उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि 4 करोड़ वोटरों के नाम गायब हैं, जिनमें 85-90% BJP समर्थक हैं। पहले SIR को घुसपैठियों का पर्दाफाश करने वाला बताया जा रहा था, लेकिन अब विपक्ष आरोप लगा रहा है कि 'घुसपैठिए BJP के वोटर निकले'। क्या यह गृह मंत्री अमित शाह से योगी की 'बगावत' है? आइए फैक्ट्स से समझते हैं।
🔹 SIR क्या है और विवाद की जड़ - SIR (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है, जो वोटर लिस्ट को अपडेट करती है
– डुप्लिकेट, मृतक, या गैर-मौजूद नाम हटाती है।
- UP में 2025 में SIR के दौरान लगभग 4 करोड़ नाम हटाए गए या गायब बताए जा रहे हैं। योगी ने 15 दिसंबर 2025 को कहा: "ये नाम BJP के पारंपरिक वोटरों के हैं, जो हिंदू समुदाय से हैं।"
- पहले BJP नेता SIR को 'घुसपैठियों' (मुख्य रूप से मुस्लिम रोहिंग्या या बांग्लादेशी) का पर्दाफाश करने वाला बता रहे थे। अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि SIR से अवैध प्रवासियों की पहचान होगी।
- लेकिन योगी के दावे ने उलटा असर किया। विपक्ष (कांग्रेस, SP) कह रहा: "अब पता चला घुसपैठिए BJP के वोटर हैं!" राहुल गांधी ने 'वोट चोरी' का आरोप लगाया, जबकि अखिलेश यादव ने ECI पर BJP को फायदा पहुंचाने का इल्जाम लगाया।
🔹 योगी vs शाह: बगावत या रणनीति?
- योगी ने ECI को चिट्ठी लिखकर SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए और नाम बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा: "85% गायब नाम BJP वोटरों के हैं, जो पिछले चुनावों में हमें सपोर्ट करते थे।"
- अमित शाह ने राहुल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा: "SIR से घुसपैठिए पकड़े जाएंगे, विपक्ष डर रहा है।" लेकिन योगी के बयान ने BJP में आंतरिक कलह की अफवाहें उड़ा दीं।
- राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह 'बगावत' नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले वोट बैंक बचाने की रणनीति है। UP में BJP की हालिया हार (2024 लोकसभा में सीटें कम) के बाद योगी अपनी इमेज मजबूत कर रहे हैं।
🔹 फैक्ट्स और आंकड़े
- UP की कुल वोटर लिस्ट: लगभग 15 करोड़। 4 करोड़ नाम गायब होने का मतलब 25-30% वोटर प्रभावित।
- ECI का कहना: नाम हटाए गए क्योंकि वे डुप्लिकेट, मृतक, या शिफ्टेड थे। कोई 'साजिश' नहीं।
- विपक्ष के दावे: SP ने कहा कि 2 करोड़ से ज्यादा नाम डिलीट हो रहे, ज्यादातर विपक्षी वोटर। दिग्विजय सिंह ने शाह पर हमला किया: "EC शाह को गुमराह कर रहा या शाह EC को?"
- तमिलनाडु में भी SIR से 85 लाख नाम गायब, 13% वोटर प्रभावित – लेकिन UP का मामला ज्यादा राजनीतिक।
🔹 क्या होगा असर?
- UP बायपोल: हाल के बायपोल में SIR का असर दिखा, जहां SP ने ECI पर पक्षपात का आरोप लगाया।
- BJP की चिंता: अगर नाम बहाल नहीं हुए तो 2027 चुनाव में नुकसान हो सकता। विपक्ष इसे 'वोट दबाने' की साजिश बता रहा।
- समाज पर प्रभाव:
यह मुद्दा हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है, क्योंकि SIR को CAA-NRC से जोड़ा जा रहा।
यह विवाद दिखाता है कि वोटर लिस्ट रिविजन जैसे प्रशासनिक काम भी राजनीति का शिकार हो सकते हैं। ECI को ट्रांसपेरेंसी बढ़ानी चाहिए, ताकि ऐसे आरोप न लगें। UP की राजनीति में SIR अब बड़ा मुद्दा बन गया है
– आगे देखिए क्या ट्विस्ट आता है!
सज्जाद अली नायाणी✍