फ्राइडे वर्ल्ड 29 दिसंबर 2025
"विधायक को भी पैर छूने पड़ें, तो गुजरात पुलिस में कितनी बेशर्मी बाकी है?"
विसावदर (जिला जूनागढ़), गुजरात – एक ऐसी घटना घटी है जिसने गुजरात की पुलिस व्यवस्था और राजनीतिक दबाव की असलियत को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
आम आदमी पार्टी के विसावदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक गोपाल इटालिया को पुलिस स्टेशन के सामने सिर झुकाकर, पैर छूकर विनती करनी पड़ी। यह घटना सिर्फ व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्याय तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
क्या हुआ था? विसावदर में मूंगफली की खरीद के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (टेका भाव) पर किसानों को उचित दाम न मिले, इसके लिए कुछ किसान विरोधी तत्व सक्रिय हो गए थे। ये लोग किसानों से जबरन अतिरिक्त पैसे वसूल रहे थे और बाजार में गलत दबाव बना रहे थे। इसकी रोकथाम के लिए आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया। लेकिन इसके जवाब में पुलिस ने उल्टा इन्हीं कार्यकर्ताओं पर -छेड़छाड़- की झूठी FIR दर्ज कर दी।
एक तरफ किसानों के हक के लिए लड़ने वाले, दूसरी तरफ किसान विरोधी की रक्षा में पुलिस – इस विरोधाभासी तस्वीर ने पूरे विसावदर को हिला कर रख दिया है।
विधायक की नम्रता और पुलिस की बेशर्मी आज जब झूठी FIR के आरोपी कार्यकर्ता हजारों किसानों के साथ विसावदर पुलिस स्टेशन पहुंचे, तब विधायक गोपाल इटालिया ने पुलिस अधिकारियों के सामने सिर झुकाकर विनती की। उन्होंने कहा: > "अगर विधायक जैसों को भी इस तरह नतमस्तक होना पड़ता है, तो आम नागरिक का क्या होगा? पुलिस विभाग को शर्म नहीं आती?"
यह घटना साफ दर्शाती है कि गुजरात के कुछ इलाकों में पुलिस विभाग अब राजनीतिक दबाव के इशारे पर काम कर रहा है।
परिणाम और प्रतिक्रियाएं
→ किसानों और कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा: "जितने चाहो केस कर लो, हम तुम्हारी जेल से नहीं डरते।"
→ सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो वायरल हो रहे हैं और लोगों में आक्रोश फैल रहा है।
→ विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है। यह घटना क्या सिखाती है?
1. जब चुने हुए विधायक को भी पैर छूने पड़ें, तो आम नागरिक की सुरक्षा और न्याय की क्या गारंटी बचेगी?
2. पुलिस विभाग का राजनीतिकरण की रक्षा करने की प्रवृत्ति गुजरात के किसानों और युवाओं के लिए बड़ा खतरा बन रही है।
3. जब तक पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं बढ़ती ही रहेंगी।
निष्कर्ष यह घटना सिर्फ गोपाल इटालिया का व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि गुजरात की लोकतांत्रिक व्यवस्था, न्याय तंत्र और पुलिस की निष्पक्षता पर सीधा सवाल है। जब किसानों के हक के लिए लड़ने वालों को गुंडा कहा जाए और असली गुंडों को संरक्षण मिले, तो देश के संवैधानिक मूल्यों का क्या होगा? समय आ गया है कि गुजरात के लोग एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। क्योंकि आज अगर विधायक को पैर छूने पड़ रहे हैं, तो कल आपके-हमारे घर के बच्चों के साथ क्या होगा? हम डरते नहीं हैं। हम लड़ेंगे।
सज्जाद अली नायाणी ✍🏼
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