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Monday, 5 January 2026

वेनेज़ुएला पर ट्रंप का सैन्य हमला और मादुरो दंपती का अपहरण: इसी बीच रूस का परमाणु 'दोमुखी' संदेश – पोसीडॉन टॉरपीडो का सफल परीक्षण!

वेनेज़ुएला पर ट्रंप का सैन्य हमला और मादुरो दंपती का अपहरण: इसी बीच रूस का परमाणु 'दोमुखी' संदेश – पोसीडॉन टॉरपीडो का सफल परीक्षण!
Friday World January 6,2026
2026 की शुरुआत ही वैश्विक तनाव से भरी रही। अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को 'अपहरण' कर लिया, जबकि रूस ने अपनी परमाणु ताकत का नया प्रदर्शन किया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने **पोसीडॉन** परमाणु-संचालित अंडरवाटर ड्रोन (टॉरपीडो) का सफल परीक्षण घोषित किया, जिसे दुनिया का सबसे घातक 'डूम्सडे' हथियार माना जा रहा है। यह घटना अक्टूबर 2025 में हुई, लेकिन इसका प्रभाव 2026 की शुरुआत में वैश्विक भू-राजनीति पर गहरा पड़ा। 

वेनेज़ुएला संकट: ट्रंप का 'ऑयल ग्रैब' और मादुरो का अपहरण
 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने वेनेज़ुएला की राजधानी कराकास सहित कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए। ट्रंप प्रशासन ने इसे "ड्रग ट्रैफिकिंग और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई" बताया। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी फोर्सेस ने 'कैद' कर लिया और न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन्हें ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के आरोपों में पेश किया गया। ट्रंप ने खुले तौर पर कहा, "हम वेनेज़ुएला को चलाएंगे" और देश के विशाल तेल भंडार पर अमेरिकी कंपनियों को नियंत्रण देने की बात कही।

 वेनेज़ुएला की अंतरिम सरकार ने इसे "आक्रमण और अपहरण" करार दिया। डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया, जबकि मादुरो के समर्थकों ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किए। ट्रंप ने दावा किया कि यह कार्रवाई अमेरिका में आने वाले ड्रग्स और गैंग्स (जैसे ट्रेन डे अरागुआ) को रोकने के लिए जरूरी थी। लेकिन आलोचकों ने इसे "साम्राज्यवादी हमला" और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। इस घटना ने लैटिन अमेरिका में अस्थिरता बढ़ाई और वैश्विक तेल बाजार पर असर डाला। 

 रूस का परमाणु प्रदर्शन: पोसीडॉन – 'अनस्टॉपेबल' डूम्सडे टॉरपीडो इसी वैश्विक उथल-पुथल के बीच, रूस ने अपनी परमाणु ताकत का नया अध्याय लिखा। अक्टूबर 2025 के अंत में पुतिन ने मॉस्को में यूक्रेन युद्ध में घायल सैनिकों से मुलाकात के दौरान घोषणा की कि रूस ने पोसीडॉन (Status-6 या 2M39) परमाणु-संचालित अंडरवाटर व्हीकल का सफल परीक्षण किया है। 

पुतिन ने इसे "एक बड़ी सफलता" बताया और कहा कि पोसीडॉन की ताकत सरमत (Satan-2) अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल से भी कहीं अधिक है। यह पहली बार था जब टॉरपीडो को सबमरीन से लॉन्च किया गया और इसका न्यूक्लियर रिएक्टर मिड-मिशन में सक्रिय हुआ। 

पोसीडॉन की खासियतें:

 - लंबाई: लगभग 20 मीटर, वजन 100 टन 

- रेंज: 10,000 किमी से अधिक (अनलिमिटेड, न्यूक्लियर पावर की वजह से) 

- स्पीड: 200 किमी/घंटा तक, गहराई 1,000 मीटर से ज्यादा 

- वारहेड: 2 से 100 मेगाटन तक का न्यूक्लियर वॉरहेड, जो तटीय शहरों में रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा कर सकता है 

- उद्देश्य: मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बचकर दुश्मन के तटीय इलाकों को नष्ट करना 

पुतिन ने इसे 2018 में अमेरिका के ABM ट्रीटी से निकलने, मिसाइल डिफेंस और NATO विस्तार के जवाब में पेश किया था।

 बुरेवेस्टनिक के बाद पोसीडॉन: रूस का डबल ब्लो 

इससे ठीक पहले (अक्टूबर 2025 में) रूस ने 
बुरेवेस्टनिक (SSC-X-9 Skyfall) न्यूक्लियर-पावर्ड क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया। यह मिसाइल 14,000 किमी की दूरी तय कर 15 घंटे तक हवा में रही। पुतिन ने इसे "दुनिया में अनोखा" बताया, जिसकी रेंज अनलिमिटेड है और यह किसी भी डिफेंस से बच सकता है। 

ये दोनों परीक्षण न्यू START संधि (फरवरी 2026 में समाप्त) के अंतिम चरण में हुए, जिससे अमेरिका-रूस के बीच परमाणु नियंत्रण पर सवाल खड़े हो गए। ट्रंप ने इन परीक्षणों को "अनुचित" बताया और अमेरिका के परमाणु परीक्षण फिर शुरू करने की बात कही। 

वैश्विक प्रभाव: क्या शुरू हो रहा है नया आर्म्स रेस? वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमला और रूस का परमाणु प्रदर्शन एक साथ आना संयोग नहीं लगता। पुतिन ने इसे पश्चिमी दबाव के खिलाफ जवाब बताया, जबकि ट्रंप ने रूस को "पेपर टाइगर" कहा। ये घटनाएं दिखाती हैं कि 2026 में दुनिया एक नए परमाणु तनाव के दौर में प्रवेश कर रही है।

 - न्यू START संधि का अंत: बिना नई संधि के, दोनों महाशक्तियां बिना सीमा के हथियार बढ़ा सकती हैं।

 - डिटरेंस का नया दौर: पोसीडॉन और बुरेवेस्टनिक जैसे हथियार "दूसरी स्ट्राइक" की गारंटी देते हैं। 

- वैश्विक अस्थिरता: वेनेज़ुएला जैसे क्षेत्रीय संघर्ष परमाणु शक्ति प्रदर्शन से जुड़कर बड़े युद्ध का खतरा बढ़ा रहे हैं। 

यह दौर याद दिलाता है कि शीत युद्ध कभी खत्म नहीं हुआ, बस नई शक्ल ले रहा है। पुतिन का संदेश साफ है – रूस पीछे नहीं हटेगा, चाहे ट्रंप कितना भी दबाव बनाए। दुनिया अब सांस रोककर देख रही है कि अगला कदम क्या होगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World January 6,2026