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Tuesday, 13 January 2026

ISRO का 2026 का पहला मिशन नाकाम: PSLV-C62 के तीसरे स्टेज में खराबी से बड़ा झटका, 'अन्वेषा' (EOS-N1) सहित 16 उपग्रह अंतरिक्ष में खो गए

ISRO का 2026 का पहला मिशन नाकाम: PSLV-C62 के तीसरे स्टेज में खराबी से बड़ा झटका, 'अन्वेषा' (EOS-N1) सहित 16 उपग्रह अंतरिक्ष में खो गए
-Friday World- 13 जनवरी, 2026
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए 2026 की शुरुआत निराशाजनक रही। 
12 जनवरी 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से PSLV-C62 रॉकेट का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण हुआ था, लेकिन तीसरे स्टेज (PS3) में आई गंभीर खराबी के कारण रॉकेट की दिशा भटक गई और पूरा मिशन असफल हो गया। इस मिशन में मुख्य उपग्रह EOS-N1 (अन्वेषा) सहित कुल 16 उपग्रहों को उनकी निर्धारित सूर्य-सिंक्रोनस कक्षा (लगभग 505 किमी) में स्थापित करना था, लेकिन सभी उपग्रह अंतरिक्ष में खो गए या वायुमंडल में दोबारा प्रवेश कर नष्ट हो गए। 

प्रक्षेपण की शुरुआत सफल, लेकिन तीसरे स्टेज में विपदा

 प्रक्षेपण सुबह 10:18 बजे IST पर हुआ। पहले और दूसरे स्टेज तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन तीसरे स्टेज के अंत में रोल रेट में असामान्य विक्षोभ और उड़ान पथ में विचलन देखा गया। ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा, "तीसरे स्टेज तक प्रदर्शन सामान्य था, लेकिन उसके अंत में रोल रेट में डिस्टर्बेंस और फ्लाइट पाथ में डेविएशन हुआ। हम डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं और जल्द अपडेट देंगे।" 

इस खराबी के कारण चौथा स्टेज शुरू होने के बाद भी उपग्रहों को अलग नहीं किया जा सका। यह PSLV की 64वीं उड़ान थी और 2025 में PSLV-C61 की असफलता के बाद वापसी का प्रयास माना जा रहा था। दुखद बात यह है कि दोनों मिशनों में तीसरे स्टेज में ही समस्या आई, जिससे PSLV की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। 

'अन्वेषा' (EOS-N1): भारत की 'हॉक-आई' निगरानी उपग्रह

मिशन का मुख्य पेलोड EOS-N1 या अन्वेषा था, जो डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह है। इसे "भारत की अंतरिक्ष में आंख" कहा जाता है, क्योंकि यह सैकड़ों तरंगदैर्ध्यों में पृथ्वी का अवलोकन कर सकता है, जो सामान्य कैमरों से संभव नहीं। 

इससे क्या फायदे होते: 

→ सैन्य छलावरण और छिपे हथियारों की पहचान। 

→ सीमा पर सैनिकों की गतिविधि, इलाके में बदलाव और चीन की ग्रे-जोन एक्टिविटी का ट्रैकिंग। 

→ कृषि, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन में सहायता।

 अन्वेषा को 505 किमी की सन-सिंक्रोनस कक्षा में स्थापित होना था, लेकिन असफलता से इसकी रणनीतिक क्षमता खो गई। 

अन्य महत्वपूर्ण उपग्रह जो नष्ट हुए अन्वेषा के अलावा 15 को-पैसेंजर उपग्रह थे, जिनमें कुछ अंतरराष्ट्रीय (नेपाल, यूके, फ्रांस, स्पेन, ब्राजील) थे। यह पहली बार है जब विदेशी क्लाइंट के पेलोड को नुकसान पहुंचा है।

 कुछ मुख्य उपग्रह:

 → AayulSAT (OrbitAID Aerospace द्वारा): ऑन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन, जिसे "स्पेस पेट्रोल पंप" कहा जाता है। भविष्य के सैटेलाइट सर्विसिंग के लिए क्रांतिकारी। 

→ अन्य: LACHIT-1 (उत्तर-पूर्व भारत का पहला उपग्रह), CGUSAT-1 (ओडिशा का पहला), और विभिन्न CubeSats जिसमें AI प्रोसेसिंग, IoT और रेडिएशन मॉनिटरिंग की तकनीक थी। 

यह नुकसान सिर्फ भारतीय स्पेस प्रोग्राम के लिए नहीं, बल्कि NSIL के कमर्शियल लॉन्च प्रोग्राम और प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम के लिए भी बड़ा झटका है। 

ISRO की प्रतिक्रिया और आगे के कदम ISRO ने तुरंत फेलियर एनालिसिस कमिटी गठित की है। यह लगातार दूसरी बार है जब PSLV के तीसरे स्टेज में समस्या आई (2025 में PSLV-C61 के बाद)। एजेंसी ने कहा है कि जांच पूरी होने पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

 इस असफलता के बावजूद ISRO का इतिहास बताता है कि वह चुनौतियों से जल्दी उबरता है। PSLV को "वर्कहॉर्स" कहा जाता है, और ऐसे सेटबैक के बाद भी यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का आधारस्तंभ बना रहेगा। 

भारतीय अंतरिक्ष यात्रा जारी रहेगी – यह सिर्फ एक रुकावट है, लेकिन सफलता की राह में एक महत्वपूर्ण सबक! 🚀🇮🇳 

सज्जाद अली नयानी ✍ 
Friday World- 13 जनवरी, 2026