Friday World – January 4, 2026
3 जनवरी 2026 को अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर किए गए सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है। इस हमले का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ रहा है, जो वेनेजुएला के भारी और सस्ते क्रूड ऑयल का बड़ा खरीदार है। भारतीय रिफाइनरियां – खासकर रिलायंस जामनगर और नायरा एनर्जी – इस तरह के हाई-सulfur, हेवी क्रूड को रिफाइन करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई हैं। इस तेल से पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे मूल्यवान उत्पाद बनाए जाते हैं।
अब सप्लाई रुक जाने से भारत को रोजाना लगभग 6 लाख बैरल तेल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस कमी को पूरा करने के लिए भारतीय तेल कंपनियों को मध्य पूर्व (सऊदी अरब, यूएई, इराक) और कनाडा जैसे देशों से महंगा लाइट क्रूड ऑयल खरीदना पड़ेगा। इससे रिफाइनिंग लागत बढ़ेगी और अंततः पेट्रोल-डीजल के दामों पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत की वेनेजुएला पर निर्भरता 2024 में भारत ने वेनेजुएला से 2.2 करोड़ बैरल (रोजाना लगभग 6 लाख बैरल) क्रूड ऑयल का आयात किया था। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद यह तेल डिस्काउंट पर मिलता था, जो भारत के लिए बड़ी बचत थी। वेनेजुएला का Merey और Boscan जैसा हेवी क्रूड भारतीय रिफाइनरियों के लिए आदर्श है, क्योंकि इससे अधिक मार्जिन के साथ उत्पाद बनाए जा सकते हैं।
ONGC Videsh पर बड़ा झटका भारत की सरकारी कंपनी **ओएनजीसी विदेश ने वेनेजुएला के Carabobo और Orinoco Belt प्रोजेक्ट में भारी निवेश किया है। प्रतिबंधों और अब इस हमले के कारण कंपनी के **लगभग 60 करोड़ डॉलर** का निवेश अटक गया है। इस राशि की वसूली में सालों लग सकते हैं या यह पूरी तरह नुकसान में बदल सकती है।
रूस की ओर मुड़ाव भारतीय तेल कंपनियों ने इस स्थिति का अंदाजा पहले ही लगा लिया था। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही वेनेजुएला पर सख्त रुख की भविष्यवाणी को ध्यान में रखते हुए भारत ने रूसी Urals क्रूड की खरीदारी फिर से शुरू कर दी है। रूस से डिस्काउंट पर मिलने वाला Urals क्रूड वेनेजुएला के तेल का विकल्प बन सकता है, हालांकि इसमें लॉजिस्टिक्स और गुणवत्ता के अंतर के कारण लागत में वृद्धि हो सकती है।
भारत-वेनेजुएला व्यापार पर असर 2025 में दोनों देशों के बीच अनुमानित 4 करोड़ डॉलर का व्यापार हुआ था। इसमें भारत की आयात **2 करोड़ डॉलर से अधिक (मुख्य रूप से तेल) और निर्यात 1.5 करोड़ डॉलर। था। भारत वेनेजुएला को दवाइयां, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, सूरत के कपड़े, रसायन और इलेक्ट्रॉनिक्स बेचता है। खासकर भारतीय जेनेरिक दवाइयां वेनेजुएला की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिनमें से अधिकांश दवाइयां बहुत कम कीमत पर या कभी-कभी मुफ्त में भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
भारत की नीति: निष्पक्षता और सावधानी** भारत अमेरिका-वेनेजुएला संघर्ष में किसी भी पक्ष को लेना नहीं चाहता। पहले जब अमेरिका ने वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाए थे, तब भी भारत ने उसकी खुली आलोचना नहीं की थी। वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच बड़ी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। यदि भारत इस मुद्दे पर कोई आक्रामक बयान देता है तो ट्रेड डील अटक सकती है या देरी हो सकती है। इसलिए भारत ने इस मामले में संयम बरतने की रणनीति अपनाई है।
भविष्य की चिंता इस हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति एक बड़ा चुनौती है। रूस, इराक और अन्य वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ानी पड़ेगी, लेकिन लंबे समय में तेल के दामों और रिफाइनिंग मार्जिन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भू-राजनीतिक तनाव ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक रणनीति को कैसे प्रभावित करते हैं। भारत के लिए अब समय है कि वह तेल आयात के विविधीकरण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर अधिक ध्यान केंद्रित करे।
Sajjadali Nayani✍
Friday World – January 4, 2026