दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। नॉर्थवेस्ट दिल्ली के शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन गेट नंबर 4 के पास छापेमारी में 3.59 करोड़ रुपये से अधिक की नोटबंदी वाली पुरानी 500 और 1000 रुपये की नोटें बरामद की गईं। ये नोटें 8 नवंबर 2016 की नोटबंदी के बाद पूरी तरह अवैध हैं। पुलिस ने चार आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान हर्ष (22), टेक चंद ठाकुर (39), लक्ष्य (28) और विपिन कुमार (38) के रूप में हुई है। आरोपियों के पास से दो कारें भी जब्त की गईं, जिनका इस्तेमाल इस अवैध कारोबार में हो रहा था।
गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया। आरोपियों को पता था कि ये नोट रखना और उनका सौदा करना कानूनन अपराध है, फिर भी वे लोगों को ठग रहे थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह के सदस्य पुरानी नोटें बेहद कम कीमत पर खरीदते और बेचते थे। लोगों को झांसा देते थे कि "ये नोट हम RBI में बदलवा देंगे" या "आधार कार्ड से एक्सचेंज हो जाएंगी"।
असल में नोटबंदी के बाद इन नोटों का कोई मूल्य नहीं है और इन्हें बदलना असंभव है।
आरोपियों का बैकग्राउंड भी चौंकाने वाला है। हर्ष बेरोजगार युवक है, टेक चंद परिवार की जिम्मेदारियों से जूझ रहा था, लक्ष्य की फरवरी 2026 में शादी है और कर्ज चुकाने के लिए इस धंधे में शामिल हुआ, जबकि विपिन प्राइवेट जॉब करता था लेकिन जल्दी अमीर बनने के लालच में फंस गया।
जांच में पता चला कि ये लोग आशीष और तरुण नाम के दो हैंडलर के संपर्क में थे, जो नोट सप्लाई करते थे। पुलिस अब इनकी तलाश कर रही है।
यह मामला स्पेसिफाइड बैंक नोट्स एक्ट, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत दर्ज किया गया है। नोटबंदी के 9 साल बाद भी ऐसे रैकेट सक्रिय होना चिंता की बात है। दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई काले धन और ठगी के गिरोहों पर करारा प्रहार है। लोगों से अपील है कि ऐसे झांसों में न फंसें – पुरानी नोटें अब कागज के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं!
सज्जाद अली नायाणी ✍