Friday World January 2, 2026
1 जनवरी 2026 को न्यूयॉर्क शहर के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया, जब ज़ोहरान ममदानी ने शहर के पहले मुस्लिम मेयर के रूप में शपथ ली। 34 वर्षीय डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट ने क़ुरान पर हाथ रखकर शपथ ग्रहण की, जो न्यूयॉर्क के लिए एक ऐतिहासिक पल था।
ममदानी की जीत और शपथ के बाद दुनिया भर से बधाइयाँ आईं, लेकिन सबसे ख़ास संदेश आया लंदन के मेयर सादिक़ ख़ान की ओर से।
सादिक़ ख़ान का पॉलिटिको इंटरव्यू: दिल तोड़ने वाला, मगर प्रेरणादायक 55 वर्षीय सादिक़ ख़ान, जो किसी पश्चिमी राजधानी के पहले मुस्लिम मेयर बने थे और अब अपना तीसरा कार्यकाल चला रहे हैं, ने पॉलिटिको मैगज़ीन को दिए एक इंटरव्यू में ज़ोहरान ममदानी के अनुभवों पर गहरा दर्द और सम्मान व्यक्त किया।
ख़ान ने कहा कि यह "दिल तोड़ने वाला" (heartbreaking) है कि उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल की गईं वही इस्लाम-विरोधी (anti-Islam) और मुस्लिम-विरोधी छवियाँ अब ममदानी को निशाना बना रही हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान ममदानी को नफ़रत भरे आरोपों, मुस्लिम-विरोधी गालियों और ग़लत जानकारी के बावजूद सामना करना पड़ा।
फिर भी, ख़ान ने ममदानी की तारीफ़ करते हुए कहा: "नफ़रत भरे आरोपों, मुस्लिम-विरोधी गालियों और ग़लत जानकारी के बीच भी ज़ोहरान ममदानी ने दृढ़ता और गरिमा बनाए रखी। उनका जवाब नफ़रत के सामने उम्मीद और एकता पर टिका था, जिसने न्यूयॉर्क के लोगों को और उससे कहीं आगे तक कई लोगों को प्रेरित किया।
पद संभालते समय मैं उनके लिए हर सफलता की कामना करता हूं।" ख़ान ने यह भी ज़ोर दिया कि ममदानी ने इन हमलों का सामना बेहद शानदार तरीक़े से किया। उन्होंने कहा कि ममदानी की जीत यह साबित करती है कि उम्मीद और एकता हमेशा डर और विभाजन पर जीत हासिल करती है — ठीक वैसे ही जैसे लंदन में उनकी अपनी जीत हुई थी।
दोनों मेयरों की समानता: मुस्लिम पहचान और नफ़रत का सामना सादिक़ ख़ान और ज़ोहरान ममदानी के बीच कई समानताएँ हैं। दोनों ही मुस्लिम मूल के नेता हैं, जो अपनी धार्मिक पहचान के बावजूद प्रगतिशील राजनीति पर जोर देते हैं। ख़ान ने 2016 में लंदन के मेयर बनकर इतिहास रचा था, और अब ममदानी ने न्यूयॉर्क में वही इतिहास दोहराया है।
ख़ान ने इंटरव्यू में बताया कि वे ममदानी से संपर्क में हैं और भविष्य में मिलने की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने कहा कि ममदानी का प्रभाव सिर्फ़ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा — यह दुनिया भर में "ममदानी प्रभाव" (Mamdani effect) के रूप में फैलेगा।
न्यूयॉर्क और लंदन: उम्मीद की जीत का संदेश ज़ोहरान ममदानी की शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने क़ुरान पर हाथ रखा और शहर को किफ़ायती, सुरक्षित और समावेशी बनाने का वादा किया।
उनकी जीत युवाओं, प्रगतिशीलों और विविधता में विश्वास रखने वालों के लिए प्रेरणा बनी।
सादिक़ ख़ान का संदेश साफ़ है — नफ़रत और इस्लामोफ़ोबिया के बावजूद, उम्मीद जीतती है।
उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर भी लिखा कि न्यूयॉर्क और लंदन दोनों शहर डर के बजाय एकता चुन रहे हैं। यह घटना न सिर्फ़ दो महानगरों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक संदेश है:
विविधता ताक़त है, और नफ़रत के सामने गरिमा और दृढ़ता से जवाब देना ही असली नेतृत्व है।
Friday World January 2, 2026
Sajjadali Nayani✍