अमेरिका: ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीतियों के बीच अमेरिका में रह रहे हजारों भारतीय H-1B और H-4 वीजा धारकों में हड़कंप मच गया है। कई वीजा धारकों को दूतावास से ईमेल आया है कि उनका टेम्परेरी वर्क वीजा "प्रूडेंशियल रिवोकेशन" (सावधानी के तौर पर रद्द) कर दिया गया है। यह कदम सोशल मीडिया स्क्रीनिंग बढ़ाने की नई योजना से जुड़ा बताया जा रहा है, जो पहले अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर लागू थी।
यह घटनाक्रम 15 दिसंबर 2025 से शुरू हुई H-1B और H-4 आवेदकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल की गहन जांच के ठीक बाद सामने आया है। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने सभी H-1B और उनके आश्रित H-4 वीजा धारकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को "पब्लिक" सेटिंग पर रखने का आदेश दिया है, ताकि अधिकारियों को उनकी पोस्ट्स और एक्टिविटी की जांच आसानी से हो सके।
इमिग्रेशन अटॉर्नी एमिली न्यूमैन के अनुसार, यह "प्रूडेंशियल रिवोकेशन" एक अस्थायी और सावधानी भरा कदम है, न कि स्थायी रद्दीकरण। कई मामलों में ऐसे लोगों को नोटिस भेजे गए हैं जिनका पहले कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क रहा हो, भले ही कोई सजा न हुई हो। न्यूमैन ने कहा, "यह रद्दीकरण अमेरिका में कानूनी ठहराव पर सीधी असर नहीं डालता, लेकिन अगली वीजा अपॉइंटमेंट पर मुद्दे की दोबारा जांच होगी। कई घटनाएं पहले ही खुलासा हो चुकी और क्लियर हो चुकी थीं।"
वीजा रद्द होने का मतलब है कि अगर वीजा धारक अमेरिका से बाहर जाते हैं, तो पुराने वीजा स्टैंप से वापस प्रवेश नहीं कर पाएंगे। उन्हें नई अपॉइंटमेंट पर दोबारा स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ेगा। भारत में H-1B इंटरव्यू पहले ही स्थगित हो चुके हैं, कई अपॉइंटमेंट्स मार्च 2026 तक टल गई हैं।
ट्रंप प्रशासन की यह नीति "अमेरिका फर्स्ट" एजेंडे का हिस्सा है, जिसमें इमिग्रेशन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। स्टेट डिपार्टमेंट का कहना है कि वीजा स्क्रीनिंग एक निरंतर प्रक्रिया है। इस बदलाव से भारतीय टेक प्रोफेशनल्स सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि H-1B वीजा धारकों में 70% से ज्यादा भारतीय हैं।
इस अचानक बदलाव से अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय में भय और असमंजस का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उठाया गया है, लेकिन इससे कुशल विदेशी कार्यबल पर असर पड़ सकता है।
सज्जाद अली नायाणी ✍🏼