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Thursday, 15 January 2026

"थोड़ी शर्म करो!" – ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने जर्मनी के चांसलर पर साधा तीखा हमला: गाजा में 70 हजार फिलिस्तीनियों के नरसंहार पर दोहरे मापदंड की कड़ी आलोचना"

"थोड़ी शर्म करो!" – ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने जर्मनी के चांसलर पर साधा तीखा हमला: गाजा में 70 हजार फिलिस्तीनियों के नरसंहार पर दोहरे मापदंड की कड़ी आलोचना"
-Friday World – 15 जनवरी, 2026
13 जनवरी 2026 को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जर्मनी मानवाधिकारों पर दूसरों को लेक्चर देने के लिए सबसे अनुपयुक्त देश है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "एक एहसान करो... थोड़ी शर्म करो!" (Do us all a favor: have some shame)। यह बयान जर्मन चांसलर द्वारा ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करने और ईरानी नेतृत्व को "अंतिम दिनों" में बताने के जवाब में आया है। 

अराक़ची ने अपने X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में लिखा कि जर्मनी के दोहरे मापदंडों ने मानवाधिकारों पर उसकी विश्वसनीयता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। उन्होंने पूछा: 

"जब ईरान आतंकवादियों को हराता है जो नागरिकों और पुलिस अधिकारियों की हत्या करते हैं, तो जर्मन चांसलर तुरंत घोषणा कर देते हैं कि 'हिंसा कमजोरी की अभिव्यक्ति है'। फिर गाजा में 70 हजार फिलिस्तीनियों के सामूहिक नरसंहार में आपके पूर्ण समर्थन के बारे में आप क्या कहते हैं?" 

यह विवाद तब उभरा जब जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ईरान में आर्थिक संकट से उपजे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को "अंतिम दिनों" का संकेत बताते हुए कहा कि ईरानी शासन अब टिक नहीं सकता। उन्होंने ईरान पर "अवैध हस्तक्षेप" बंद करने की मांग भी की। लेकिन अराक़ची ने इसे "बेशर्मी" करार देते हुए जवाब दिया कि जर्मनी ने गाजा में जारी "नरसंहार" (जिसे उन्होंने US-इजरायल जनसंहार कहा) पर पूरी तरह समर्थन दिया है, जबकि ईरान में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई पर आलोचना की। 

अराक़ची ने आगे कहा कि जर्मनी ने जून 2025 में इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों (जिसमें घरों और कारोबारों पर बमबारी शामिल थी) को "यूरोप के लिए फायदेमंद" बताकर समर्थन दिया था। उन्होंने इसे "घृणित" करार दिया और कहा कि इजरायल "यूरोप का गंदा काम" कर रहा था। साथ ही, उन्होंने यूरोपीय संसद के ईरानी राजनयिकों पर प्रतिबंध को भी दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया, क्योंकि गाजा में दो साल से अधिक समय से जारी "जनसंहार" पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

 गाजा संकट पर अराक़ची की टिप्पणियाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंज रही हैं, जहाँ फिलिस्तीनी क्षेत्र में तबाही की तस्वीरें दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं: 

यह घटना मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और पश्चिमी देशों के नीतिगत विरोधाभासों को उजागर करती है। ईरान ने बार-बार कहा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा, जबकि गाजा में फिलिस्तीनी मौतों (70 हजार से अधिक) पर पश्चिमी चुप्पी या समर्थन को "पाखंड" बताया है। 

जर्मनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है, लेकिन यह विवाद मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोहरे मापदंडों की बहस को और तेज कर सकता है। 

Sajjadali Nayani✍
Friday World – 15 जनवरी, 2026