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Wednesday, 7 January 2026

लंदन की सड़कों पर गूंजा विरोध: ब्रिटिश ट्रेड यूनियनों और युद्ध-विरोधी समूहों ने अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की, मादुरो की तुरंत रिहाई की मांग

लंदन की सड़कों पर गूंजा विरोध: ब्रिटिश ट्रेड यूनियनों और युद्ध-विरोधी समूहों ने अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की, मादुरो की तुरंत रिहाई की मांग
फ्राइडे वर्ल्ड, 7 जनवरी 2026
7 जनवरी 2026, लंदन – अमेरिका द्वारा 3 जनवरी को वेनेजुएला पर किए गए आतंकवादी सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की किडनैप (गिरफ्तारी) ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है।
 जहां ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मादुरो शासन के अंत पर "कोई आंसू नहीं बहाए" की टिप्पणी की, वहीं लंदन की सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी उतर आए।

 युद्ध-विरोधी संगठन, ट्रेड यूनियनें और श्रमिक आंदोलन इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताते हुए अमेरिका पर दबाव डाल रहे हैं कि मादुरो को तुरंत काराकास वापस भेजा जाए। इस आंदोलन को ब्रिटिश प्रधान मंत्री का मुक समर्थन माना जाता है

  ट्राफलगर स्क्वायर और डाउनिंग स्ट्रीट पर उबला गुस्सा ट्राफलगर स्क्वायर, संसद के सामने और डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर हजारों लोग जमा हुए, जहां नारे लगे—"Hands Off Venezuela!", "No to Imperialist Kidnapping!", "Return Maduro Now!" और "No War on Venezuela!"। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से Stop the War Coalition, Venezuela Solidarity Campaign और Campaign for Nuclear Disarmament (CND) के संयुक्त आह्वान पर हुए।

 Stop the War Coalition ने इसे "21वीं सदी का साम्राज्यवाद" और "तेल के लिए युद्ध अपराध" करार दिया। गठबंधन की प्रमुख लिंडसे जर्मन ने कहा, "यह हमला लोकतंत्र या नशीले पदार्थों के खिलाफ नहीं, बल्कि वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जे की साजिश है। 

ऐसे हस्तक्षेप अराजकता, गरीबी और लंबे संघर्ष को जन्म देते हैं।" प्रदर्शन में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सबसे आगे थे। RMT (Rail, Maritime and Transport Union) ने आधिकारिक बयान में अमेरिकी हमले और मादुरो के "अपहरण" की निंदा की, इसे "संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन" बताया। 

RMT के महासचिव एडी डेम्पसी ने कहा, "हम इस अवैध सैन्य हमले की कड़ी निंदा करते हैं। हम वेनेजुएला के लोगों के साथ एकजुट हैं और साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ खड़े हैं।" 

यूनियन ने ब्रिटिश सरकार से मांग की कि वह संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के खिलाफ मजबूत आवाज उठाए और मादुरो की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करे। PCS (Public and Commercial Services Union) ने भी वेनेजुएला की जनता के प्रति पूर्ण एकजुटता जताई। 
संघ ने इसे "नव-औपनिवेशिक नीति" करार दिया और चेतावनी दी कि ऐसे कदम वैश्विक अस्थिरता को बढ़ावा देंगे। PCS ने संयुक्त राष्ट्र से अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय कानून और लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन कराने की मांग की। 
बेकर्स, फूड एंड अलायड वर्कर्स यूनियन ने मादुरो के अपहरण और काराकास पर बमबारी को "राष्ट्रीय संप्रभुता पर सीधा हमला" बताया। यूनियन ने तुरंत रिहाई की मांग की, अन्यथा इसे लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप की पुरानी श्रृंखला का हिस्सा बताया—जैसे ग्वाटेमाला 1954, चिली 1973 और पनामा 1989। Venezuela Solidarity Campaign  ने इसे "राजनीतिक बदलाव और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण का खुला प्रयास" कहा। 

अभियान के कार्यकर्ताओं ने ब्रिटिश विदेश कार्यालय के बाहर धरना दिया और सरकार से अमेरिकी नीतियों पर स्वतंत्र रुख अपनाने की अपील की। 

 ब्रिटिश समाज में गहरा विभाजन ये विरोध ब्रिटिश समाज में गहरे विभाजन को उजागर कर रहे हैं।

 मुख्यधारा मीडिया और सरकार मादुरो को "अवैध" बताकर अमेरिकी कार्रवाई पर चुप हैं, लेकिन ट्रेड यूनियनें और युद्ध-विरोधी समूह इसे "खतरनाक मिसाल" मानते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ये आंदोलन लंदन सरकार पर नया दबाव डाल सकते हैं, खासकर जब फ्रांस जैसे यूरोपीय सहयोगी भी अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना कर रहे हैं।

  वैश्विक संदर्भ और ब्रिटेन की भूमिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस, चीन, ईरान और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने अमेरिका की निंदा की है। 

ब्रिटेन की यूनियनों का विरोध वैश्विक एकजुटता का हिस्सा है, जो अमेरिका को चेतावनी दे रहा है कि उसका एकतरफा कदम अकेला नहीं चलेगा। 

वेनेजुएला में अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने हमले को "अवैध आक्रमण" बताया है, जबकि मादुरो न्यूयॉर्क की अदालत में खुद को "युद्धबंदी" बताते हुए निर्दोष होने का दावा कर रहे हैं।
 क्या ये विरोध अमेरिकी नीति को प्रभावित करेंगे? या इतिहास दोहराया जाएगा? 

लंदन की सड़कें आज एक स्पष्ट संदेश दे रही हैं—शांति, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की जीत होगी। 
सज्जाद अली नयानी ✍ 
फ्राइडे वर्ल्ड, 7 जनवरी 2026