Friday World January 6, 2026
जनवरी 2026 में इज़राइली विपक्ष के नेता **याइर लापिद** ने संसद (Knesset) में एक विशेष बहस के दौरान गंभीर चेतावनी दी कि पिछले तीन वर्षों (अक्टूबर 2023 से अब तक) में लगभग 2 लाख ज़ायोनी बस्तीवासी (settlers) ने कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों (वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम सहित) को छोड़ दिया है। लापिद ने इसे "अभूतपूर्व नकारात्मक प्रवासन" (negative migration) की लहर बताया, जो इज़राइल के लिए एक गंभीर संकट का संकेत है।
→ यह पलायन मुख्य रूप से 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और उसके बाद शुरू हुए गाजा युद्ध से जुड़ा है। लापिद ने कहा कि इज़राइल की वर्तमान आर्थिक स्थिति तीन साल पहले से भी बदतर हो गई है। रहने की लागत (cost of living) में भारी वृद्धि, शिक्षा व्यवस्था में गिरावट, व्यक्तिगत सुरक्षा की कमी और महंगाई ने युवा, शिक्षित और करदाता बस्तीवासियों को निराश कर दिया है।
लापिद ने प्रधानमंत्री **बेंजामिन नेतन्याहू** की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू की नीतियों ने "पूरी पीढ़ी का पतन" कर दिया है। अरबों का बजट छूट (subsidies) और अनावश्यक मंत्रालयों पर बर्बाद किया गया, जबकि आम लोगों की आजीविका संकट को नजरअंदाज किया गया। लापिद ने इसे "एक पूरी पीढ़ी का पतन" करार दिया।
→ इज़राइल के केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (CBS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में ही **69,300 बस्तीवासी** बाहर चले गए। ये ज्यादातर युवा, शिक्षित, करदाता और सैन्य रिजर्व में शामिल लोग थे। इनमें 875 डॉक्टर और 3,000 इंजीनियर शामिल हैं। पिछले वर्ष अकेले टेक्नोलॉजी और हाई-टेक सेक्टर से बड़ी संख्या में पलायन हुआ, जो इज़राइल की अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन है।
गाजा युद्ध के बाद "ब्रेन ड्रेन" (brain drain) की समस्या चरम पर पहुंच गई है। शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों का पलायन नए आगमन से कहीं अधिक हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से अगस्त 2024 तक 1.25 लाख से अधिक बस्तीवासियों का नेट नुकसान हुआ। 2025 में यह सिलसिला जारी रहा, जहां **69,000** से अधिक इज़राइली देश छोड़ चुके हैं।
→ प्रौद्योगिकी क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित है। गाजा युद्ध के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने वाले इज़राइली कर्मचारियों ने स्थानांतरण (relocation) और नए रोजगार के लिए आवेदन बढ़ा दिए। Calcalist अखबार की रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 में पलायन करने वालों में से बड़ा हिस्सा टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड इंडस्ट्री से जुड़ा था। यह इज़राइल के लिए रणनीतिक खतरा है, क्योंकि हाई-टेक सेक्टर देश की जीडीपी और टैक्स रेवेन्यू का बड़ा स्रोत है।
लापिद ने इसे "पूरी प्रवासन आंदोलन" (entire emigration movement) कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो यह "त्सुनामी" बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, न्यायिक सुधार विवाद और आर्थिक दबाव ने इस पलायन को बढ़ावा दिया। 2025 में इज़राइल की कुल जनसंख्या 10.178 मिलियन पहुंची, लेकिन नेट माइग्रेशन नेगेटिव रहा।
→ यह पलायन सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं, बल्कि इज़राइल की भविष्य की चुनौतियां दर्शाता है। युवा प्रतिभाएं देश छोड़ रही हैं, जिससे अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो रही है। लापिद ने इसे नेतन्याहू सरकार की असफलता बताया और कहा कि 2026 के चुनावों में नेतृत्व परिवर्तन जरूरी है।
यह घटना दिखाती है कि गाजा युद्ध और उसके बाद की स्थिति ने इज़राइल की आंतरिक मजबूती को कितना कमजोर किया है। जहां एक तरफ बस्तीवासियों का पलायन बढ़ रहा है, वहीं इज़राइल की वैश्विक छवि और आर्थिक स्थिरता पर भी सवाल उठ रहे हैं। लापिद की चेतावनी स्पष्ट है: यदि सुधार नहीं हुए तो यह "अभूतपूर्व संकट" और गहरा सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 6, 2026