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Thursday, 1 January 2026

ट्रंप की लोकप्रियता का सबसे निचला स्तर: आर्थिक मंदी, मुद्रास्फीति और एपस्टीन विवाद ने तोड़ा जनता का भरोसा

ट्रंप की लोकप्रियता का सबसे निचला स्तर: आर्थिक मंदी, मुद्रास्फीति और एपस्टीन विवाद ने तोड़ा जनता का भरोसा
Friday World 01 जनवरी, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला वर्ष उम्मीदों के ठीक उलट संकटों और असफलताओं से भरा रहा है। गैलप संस्थान के वर्षांत सर्वेक्षण (दिसंबर 2025) के अनुसार, ट्रंप की स्वीकृति दर अब महज 36 प्रतिशत रह गई है—यह उनके पूरे राजनीतिक करियर का सबसे निचला स्तर है। रिपब्लिकन समर्थकों में भी यह आंकड़ा 89 प्रतिशत तक सीमित है, जबकि डेमोक्रेट्स में केवल 3 प्रतिशत और स्वतंत्र मतदाताओं में 25 प्रतिशत ही उनका समर्थन करते हैं। 

यह गिरावट कोई अचानक घटना नहीं है। आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति की मार, बेरोजगारी का बढ़ता ग्राफ और जेफरी एपस्टीन मामले जैसे विवादों ने ट्रंप की छवि को गहरी चोट पहुंचाई है। 

अर्थव्यवस्था: ट्रंप की सबसे बड़ी कमजोरी 2025 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने गंभीर मंदी और उच्च मुद्रास्फीति का सामना किया। हैम्पटन ग्लोबल बिजनेस रिव्यू (अगस्त 2025) की रिपोर्ट के अनुसार: 

→ मुद्रास्फीति दर 8-9 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई 
→ खाद्य पदार्थ, आवास, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा की कीमतें 20-35 प्रतिशत तक बढ़ीं 
→ मध्यम और निम्न वर्ग की क्रय शक्ति में 15-20 प्रतिशत की कमी

 लगभग 70 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने अर्थव्यवस्था को “कमजोर” या “बहुत खराब” बताया। ट्रंप प्रशासन ने ब्याज दरें बढ़ाकर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन यह कदम उल्टा पड़ गया—उधार महंगा होने से व्यवसाय ठप हुए, निवेश घटा और बेरोजगारी दर में उछाल आया। 

ट्रंप ने चुनाव प्रचार में बड़े-बड़े वादे किए थे:
 - टैरिफ से अमेरिकी उद्योगों का पुनरुद्धार 
- लाखों नए रोजगार 
- “अमेरिका फर्स्ट” नीति से आर्थिक चमत्कार 

लेकिन हकीकत इसके ठीक विपरीत रही। उत्पादन में गिरावट, कंपनियों में छंटनी और छोटे व्यवसायों का दिवालिया होना आम बात हो गई। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह दौर 2008 की महामंदी के बाद अमेरिका में देखी गई सबसे गहरी आर्थिक चुनौती है। 

 जेफरी एपस्टीन विवाद: राजनीतिक विश्वसनीयता पर घातक प्रहार 

ट्रंप के लिए 2025 का दूसरा बड़ा संकट जेफरी एपस्टीन मामले से जुड़ा रहा। इकोनॉमिस्ट/यूगव सर्वेक्षण के अनुसार: 

47 प्रतिशत अमेरिकी मानते हैं कि ट्रंप प्रशासन एपस्टीन के अपराधों को छिपाने की कोशिश कर रहा है 

46 प्रतिशत** का मानना है कि ट्रंप इस मामले में व्यक्तिगत रूप से शामिल हैं

 एपस्टीन की मौत के बाद जारी दस्तावेजों, पुरानी तस्वीरों और गवाहों के बयानों ने ट्रंप के पुराने संबंधों को फिर से सुर्खियों में ला दिया। भले ही ट्रंप ने बार-बार इन आरोपों से इनकार किया, लेकिन जनता के बीच यह धारणा मजबूत हो गई कि उच्च-स्तरीय कनेक्शन और प्रभावशाली लोगों की सुरक्षा के लिए सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा है। 

इस विवाद ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी असंतोष पैदा किया। कई कांग्रेस सदस्यों और पूर्व सहयोगियों ने खुलकर आलोचना की, जिससे ट्रंप का आधार भी कमजोर हुआ। 
अन्य कारक: सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता - 
आंतरिक पार्टी विद्रोह: कई रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रंप की नीतियों पर खुली असहमति जताई 

प्रदर्शन और सामाजिक अशांति: मुद्रास्फीति और बेरोजगारी के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन -

मीडिया और सोशल मीडिया पर हमला**: ट्रंप की लगातार आक्रामक बयानबाजी ने मध्यम वर्ग को और दूर कर दिया 

एक साल में बदली तस्वीर 

जो ट्रंप 2024 में “अमेरिका को फिर से महान बनाने” के नारे के साथ सत्ता में लौटे थे, वही 2025 के अंत तक सबसे कम लोकप्रिय राष्ट्रपति बनकर उभरे। अर्थव्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और एपस्टीन जैसे विवादों ने उनकी छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 2026 में भी सुधार नहीं हुआ तो ट्रंप का दूसरा कार्यकाल इतिहास के सबसे असफल कार्यकालों में शुमार हो सकता है। जनता का भरोसा टूट चुका है, और इसे वापस पाना अब आसान नहीं लगता। 

Friday World 01 जनवरी, 2026
Sajjadali Nayani ✍