Friday World January 6, 2026
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, "अमेरिका गर्व से कहता है कि उसने ईरान के परमाणु उद्योग को नष्ट कर दिया है... बहुत अच्छा, ऐसे ही सपने देखते रहो!" यह बयान ट्रंप के हालिया दावे पर आया है कि जून 2025 में अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों ने ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों को पूरी तरह तबाह कर दिया था।
"जब दुनिया मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद कर रही थी, तब खामेनेई ने ट्रंप को सीधे चैलेंज करते हुए कहा – 'सपने देखना टैक्स-फ्री है, सपने देखते रहो!' यह एक ऐसा मोमेंट था जो पूरी दुनिया की नजरें तेहरान और वाशिंगटन पर केंद्रित कर गया।"
खामेनेई ने इसे महज "सपने" बताकर ट्रंप की बात को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि अमेरिका को ईरान के परमाणु कार्यक्रम में कोई दखल देने का अधिकार नहीं है। यह घटना अक्टूबर 2025 में हुई, जब ट्रंप ने इजरायली संसद (नेसेट) में भाषण के दौरान गाजा युद्धविराम की सफलता के बाद ईरान के साथ शांति समझौते की बात की थी।
ट्रंप ने कहा था कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत हो तो यह बहुत अच्छी बात होगी। लेकिन खामेनेई ने इस प्रस्ताव को सीधे ठुकरा दिया। उन्होंने कहा, "अगर कोई समझौता जबरदस्ती, धमकी या पहले से तय परिणाम के साथ किया जाए, तो वह समझौता नहीं, बल्कि दबाव और धमकी की कोशिश है।" साथ ही उन्होंने ट्रंप को "डीलमेकर" कहने पर भी व्यंग्य किया और कहा कि अमेरिका किसी देश को परमाणु सुविधा रखने या न रखने का अधिकार नहीं दे सकता।
जून 2025 के हमलों की पृष्ठभूमि इस तनाव की जड़ जून 2025 में है, जब इजरायल ने 13 जून से ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए। इन कार्रवाइयों में ईरान के परमाणु केंद्रों, बैलिस्टिक मिसाइल साइटों और सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया। इजरायल का दावा था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि ईरान हमेशा इन आरोपों को नकारता है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण ऊर्जा उत्पादन के लिए है।
इजरायल ने नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसे प्रमुख केंद्रों को निशाना बनाया। उसके बाद 22 जून को अमेरिका ने भी सीधी कार्रवाई की और B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स से फोर्डो जैसे अंडरग्राउंड सुविधाओं पर बंकर-बस्टर बमों से हमला किया। इस 12 दिनों के युद्ध में ईरान ने भी प्रतिरोध किया और कतर में अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइल हमला किया। आखिरकार ट्रंप ने 24 जून को सीजफायर की घोषणा की, जिसे दोनों पक्षों ने स्वीकार किया।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और पेंटागन के अनुसार, इन हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को 1 से 2 साल पीछे धकेल दिया है, जबकि कुछ रिपोर्टों में सिर्फ कुछ महीनों का नुकसान बताया गया है। ईरान ने इसे नकारते हुए कहा है कि उसका ज्ञान और क्षमता नष्ट नहीं हुई है, और इसे फिर से बहाल किया जा सकता है।
परमाणु मुद्दे पर लंबा विवाद पश्चिमी देश, खासकर अमेरिका और इजरायल, लंबे समय से ईरान पर गुप्त रूप से परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाते हैं। 2015 के JCPOA (ईरान न्यूक्लियर डील) के बाद भी तनाव जारी रहा। ट्रंप ने 2018 में इस डील से बाहर निकलकर फिर से प्रतिबंध लगाए, जिसके कारण ईरान ने भी यूरेनियम संवर्धन बढ़ाया। पिछले वर्षों में पांच दौर की बातचीत हुई, लेकिन वे असफल रहीं। जून 2025 के हमलों के बाद बातचीत पूरी तरह बंद हो गई।
खामेनेई के हालिया बयान से साफ है कि ईरान किसी भी दबाव में बातचीत के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम में अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है, और जरूरत पड़ी तो ईरान अपने अधिकारों की रक्षा करेगा।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और भविष्य की संभावनाएं इस विवाद से मध्य पूर्व में तनाव और गहरा हो गया है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अनिश्चितता, इजरायल की सुरक्षा चिंताएं और अमेरिका की "मैक्सिमम प्रेशर" नीति के कारण कोई समझौते की तत्काल संभावना कम दिखती है।
इस बीच ईरान ने अपनी स्वतंत्रता और प्रतिरोध की भावना को मजबूत किया है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने "शांति के माध्यम से शक्ति" की नीति पर जोर दिया है। यह घटना दुनिया को याद दिलाती है कि परमाणु मुद्दा सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक, वैचारिक और रणनीतिक है। जब तक विश्वास की खाई नहीं भरी जाती, तब तक यह तनाव जारी रहेगा, और मध्य पूर्व की अस्थिरता और बढ़ सकती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 6, 2026