Friday World 01 जनवरी, 2026
इज़रायल की सेना (IDF) ने वर्ष 2025 के अपने आधिकारिक हताहत आँकड़े जारी किए हैं, जिनमें सबसे चौंकाने वाली बात 21 सैनिकों की आत्महत्या है। यह संख्या पिछले 15 वर्षों में दर्ज की गई सबसे अधिक आत्महत्याओं की संख्या है और ज़ायोनी सेना के भीतर गहरे मानसिक संकट की ओर इशारा करती है।
30 दिसंबर 2025 को जारी इस रिपोर्ट में कुल 151 सैनिकों की मौत दर्ज की गई है। इनमें से 21 मौतें स्पष्ट रूप से आत्महत्या से जुड़ी हैं, जबकि कुछ अन्य मामलों को "संदिग्ध आत्महत्या" के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह आँकड़ा न केवल सेना के इतिहास में एक काला अध्याय है, बल्कि युद्ध, लगातार तनाव और नैतिक द्वंद्व से उपजे गहरे मनोवैज्ञानिक दबाव को भी उजागर करता है।
2025 के हताहत आँकड़े: एक नज़र में
- कुल मौतें: 151 सैनिक -
आत्महत्या**: 21 (पुष्टि) +
संदिग्ध मामले - संचालन/युद्ध में मौत**: 88 - **
बीमारी से मौत: 15 -
प्रतिरोध मोर्चा (रेजिस्टेंस ऑपरेशंस) में: 3
- दुर्घटनाएँ: 21
आत्महत्या से होने वाली मौतें अब युद्ध या दुर्घटना से होने वाली मौतों के बराबर या उससे अधिक हो गई हैं। यह स्थिति इज़रायली सेना के लिए अभूतपूर्व चुनौती बन गई है।
बढ़ता मानसिक संकट: कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों और पूर्व सैनिकों के अनुसार, 2025 में इज़रायल की सेना पर कई मोर्चों से दबाव बढ़ा:
लगातार गाजा, लेबनान और वेस्ट बैंक में ऑपरेशन
हूती हमलों और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव
सैनिकों में नैतिक द्वंद्व (moral injury) का बढ़ता मामला
घरेलू राजनीतिक अस्थिरता और समाज में बढ़ती विभाजन की भावना
इन सभी कारकों ने सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया। कई युवा सैनिकों ने युद्ध के बाद PTSD (पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर), गंभीर अवसाद और सुसाइडल विचारों की शिकायत की।
सेना की प्रतिक्रिया: मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस
इस संकट को देखते हुए IDF ने बड़े पैमाने पर कदम उठाए:
→ 1,000+ मानसिक स्वास्थ्य अधिकारी तैनात किए गए
→ हर ब्रिगेड में एक समर्पित मनोवैज्ञानिक अधिकारी नियुक्त
→ युद्ध क्षेत्रों में तत्काल क्राइसिस इंटरवेंशन टीम्स
→ सैनिकों के लिए 24×7 हेल्पलाइन और काउंसलिंग सेशन → परिवारों के साथ नियमित फॉलो-अप और सपोर्ट ग्रुप
हालाँकि ये प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये उपाय केवल लक्षणों का इलाज कर रहे हैं, जबकि मूल कारण
—लगातार युद्ध और राजनीतिक दबाव—को संबोधित नहीं किया जा रहा।
सेना की सेंसरशिप और जनमत प्रबंधन
इज़रायली सेना हमेशा से अपने हताहत आँकड़ों को सख्ती से नियंत्रित करती आई है। पिछले दशकों में युद्ध के दौरान होने वाली मौतों को अक्सर कम करके बताया जाता था या वर्गीकरण बदलकर पेश किया जाता था। लेकिन 2025 में आत्महत्या के इतने बड़े आँकड़े को छिपाना असंभव हो गया।
यह रिपोर्ट एक तरह से स्वीकारोक्ति है कि सेना के भीतर मानसिक स्वास्थ्य का संकट अब छिपाया नहीं जा सकता। पूर्व सैनिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने इसे "सेना के भीतर छिपी महामारी" करार दिया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
→ डॉ. एरियल हर्ज़ोग (मनोचिकित्सक, पूर्व IDF): "हमारी सेना अब सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक युद्ध लड़ रही है। आत्महत्या के ये आँकड़े चेतावनी हैं कि हमारी युवा पीढ़ी टूट रही है।"
→ मानवाधिकार कार्यकर्ता: "जब सैनिक खुद को मारने लगें, तो यह सिर्फ व्यक्तिगत संकट नहीं—यह पूरे सिस्टम की विफलता है।"
आगे की राह: क्या होगा? 2025 का यह रिकॉर्ड इज़रायल के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। यदि सेना और सरकार ने गंभीरता से इस मुद्दे को नहीं लिया, तो आने वाले वर्षों में आत्महत्या की संख्या और बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह है:
- लगातार युद्ध की नीति पर पुनर्विचार
- सैनिकों के लिए लंबे आराम और रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम
- समाज में युद्ध-विरोधी आवाज़ों को जगह देना
- नैतिक द्वंद्व को स्वीकार कर मनोवैज्ञानिक मदद को प्राथमिकता देना
फिलहाल, 21 आत्महत्याएँ सिर्फ आँकड़े नहीं हैं—ये 21 परिवारों की त्रासदी हैं, 21 युवा जीवन जो टूट गए, और एक ऐसी सेना की चीख जो अब चुप नहीं रह सकती।
Friday World 01 जनवरी, 2026
Sajjadali Nayani✍