- Friday World January 14,2026
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की एयरोस्पेस फोर्स ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति का ऐलान किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग की हालिया बैठक में ब्रिगेडियर जनरल सैयद माजिद मौसवी, जो आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर हैं, ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान की मिसाइलें किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब जून 2025 में हुए 12-दिवसीय युद्ध के बाद क्षेत्रीय तनाव अभी भी चरम पर है।
→ मिसाइल उत्पादन में भारी विस्तार जनरल मौसवी ने बताया कि युद्ध के बाद ईरान ने अपने मिसाइल उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है। नई और उन्नत मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाया गया है, जिसमें हाइपरसोनिक और सॉलिड-फ्यूल वाली मिसाइलें शामिल हैं। यह कदम ईरान की रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है, ताकि दुश्मन किसी भी तरह की गलतफहमी में न पड़े।
→ 12-दिवसीय युद्ध के सभी नुकसान की मरम्मत पूरी जून 2025 में इजराइल द्वारा शुरू किए गए आक्रामक हमलों (जिसमें अमेरिका भी शामिल हुआ) के दौरान ईरान के कई मिसाइल ठिकानों, लॉन्चरों और अन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा था। लेकिन जनरल मौसवी ने स्पष्ट किया कि इन सभी क्षतियों की मरम्मत पूरी हो चुकी है।
→ युद्धकालीन नुकसान की मरम्मत में महज कुछ महीनों का समय लगा।
→ क्षतिग्रस्त लॉन्चरों को अपग्रेड किया गया और नए संस्करणों से बदल दिया गया।
→ ऑपरेशनल क्षमता अब पहले से भी ज्यादा मजबूत हो गई है। यह तेज रिकवरी ईरान की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता का प्रमाण है, जिसने दुश्मनों को चौंका दिया।
→ इजराइल या अमेरिका – किसी भी हमले का निर्णायक जवाब तैयार
कमांडर मौसवी का सबसे मजबूत संदेश यही था कि ईरान अब किसी भी आक्रामक कार्रवाई का इंतजार नहीं करेगा। उन्होंने कहा:
→ "ईरान के खिलाफ कोई भी शत्रुतापूर्ण कदम – चाहे वह इजराइल से आए या अमेरिका से – का **निर्णायक और त्वरित जवाब** दिया जाएगा।"
→ "हमारी फोर्सेस पूरी तरह तैयार हैं और मिसाइलें हमेशा लॉन्च के लिए तैयार खड़ी हैं।"
यह बयान 12-दिवसीय युद्ध के दौरान ईरान द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III की याद दिलाता है, जिसमें 22 चरणों में सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे गए थे, जिससे इजराइल में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था।
ईरान की मिसाइल ताकत: एक नजर में ईरान की एयरोस्पेस फोर्स दुनिया की सबसे बड़ी और उन्नत मिसाइल इन्वेंटरी में से एक संचालित करती है। युद्ध के बाद अपग्रेड्स के साथ अब ये मिसाइलें ज्यादा सटीक, तेज और दुश्मन की एयर डिफेंस को चकमा देने वाली हो गई हैं।
→ हाइपरसोनिक मिसाइलें (जैसे फतह-1) जो दुश्मन के इंटरसेप्टर्स से बच सकती हैं।
→ लंबी दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइलें जो पूरे क्षेत्र को कवर करती हैं।
→ ड्रोन और मिसाइलों का संयुक्त हमला, जो इजराइल की डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड कर सकता है।
→ क्षेत्रीय संदेश: शांति या तबाही का फैसला दुश्मन के हाथ में
यह बयान न सिर्फ सैन्य तैयारी दिखाता है, बल्कि एक साफ चेतावनी भी है। ईरान बार-बार कह चुका है कि वह आक्रामक नहीं है, लेकिन अगर हमला हुआ तो जवाब इतना मजबूत होगा कि दुश्मन को पछतावा होगा। जनरल मौसवी के शब्दों में, "हमारे पास इतनी ताकत है कि हम किसी भी चुनौती का मुकाबला कर सकते हैं।"
ईरान की यह मजबूत स्थिति न केवल अपनी रक्षा के लिए है, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिरोध के लिए भी एक मजबूत संदेश है। 12-दिवसीय युद्ध के बाद ईरान ने साबित कर दिया कि वह न सिर्फ टिक सकता है, बल्कि और मजबूत होकर उभर सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या दुश्मन इस चेतावनी को गंभीरता से लेंगे, या फिर नई गलती करके खुद को और नुकसान पहुंचाएंगे? समय बताएगा।
ईरान मजबूत है – और तैयार है!-🇮🇷
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 14,2026