अमेरिका की बढ़ती सख्ती और रूस का कड़ा रुख।** 7 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में (आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच) रूसी झंडे वाले तेल टैंकर **मैरिनेरा** (पहले बेला-1) को जब्त कर लिया। यह जहाज़ वेनेज़ुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल व्यापार का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका ने इसे "शैडो फ्लीट" (छिपे हुए जहाज़ों का बेड़ा) का हिस्सा बताया, जो प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए इस्तेमाल होता है। साथ ही, कैरिबियन सागर में एक अन्य टैंकर एम/टी सोफिया को भी पकड़ा गया।
जहाज़ की पृष्ठभूमि और पीछा। मैरिनेरा (पूर्व नाम बेला-1) पिछले महीने वेनेज़ुएला के तट पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी से बच निकला था। अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने दिसंबर में इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन जहाज़ ने बोर्डिंग से इनकार कर दिया और अटलांटिक की ओर मुड़ गया। इस दौरान जहाज़ का नाम बदलकर मैरिनेरा किया गया और इसे रूसी झंडा लगा दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जहाज़ "फर्जी झंडा" उड़ाकर प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा था। जब्ती के समय जहाज़ पर कोई तेल नहीं था, लेकिन यह वेनेज़ुएला से तेल लोड करने की राह पर था।
रूसी विदेश मंत्रालय का बयान: "ग़ैरक़ानूनी कार्रवाई"। रूसी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर बयान जारी कर अमेरिका से अपील की कि वह "समुद्र में कानून के अनुसार काम कर रहे मैरिनेरा और अन्य जहाज़ों के खिलाफ अपनी ग़ैरक़ानूनी कार्रवाई तुरंत बंद करे"। मंत्रालय ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) का हवाला देते हुए कहा कि उच्च समुद्र में जहाज़ों की स्वतंत्रता है और किसी देश को दूसरे देश के रजिस्टर्ड जहाज़ पर बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं। रूस ने मांग की कि जहाज़ पर सवार रूसी नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए और उन्हें जल्द वापस भेजा जाए। रूसी परिवहन मंत्रालय ने पुष्टि की कि जहाज़ को दिसंबर में अस्थायी रूप से रूसी झंडा दिया गया था और अमेरिकी बोर्डिंग के बाद संपर्क टूट गया।
रूसी सांसदों का गुस्सा: "समुद्री डकैती"। रूस की सत्ताधारी पार्टी यूनाइटेड रूस के सीनेटर आंद्रेई क्लिशास ने इसे "उच्च समुद्रों पर खुली डकैती" करार दिया। ड्यूमा कमेटी के चेयरमैन लियोनिद स्लुत्स्की ने इसे "समुद्री कानून और यूएन संधियों का उल्लंघन" बताया। रूसी मीडिया और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यह घटना यूरो-अटलांटिक क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकती है और शांतिपूर्ण शिपिंग के खिलाफ बल प्रयोग का नया निचला स्तर स्थापित कर सकती है।
→ अमेरिका का पक्ष: प्रतिबंधों का सख्त प्रवर्तन।** ट्रंप प्रशासन ने इसे वेनेज़ुएला के तेल निर्यात पर "पूर्ण नाकाबंदी" का हिस्सा बताया। व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने कहा कि जहाज़ "फर्जी झंडे" के साथ "स्टेटलेस" घोषित किया गया। अमेरिकी यूरोपीय कमांड ने पुष्टि की कि जब्ती एक फेडरल कोर्ट के वारंट पर की गई। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे वेनेज़ुएला की "स्थिरता" के प्रयास बताया। अमेरिका का कहना है कि ऐसे जहाज़ ईरान, रूस और वेनेज़ुएला के प्रतिबंधित तेल व्यापार में शामिल हैं, जो आतंकवाद और ड्रग तस्करी को फंड करते हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव और जोखिम। यह घटना ट्रंप की वेनेज़ुएला नीति का हिस्सा है, जिसमें हाल ही में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी शामिल है। रूस, जो वेनेज़ुएला का मजबूत समर्थक है, इसे "नियो-औपनिवेशिक" कार्रवाई मान रहा है। जहाज़ के पास रूसी पनडुब्बी और जहाज़ मौजूद थे, लेकिन कोई टकराव नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अमेरिका-रूस संबंधों पर असर डाल सकती है, खासकर यूक्रेन शांति वार्ताओं के बीच। साथ ही, यह "शैडो फ्लीट" पर अमेरिकी दबाव बढ़ाने का संकेत है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
क्या आगे बढ़ेगा तनाव? मैरिनेरा की जब्ती अमेरिका की वैश्विक प्रतिबंध प्रवर्तन की सबसे साहसिक कार्रवाइयों में से एक है। रूस की ओर से यह "समुद्री कानून का उल्लंघन" है, जबकि अमेरिका इसे "कानूनी" और आवश्यक मानता है। क्या यह घटना बड़े राजनयिक संकट में बदल जाएगी, या दोनों पक्ष इसे सीमित रखेंगे? समय बताएगा, लेकिन उच्च समुद्रों में यह नया टकराव वैश्विक समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा व्यापार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 9 जनवरी 2026