-Friday World – 22 February 2026
भारत और चीन – दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश! दोनों की जनसंख्या लगभग 1.4 अरब के आसपास है। 1960 के दशक में दोनों देशों की आर्थिक स्थिति लगभग एक जैसी थी। विश्व बैंक के डेटा के अनुसार, 1960 में भारत की प्रति व्यक्ति आय $84 थी और चीन की $89। लेकिन 1980 तक तस्वीर बदल गई – भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग $267-$582 (विभिन्न स्रोतों के अनुसार) पहुंच गई, जबकि चीन की सिर्फ $195-$312 ही थी। यानी उस समय भारत चीन से लगभग दोगुना समृद्ध था! चीन को तब गरीब अफ्रीकी देशों जैसा माना जाता था।
लेकिन पिछले 45 सालों में चीन ने असाधारण प्रगति की और भारत को पीछे छोड़ दिया। आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि भारत पांचवें स्थान पर है। आइए जानते हैं इस अंतर के मुख्य कारण।
वर्तमान आर्थिक तस्वीर: आंकड़े बोलते हैं! IMF के अक्टूबर 2025 अनुमान के अनुसार (2025 के लिए):
- चीन की प्रति व्यक्ति आय: लगभग $13,806-$14,730 (करीब ₹11.5-12.5 लाख)
- भारत की प्रति व्यक्ति आय: लगभग $2,818-$3,050 (करीब ₹2.3-2.6 लाख)
चीन की प्रति व्यक्ति आय भारत से 4-5 गुना ज्यादा है! कुल GDP में चीन $19-20 ट्रिलियन है, जबकि भारत $4-4.5 ट्रिलियन। PPP (परचेजिंग पावर पैरिटी) में चीन $40 ट्रिलियन से ज्यादा के साथ आगे है, भारत $17-18 ट्रिलियन।
PPP क्या है?
यह एक आर्थिक विधि है जो देशों की अर्थव्यवस्था की तुलना करते समय सिर्फ मुद्रा विनिमय दर नहीं, बल्कि पैसे से कितनी चीजें खरीदी जा सकती हैं, उस पर ध्यान देती है। उदाहरण: भारत में ₹100 में भरपेट भोजन मिल जाता है, अमेरिका में इसके लिए $15-20 लगते हैं। PPP में भारत और चीन दोनों की खरीद शक्ति ज्यादा दिखती है, लेकिन चीन अभी भी आगे है।
चीन की सफलता के रहस्य: 1978 के क्रांतिकारी सुधार
1978 में डेंग शियाओपिंग के नेतृत्व में चीन ने 'रिफॉर्म एंड ओपनिंग अप' नीति अपनाई:
- कृषि में 'हाउसहोल्ड रिस्पॉन्सिबिलिटी सिस्टम' – जमीन सरकारी रहे, लेकिन उत्पादन और लाभ परिवार को। ग्रामीण आय 5 साल में दोगुनी हो गई!
- स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (SEZs) जैसे शेनजेन – विदेशी निवेश के लिए टैक्स और नियमों में छूट।
- बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात पर फोकस – GDP ग्रोथ रेट लंबे समय तक 8-10%।
- शहरीकरण: 1980 में 19% से आज 60%+।
- एक बच्चा नीति और शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश से 1978-2015 में 80 करोड़ लोग गरीबी से बाहर।
भारत के सुधार: देर से और अधूरे भारत ने 1991 में LPG (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) सुधार शुरू किए – चीन से 13 साल बाद!
- औद्योगिक लाइसेंस घटाए, विदेशी निवेश मंजूर, आयात ड्यूटी कम की।
- GDP ग्रोथ 7-8% तक पहुंची, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता, नौकरशाही और धीमे अमल से गति कम रही।
- भारत ने IT और सेवा क्षेत्र पर ज्यादा फोकस किया, चीन ने मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर।
- असमान विकास: आय और अवसरों की असमानता से गरीबी घटी लेकिन खत्म नहीं हुई।
पड़ोसियों से तुलना: हैरान करने वाली हकीकत!
- बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय 2025 में लगभग $2,734-$2,960 (भारत $2,818-$3,050 से थोड़ी कम या बराबर)। बांग्लादेश ने टेक्सटाइल निर्यात और महिला भागीदारी से प्रगति की।
- पाकिस्तान पीछे ($1,500 के आसपास), राजनीतिक अस्थिरता के कारण।
- चीन का GDP भारत के सभी पड़ोसियों (पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि) के कुल GDP से 4 गुना!
भारत चीन से क्या सीख सकता है?
- तेज निर्णय और अमल: चीन की केंद्रीय व्यवस्था ने सुधार तेज किए।
- मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात में बड़ा निवेश।
- जनसंख्या नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस।
- महिला भागीदारी और निर्यात-आधारित विकास (बांग्लादेश से भी सीखें!)।
आज भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन चीन जैसी गति पाने के लिए अभी बहुत काम बाकी है। कड़े सुधार, समान विकास और निवेश से भारत भी महाशक्ति बन सकता है!
Sajjadali Nayani ✍
Friday World – 22 February 2026