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Wednesday, 7 January 2026

ट्रंप का अगला निशाना भारतः 500% तक का 'जंगी टैरिफ' लगेगा? अमेरिकी संसद में अगले हफ्ते आएगा बिल, रूस से तेल खरीदने की कीमत चुकानी पड़ सकती है!

ट्रंप का अगला निशाना भारतः 500% तक का 'जंगी टैरिफ' लगेगा? अमेरिकी संसद में अगले हफ्ते आएगा बिल, रूस से तेल खरीदने की कीमत चुकानी पड़ सकती है!
Friday World | January 8, 2026
वाशिंगटन से दिल्ली तक की दोस्ती पर छाया संकट! अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को हरी झंडी दे दी है, जो रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को सीधे निशाना बना सकता है। इस बिल के लागू होने पर भारत जैसे देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लग सकता है। जी हां, आपने सही पढ़ा—500%! यह टैरिफ भारतीय निर्यात को अमेरिकी बाजार में इतना महंगा कर सकता है कि व्यापार संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाए। 

बिल का नाम और उद्देश्य: 'Sanctioning Russia Act of 2025' 

यह द्विपक्षीय (बाइपार्टिसन) विधेयक S.1241 के रूप में जाना जाता है, जिसे सीनेटर लिंडसे ग्राहम (रिपब्लिकन) और रिचर्ड ब्लुमेंटल (डेमोक्रेट) ने अप्रैल 2025 में पेश किया था। इसका मुख्य उद्देश्य रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। बिल के तहत अगर रूस शांति वार्ता में सहयोग नहीं करता, कोई समझौता तोड़ता है या नई आक्रामकता दिखाता है, तो अमेरिका को अधिकार मिल जाएगा कि वह उन देशों पर सेकेंडरी सैंक्शंस लगाए जो रूस से ऊर्जा उत्पाद (तेल, गैस, यूरेनियम आदि) खरीदते हैं। 

बिल में सबसे कठोर प्रावधान यह है कि ऐसे देशों के अमेरिका में होने वाले सभी सामान और सेवाओं (गुड्स एंड सर्विसेज) पर आयात शुल्क **500% तक बढ़ाया** जा सकता है—यह सामान्य टैरिफ से 500% अधिक होगा। यह प्रावधान कांग्रेस.gov पर उपलब्ध बिल टेक्स्ट में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है, जहां कहा गया है कि राष्ट्रपति को ऐसे देशों के आयात पर ड्यूटी बढ़ाने का अधिकार मिलेगा। 

 भारत क्यों है सबसे बड़ा निशाना? यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से बड़े पैमाने पर सस्ता क्रूड ऑयल खरीदा। 2025 में रूसी तेल की हिस्सेदारी 30-40% तक रही, जिससे भारत को कम कीमत पर तेल मिला और महंगाई नियंत्रित रही। लेकिन अमेरिका इसे रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला मानता है। ट्रंप ने कई बार संकेत दिए कि ऐसे देशों को "बहुत गंभीर सैंक्शंस" का सामना करना पड़ेगा।

 सीनेटर ग्राहम ने हाल ही में स्पष्ट कहा कि यह बिल चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर "लीवरेज" देगा ताकि वे रूसी तेल खरीदना बंद करें। हाल के महीनों में भारत ने रूसी तेल आयात कम किया है, लेकिन बिल लागू होने पर खतरा बरकरार है। 


ट्रंप ने दी हरी झंडी, अगले हफ्ते सीनेट में वोटिंग संभव जनवरी 2026 की शुरुआत में सीनेटर ग्राहम ने घोषणा की कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बिल को मंजूरी दे दी है। व्हाइट हाउस की सपोर्ट के साथ बिल अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी हफ्ते (जनवरी 2026 के मध्य में) सीनेट या हाउस में मतदान हो सकता है। अगर दोनों सदनों से पास हो गया, तो ट्रंप इसे कानून बना सकते हैं। फॉक्स न्यूज, इकोनॉमिक टाइम्स और रॉयटर्स जैसी रिपोर्ट्स में यह पुष्टि हुई है कि ट्रंप ने बिल को "ग्रीनलाइट" किया है। 

 भारत पर क्या असर पड़ सकता है? 

- व्यापार युद्ध की आशंका: भारत-अमेरिका व्यापार 100 अरब डॉलर+ का है। 500% टैरिफ से फार्मा, टेक्सटाइल, आईटी, स्टील जैसे निर्यात प्रभावित होंगे।

 - ऊर्जा संकट: रूस से तेल बंद होने पर महंगे मिडिल ईस्ट तेल पर निर्भरता बढ़ेगी, पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। 

- कूटनीतिक तनाव: संबंधों में कड़वाहट, हालांकि भारत पहले से आयात कम कर रहा है। 

- वैश्विक प्रभाव: ऊर्जा बाजार अस्थिर, विकासशील देश पिंच में। 

 भारत की प्रतिक्रिया और भविष्य भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत बातचीत से रास्ता निकाल सकता है या आयात और कम कर सकता है। भारतीय दूत ने भी ग्राहम से टैरिफ राहत की अपील की है।

 क्या भारत स्वतंत्र नीति पर अडिग रहेगा? या दबाव में आएगा? यह बिल वैश्विक भू-राजनीति बदल सकता है। ट्रंप का 'अमेरिका फर्स्ट' सबसे बड़ा टेस्ट! भारत की चतुर कूटनीति फिर कमाल दिखाएगी या नहीं

—समय बताएगा। फिलहाल, तनाव हवा में है—नजर रखिए! 
Sajjadali Nayani ✍
 Friday World | January 8, 2026