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Thursday, 1 January 2026

H-1B वीज़ा विवाद के बीच अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नफरत

H-1B वीज़ा विवाद के बीच अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नफरत
Friday World January 2, 2026
अमेरिका में H-1B वर्क वीज़ा को लेकर चल रही तीखी बहस ने भारतीय मूल के लोगों के लिए एक नया खतरा पैदा कर दिया है। इस वीज़ा के ज़रिए अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले 70% से ज्यादा लोग भारतीय हैं। इसी कारण इसे "अमेरिकी नौकरियां चुराने का ज़रिया" बताकर निशाना बनाया जा रहा है। इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर नफरत, जातिवादी टिप्पणियां और सीधी धमकियां तेज़ी से बढ़ रही हैं। 

एक विवादास्पद पोस्ट ने भड़काई आग हाल ही में एक अमेरिकी दक्षिणपंथी पत्रकार और कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट डाली, जिसमें उन्होंने 2026 में भारतीय-अमेरिकी समुदाय और हिंदू मंदिरों पर बड़े पैमाने पर हमलों की भविष्यवाणी की। उन्होंने लिखा कि भारतीयों के घर, व्यवसाय और धार्मिक स्थल गोलीबारी और बम विस्फोट का शिकार हो सकते हैं। 

उन्होंने यह भी कहा कि ये हमले गोरे अमेरिकियों द्वारा नहीं, बल्कि अन्य नस्लीय समूहों द्वारा किए जाएंगे। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि उन्होंने हिंसा रोकने का एकमात्र उपाय बताते हुए कहा: "DEI: Deport Every Indian" (हर भारतीय को डिपोर्ट करो)। 

विवाद बढ़ने पर यह पोस्ट डिलीट कर दी गई, लेकिन इसके स्क्रीनशॉट और वायरल हिस्से पूरे भारतीय-अमेरिकी समुदाय में डर और गुस्से का कारण बन गए। 

 भारतीय समुदाय की प्रतिक्रिया और FBI से अपील 

Indian American Advocacy Council (IAAC) जैसी प्रमुख संस्था ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने साफ कहा: 

- यह राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि सीधी उकसावा है 

- ऐसे बयान वास्तविक जिंदगियों को खतरे में डालते हैं 

- ऑनलाइन पोस्ट्स अब "खतरनाक हद" पार कर चुकी हैं 

IAAC ने FBI  और अन्य सुरक्षा एजेंसियों से तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी धरती पर नरसंहार वाली (जेनोसाइडल) भाषा और धमकियों को कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए। 

H-1B विवाद से नफरत तक का सफर H-1B वीज़ा पर बहस पिछले कई सालों से गरमाई हुई है। टेक कंपनियों में कुशल कर्मचारियों की बड़ी संख्या भारतीय होने के कारण कई अमेरिकियों में गुस्सा है कि "हमारी नौकरियां विदेशियों को दी जा रही हैं"। इस भावना को कुछ राजनीतिक नेता और सोशल मीडिया प्रभावशाली लोगों ने और भड़काया है, जिसके नतीजे में सामान्य भारतीय-अमेरिकी परिवार भी निशाने पर आ गए हैं। 

आगे क्या? यह घटनाएं एक बात साफ करती हैं: इमिग्रेशन का विवाद बहुत जल्दी नस्लीय नफरत में बदल सकता है। अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोग, जिन्होंने टेक्नोलॉजी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दिया है, अब सिर्फ नीतिगत बहस का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत सुरक्षा का भी सवाल सामना कर रहे हैं।

 इस वक्त समुदाय की एकजुटता, सरकारी संस्थाओं की त्वरित कार्रवाई और समाज के हर वर्ग का सहयोग बहुत ज़रूरी है, ताकि नफरत की यह लहर वास्तविक हिंसा में न बदल जाए।
Friday World January 2, 2026
Sajjadali Nayani✍