Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Monday, 1 December 2025

बंगाल की बगावत : SIR पर बंगाली अस्मिता की जंग!

बंगाल की बगावत : SIR पर बंगाली अस्मिता की जंग!
पश्चिम बंगाल में इन दिनों एक नया तूफान खड़ा हो रहा है। नाम है – SIR (Special Intensive Revision)। चुनाव आयोग का यह अभियान मतदाता सूची को साफ-सुथरा करने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन बंगाल में यह बंगाली अस्मिता का सवाल बन गया है। लोग सड़कों पर हैं, नारे लग रहे हैं और भाजपा से लेकर आम बंगाली तक एक ही बात कह रहा है – “बंगाल अपनी पहचान किसी के हाथ नहीं सौंपेगा!” 

 बंगाली मिजाज़ को समझना आसान नहीं बंगाल का इतिहास गवाह है – यहाँ की मिट्टी में बगावत का स्वाद घुला हुआ है। नमक सत्याग्रह हो या भाषा आंदोलन, बंगाल ने हमेशा अन्याय के सामने सिर झुकाना स्वीकार नहीं किया। आज भी वही स्वभाव जिंदा है। लोग कह रहे हैं कि बिहार में जिन लाखों नाम काटे गए, वहाँ प्रवासी मजदूरों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार हुआ। इसमें सच्चाई है। लेकिन बंगाल ने इसे अपनी लड़ाई बना लिया है। यहाँ कोई भी बंगाली यह नहीं चाहता कि उसकी मतदाता सूची में कोई छेड़छाड़ हो, भले ही वह छेड़छाड़ सही कारण से ही क्यों न की जा रही हो। 

 चुनाव आयोग भी हक्का-बक्का चुनाव आयोग ने शायद यह सोचा भी नहीं था कि उसका अभियान बंगाल में इतना बड़ा विवाद बन जाएगा। एक तरफ भाजपा सड़कों पर उतर आई है और SIR के खिलाफ आंदोलन कर रही है। वही भाजपा जो कुछ महीने पहले दावा कर रही थी कि “बंगाल में 2 करोड़ फर्जी वोट कटेंगे”। अब उसी भाजपा को लग रहा है कि उसका प्लान उल्टा पड़ सकता है। क्योंकि अब बंगाली जनता SIR को “बंगाल पर हमला” मान रही है। 

यह लड़ाई सिर्फ वोटों की नहीं, सम्मान की है बंगाल के लोग बार-बार यही कह रहे हैं – “हमारी अस्मिता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।” चाहे वो बिहारी मजदूर हों या बंगाली मतदाता, हर कोई अपने हक की बात कर रहा है। और जब बंगाली एक बार अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए खड़ा हो जाए, तो इतिहास बताता है – वह पीछे नहीं हटता। 

आगे क्या? SIR कामयाब होगा या नहीं, यह तो आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन इतना तय है कि बंगाल की यह लड़ाई अब सिर्फ मतदाता सूची की सफाई की लड़ाई नहीं रही। यह बंगाली गर्व और स्वाभिमान की लड़ाई बन चुकी है। और जब बंगाल लड़ता है, तो पूरे देश की नजरें उस पर टिक जाती हैं। 

बंगाल की यह बगावत एक बार फिर साबित कर रही है – यहाँ की मिट्टी में सिर्फ चावल नहीं, क्रांति भी उगती है।

 सज्जाद अली नायाणी✍️