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Wednesday, 14 January 2026

दक्षिण में लड़कियां शिक्षित, उत्तर में उन्हें घरेलू गुलामी में रखा जाता है: DMK सांसद दयानिधि मारन का विवादित बयान, भड़की राजनीतिक आग

दक्षिण में लड़कियां शिक्षित, उत्तर में उन्हें घरेलू गुलामी में रखा जाता है: DMK सांसद दयानिधि मारन का विवादित बयान, भड़की राजनीतिक आग
Friday World January 14,2026 

भारतीय राजनीति में उत्तर-दक्षिण की बहस फिर से गरम हो गई है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री **दयानिधि मारन** ने चेन्नई के कायद-ए-मिल्लत गवर्नमेंट कॉलेज फॉर विमेन में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान से पूरे देश में हंगामा मचा दिया है। उन्होंने उत्तर भारत और दक्षिण भारत (खासकर तमिलनाडु) में लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण की तुलना करते हुए दावा किया कि दक्षिण में लड़कियों को पढ़ाई और करियर के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि उत्तर में उन्हें घर में रखकर घरेलू कामों और बच्चे पैदा करने तक सीमित कर दिया जाता है। 

यह बयान एक लैपटॉप वितरण कार्यक्रम के दौरान आया, जहां मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन भी मौजूद थे। मारन ने तमिलनाडु को "भारत का सर्वश्रेष्ठ राज्य" और स्टालिन को "सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री" करार दिया। उन्होंने कहा, "उत्तर भारत के राज्यों में लड़कियों से कहा जाता है कि नौकरी मत करो, घर में रहो, किचन का काम करो और बच्चे पैदा करो। लेकिन तमिलनाडु एक द्रविड़ राज्य है, जहां लड़कियों के उत्थान को महत्व दिया जाता है।"

 मारन ने आगे तर्क दिया कि कुछ राज्यों में शिक्षा को सिर्फ हिंदी तक सीमित रखने से बेरोजगारी बढ़ती है और लोग दक्षिण की ओर पलायन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदी को प्राथमिकता देने वाली नीतियां छात्रों को अंग्रेजी जैसी वैश्विक भाषा से दूर रखती हैं, जिससे उनके अवसर सीमित हो जाते हैं। वहीं, तमिलनाडु का "द्रविड़ मॉडल" लड़के-लड़कियों दोनों को समान शिक्षा प्रदान करता है, जिससे राज्य में साक्षरता दर ऊंची है और महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि वैश्विक कंपनियां इसी कारण तमिलनाडु में निवेश कर रही हैं। 

बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया और माफी की मांग इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तमिलनाडु बीजेपी प्रवक्ता **तिरुपति नारायणन** ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि दयानिधि मारन में कोई कॉमन सेंस है। उनके बयानों की कड़ी निंदा करता हूं। उन्हें भारत के लोगों से, खासकर हिंदी भाषी समुदाय से माफी मांगनी चाहिए, जिन्हें उन्होंने अनपढ़ और असभ्य बताया है।" 

बीजेपी नेताओं ने इसे क्षेत्रीय विभाजनकारी राजनीति का हिस्सा बताया और कहा कि ऐसे बयान उत्तर भारत के लाखों लोगों का अपमान करते हैं। एक अन्य बीजेपी नेता अनिला सिंह ने कहा कि मारन भूल गए हैं कि भारत शक्ति की पूजा करता है और महिलाओं को उत्तर-दक्षिण में बांटना हमारी संस्कृति के खिलाफ है। 


DMK का बचाव: शिक्षा नीति पर फोकस DMK नेताओं ने मारन के बयान का बचाव किया है। डीएमके नेता **टी.के.एस. एलंगोवन** ने कहा कि महिलाओं की प्रगति सत्ताधारी पार्टी पर निर्भर करती है। जहां कांग्रेस या द्रविड़ पार्टियां सत्ता में हैं, वहां महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण पर अच्छा काम हो रहा है। उन्होंने जोर दिया कि तमिलनाडु ने शुरू से ही महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और सरकारी नौकरियों में आरक्षण देकर उनके अधिकारों के लिए काम किया है। 

DMK सूत्रों का कहना है कि मारन का इरादा छात्राओं को सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने और शिक्षित-स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित करना था। तमिलनाडु में महिलाओं की औद्योगिक वर्कफोर्स में 40% से ज्यादा हिस्सेदारी है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। 


 वास्तविकता क्या कहती है? साक्षरता और महिला भागीदारी के आंकड़े भारत में साक्षरता दर में दक्षिणी राज्य आगे हैं। तमिलनाडु की साक्षरता दर लगभग 80-85% के आसपास है (2011 जनगणना के बाद सुधार के साथ), जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में यह 70-78% के बीच है। महिला साक्षरता में भी दक्षिण बेहतर प्रदर्शन करता है, जहां लड़कियों की ड्रॉपआउट दर कम है और स्कूलों में नामांकन ज्यादा। 

महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) में भी तमिलनाडु राष्ट्रीय औसत से ऊपर है, खासकर विनिर्माण और कृषि क्षेत्र में। हालांकि, उत्तर भारत में सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां, जल्दी शादी और घरेलू जिम्मेदारियां महिलाओं की शिक्षा और रोजगार को प्रभावित करती हैं।

 एकता की जरूरत दयानिधि मारन का यह बयान शिक्षा और भाषा नीति पर बहस को फिर से भड़का सकता है, लेकिन यह उत्तर-दक्षिण विभाजन को और गहरा करने का खतरा भी पैदा करता है। भारत जैसे विविध देश में क्षेत्रीय तुलनाएं उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन अपमानजनक शब्दों से एकता को नुकसान पहुंचता है। असली चुनौती हर राज्य में लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है,

 ताकि "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" का सपना साकार हो।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World January 14,2026