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Monday, 29 December 2025

बांग्लादेश की 'लौह महिला' बेगम खालिदा जिया का निधन: लंबी बीमारी के बाद अस्पताल में ली अंतिम सांस

बांग्लादेश की 'लौह महिला' बेगम खालिदा जिया का निधन: लंबी बीमारी के बाद अस्पताल में ली अंतिम सांस
फ्राइडे वर्ल्ड 30/12/2025 सज्जाद अली नायाणी✍🏼
ढाका, 30 दिसंबर 2025: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का आज सुबह लगभग 6 बजे ढाका के एवरकेयर हॉस्पिटल में निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं। लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही खालिदा जिया की तबीयत 23 नवंबर 2025 को अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। 

बीएनपी के मीडिया सेल ने आधिकारिक तौर पर इस दुखद खबर की पुष्टि की है। पार्टी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, "हमारी प्रिय मदर ऑफ डेमोक्रेसी बेगम खालिदा जिया आज फज्र की नमाज के बाद अस्पताल में दुनिया से रुखसत हो गईं।" देश-विदेश में उनके लाखों समर्थक इस खबर से स्तब्ध हैं। 

 लंबी लड़ाई बीमारी से खालिदा जिया पिछले कई वर्षों से डायबिटीज, किडनी की समस्या, लिवर की जटिलताओं, हृदय रोग, आर्थराइटिस और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं। नवंबर के अंत में उनकी हालत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा और नियमित डायलिसिस भी चलाई जा रही थी।

 देश-विदेश के करीब 30 विशेषज्ञ डॉक्टरों की मेडिकल टीम उनकी देखभाल कर रही थी। ब्रिटेन, चीन और अन्य देशों से विशेषज्ञ डॉक्टर भी आए थे। उनके बेटे तारिक रहमान, जो 17 साल बाद हाल ही में देश लौटे थे, लगातार अस्पताल में उनकी सेवा में मौजूद थे। पार्टी के नेताओं ने बार-बार देशवासियों से उनकी जल्दी रिकवरी के लिए दुआएं मांगी थीं। हालांकि,

 बीमारी ने आखिरकार हार नहीं मानी। 29 दिसंबर की रात उनकी हालत और बिगड़ गई और आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। 

 एक ऐतिहासिक राजनीतिक सफर बेगम खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। उनका जन्म 15 अगस्त 1945 को दीनाजपुर में हुआ था। 1960 में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानी जियाउर रहमान से शादी की। 1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद उन्होंने बीएनपी की कमान संभाली और 1984 में पार्टी की चेयरपर्सन बनीं। 

1991 में वह पहली बार प्रधानमंत्री चुनी गईं, फिर 2001 में दोबारा सत्ता में आईं। वह मुस्लिम दुनिया की दूसरी महिला प्रधानमंत्री थीं (बेनजीर भुट्टो के बाद)। खालिदा जिया ने तानाशाही के खिलाफ संघर्ष किया, हुसैन मुहम्मद एरशाद की सरकार को उखाड़ फेंका और लोकतंत्र की बहाली में अहम भूमिका निभाई।

 उनकी जेल की सजा, राजनीतिक प्रताड़ना और फिर भी अटूट इच्छाशक्ति ने उन्हें 'लौह महिला' का दर्जा दिलाया। 2008 के बाद से वह कई बार जेल गईं, लेकिन बीएनपी को मजबूत बनाए रखा। 2024 के छात्र आंदोलन के बाद राजनीतिक बदलाव के दौर में उनकी पार्टी फिर से उभरी। 

देश में शोक की लहर खालिदा जिया के निधन पर बांग्लादेश में शोक की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रपति, अंतरिम सरकार के प्रमुख, विभिन्न राजनीतिक दलों और आम जनता ने श्रद्धांजलि दी है। बीएनपी ने जनता से उनके लिए दुआएं और शोक सभा में शामिल होने की अपील की है। 

उनका अंतिम संस्कार ढाका में बड़े इन्तेजाम के साथ होने की संभावना है, जहां हजारों लोग अंतिम विदाई देने पहुंचेंगे। 

बेगम खालिदा जिया का जाना न सिर्फ बीएनपी के लिए, बल्कि पूरे बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास के लिए एक बड़ा क्षति है। उनकी स्मृति में लाखों लोग आज आंसू बहा रहे हैं और प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी आत्मा को शांति मिले। 

सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 30/12/2025