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Saturday, 17 January 2026

हॉर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया का सबसे खतरनाक 'तेल का गला' – अगर बंद हुआ तो क्या होगा?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया का सबसे खतरनाक 'तेल का गला' – अगर बंद हुआ तो क्या होगा?
-Friday World January 17,2026
दुनिया की ऊर्जा धमनियाँ कितनी नाजुक होती हैं, इसका सबसे बड़ा सबूत है हॉर्मुज जलडमरूमध्य

यह सिर्फ़ 33 किलोमीटर चौड़ा संकरी पानी का रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।

 लेकिन इसी छोटे से गले से रोज़ाना 20 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल और दुनिया का एक तिहाई तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) गुजरता है – यानी वैश्विक तेल खपत का करीब 20%! यहाँ एक नज़र डालिए इस महत्वपूर्ण चोकपॉइंट पर: 
ये तस्वीरें दिखाती हैं कि कितना तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है 
– ईरान एक तरफ़, ओमान दूसरी तरफ़, और बीच में दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा लटकी हुई! 

क्यों है यह इतना खास और खतरनाक? - ईरान के पास इस जलडमरूमध्य पर भौगोलिक नियंत्रण है।

 ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के पास स्पीडबोट्स, एंटी-शिप मिसाइलें, ड्रोन और समुद्री माइंस हैं। - पिछले कुछ सालों में (खासकर 2025 के इजरायल-ईरान संघर्ष और 2026 की शुरुआत में अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान) ईरान ने कई बार धमकी दी है कि अगर हमला हुआ तो यह रास्ता बंद कर देंगे।

फिर भी, आंशिक बाधा (टैंकरों पर हमला, माइंस बिछाना, जहाजों को डराना) बहुत आसान है – और यही काफी है बाजार को हिलाने के लिए। 

अगर बंद हुआ तो तेल की कीमतें कहाँ पहुँचेंगी?

 विशेषज्ञों के अनुमान (2025-2026 रिपोर्ट्स से): 

- सिर्फ़ धमकी या अफवाह 
→ तेल कीमतों में 5-15 डॉलर का उछाल (जैसे जून 2025 में Brent $67 से $76 तक गया)।

 - आंशिक डिस्टर्बेंस (कुछ दिन) 
→ 10-30 डॉलर तक बढ़ोतरी। 

- पूर्ण या लंबा बंद (कई हफ्ते) 
→ $100 से $130+ प्रति बैरल तक जा सकता है! कुछ रिपोर्ट्स में $150 तक की बात भी है।

 यहाँ एक चार्ट देखिए जो पिछले संकटों में तेल कीमतों के उछाल को दिखाता है (और 2025-26 में भी ऐसा ही पैटर्न देखा गया):
ये तस्वीरें टैंकरों पर ईरानी कार्रवाई और सैन्य तनाव की याद दिलाती हैं:

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? 

1. एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित – चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया – ये देश 70% से ज्यादा तेल इसी रास्ते से लेते हैं। भारत में पेट्रोल-डीजल ₹150-200+ तक पहुँच सकता है, ट्रांसपोर्ट महंगा, महंगाई आसमान छूएगी। 

2. LNG संकट – कतर का पूरा एक्सपोर्ट रुक सकता है
 → यूरोप में हीटिंग और बिजली का संकट। 

3. शिपिंग और ट्रेड – जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से घूमना पड़ेगा (10-14 दिन अतिरिक्त), फ्रेट कॉस्ट 5-10 गुना बढ़ेगा, बीमा प्रीमियम आसमान छुएगा। 

4. वैश्विक मंदी – ऊर्जा कीमतें बढ़ने से महंगाई, ब्याज दरें बढ़ेंगी, स्टॉक मार्केट गिरेंगे, और कई देशों में रिसेशन आ सकता है। 

5. अल्टरनेटिव रूट्स – सऊदी और UAE के पास कुछ बाइपास पाइपलाइन हैं (करीब 5-7 मिलियन बैरल प्रतिदिन), लेकिन ये पूरी कमी नहीं भर सकतीं। 

एक छोटा सा गला, पूरी दुनिया की कमर तोड़ सकता है! हॉर्मुज सिर्फ़ एक जलडमरूमध्य नहीं – यह वैश्विक ऊर्जा की कमजोर कड़ी है। ईरान-अमेरिका या इजरायल के बीच बड़ा युद्ध हुआ तो यह रास्ता डिस्टर्ब होने की अच्छी संभावना है। 

 फिर भी, दुनिया को तैयार रहना चाहिए। क्योंकि इतिहास बताता है – जब बात ऊर्जा की आती है, तो छोटी सी चिंगारी भी आग लगा सकती है।

 क्या आप तैयार हैं उस दिन के लिए जब तेल की कीमतें आसमान छू लें और दुनिया की अर्थव्यवस्था एक झटके में हिल जाए? यह सवाल सिर्फ़ भू-राजनीति का नहीं – हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का है। 
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World January 17,2026