। यहां की जनता ने कई बार बड़े-बड़े दांव-पेंच देखे हैं। लेकिन इस बार नारा बदल गया है – ‘कांग्रेस मुक्त मुंबई’। यह नारा सिर्फ कांग्रेस के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।
16 जनवरी 2026 को जब BMC के नतीजे आएंगे, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि मुंबई की जनता किसकी बात मानती है – पुराने गठबंधनों की, नए नारों की, या फिर अपनी रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान की।
फिलहाल तो एक बात साफ है – मुंबई की सियासत अब पहले से कहीं ज्यादा गर्म और उलझी हुई है!
सज्जाद अली नायाणी ✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 30,12,2025