Friday World January 11,2026
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव ने एक बार फिर समाज की संवेदनाओं को झकझोर दिया है। 8 जनवरी 2026 को एक दलित परिवार पर हुए क्रूर हमले में माँ की हत्या और 20 वर्षीय बेटी के अपहरण की घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश फैला दिया। लेकिन पुलिस की त्वरित और संयुक्त कार्रवाई से मात्र दो दिनों में न्याय की उम्मीद जगी है – मुख्य आरोपी पारस सोम (या पारस राजपूत) को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अपहृत दलित युवती रूबी (या रुबी) को भी सुरक्षित बरामद कर लिया गया है।
घटना का दर्दनाक विवरण गुरुवार सुबह करीब 8 बजे कपसाड़ गांव में एक दलित महिला (सुनीता, उम्र लगभग 50 वर्ष) अपनी बेटी के साथ खेत जा रही थीं। रास्ते में गांव के ही युवक पारस सोम (23 वर्ष, एक स्थानीय डॉक्टर के यहां कंपाउंडर) और उसके साथी सुनील कुमार ने युवती को परेशान करना शुरू किया। जब माँ ने बेटी की रक्षा के लिए बीच में आने की कोशिश की, तो आरोपी ने धारदार हथियार (गन्ना काटने का औजार) से महिला पर हमला कर दिया। महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी युवती को जबरन अगवा करके ले भागे।
इस जघन्य वारदात के बाद गांव में भारी तनाव फैल गया। पीड़ित परिवार ने अंतिम संस्कार तक रोक दिया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। भीम आर्मी, विभिन्न दलित संगठन और स्थानीय ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। राजनीतिक दलों ने भी इसे जातीय हिंसा का मामला बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। मायावती, अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा की और न्याय की मांग की।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: 10+ टीमें लगीं, 4 राज्यों में छापेमारी मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. विपिन ताडा ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया। घटना के तुरंत बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या, अपहरण और SC/ST एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। युवती की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 10 से अधिक विशेष टीमें गठित की गईं, जिनमें मेरठ, सहारनपुर, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड की पुलिस शामिल थी।
- पहला दिन: टीमों ने विभिन्न जिलों में छापेमारी की, क्लूज जुटाए गए।
- दूसरा दिन: युवती की अंतिम लोकेशन ट्रेस हुई, जिसके आधार पर हरिद्वार में एक होटल पर छापा मारा गया।
- शनिवार शाम: मुख्य आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार किया गया। युवती को भी सुरक्षित बरामद किया गया। दोनों को मेरठ लाया जा रहा है, जहां पूछताछ जारी है।
एसएसपी विपिन ताडा ने कहा, "हमने मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। अभियुक्त की गिरफ्तारी और युवती की बरामदगी के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। जो भी कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त एक्शन होगा।"
प्रेम प्रसंग का मोड़? प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी पारस और युवती के बीच **तीन साल से प्रेम संबंध** थे। परिवार की मंजूरी न मिलने पर आरोपी ने जबरन अपहरण का रास्ता अपनाया। पुलिस अब इस एंगल की गहराई से जांच कर रही है कि क्या हत्या और अपहरण की पूरी साजिश पहले से रची गई थी।
सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव घटना के बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा। चंद्रशेखर आजाद समेत कई नेताओं को गांव पहुंचने से रोका गया, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ा। परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये दिए गए हैं, और चार्जशीट दाखिल होने पर अतिरिक्त 12 लाख रुपये मिलेंगे।
यह मामला दलित समाज पर हो रहे अत्याचारों, महिलाओं की सुरक्षा और अंतरजातीय संबंधों की जटिलताओं को उजागर करता है। पुलिस की सफलता से न्याय की उम्मीद बंधी है, लेकिन समाज में ऐसे अपराधों को जड़ से खत्म करने की जरूरत है।
जय भीम! न्याय की जीत होगी!!!!
Sajjadali Nayani ✍
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