-Friday World 19th Feb,2026
8 नवंबर 2016 की रात, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित किया, तो पूरे देश में एक भूचाल सा आ गया। रातोंरात 86% नकदी अमान्य हो गई, जिससे अर्थव्यवस्था, समाज और आम आदमी की जिंदगी पर गहरा प्रभाव पड़ा। लंबी कतारें, एटीएम के बाहर इंतजार, छोटे व्यापारियों का संकट, मजदूरों की मजबूरी—ये सब दृश्य आज भी याद हैं। लेकिन इस फैसले के पीछे की कहानी सिर्फ काले धन, नकली नोटों और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग नहीं थी। समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं: क्या यह पूरी तरह घरेलू निर्णय था, या इसमें कोई विदेशी हाथ या दबाव शामिल था?
यह लेख उन तथ्यों, रिपोर्टों और विश्लेषणों का संकलन है जो इस सवाल का जवाब तलाशते हैं। हम देखेंगे कि आधिकारिक दावों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकलता है।
फैसले की गोपनीयता: एक सख्त गुप्त ऑपरेशन रॉयटर्स की दिसंबर 2016 की एक प्रमुख रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि नोटबंदी का प्लान बेहद सीमित लोगों तक ही सीमित था। प्रधानमंत्री मोदी ने एक विश्वसनीय नौकरशाह हस्मुख अधिया को इसकी कमान सौंपी थी। कुल छह लोग ही इस योजना से वाकिफ थे—जिनमें से केवल एक की पहचान सार्वजनिक हुई, जो वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी थे। रिपोर्ट के अनुसार, "हम नहीं चाहते थे कि बिल्ली थैले से बाहर आए," एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा। अगर जानकारी लीक होती, तो काला धन रखने वाले लोग इसे बचाने के तरीके ढूंढ लेते। इसलिए फैसला अचानक और गोपनीय रखा गया।
यह गोपनीयता घरेलू स्तर पर सख्त नियंत्रण की ओर इशारा करती है। कोई भी विदेशी संस्था या एजेंसी इसमें शामिल होती, तो इतनी सख्त गोपनीयता बनाए रखना मुश्किल होता।
उद्देश्य और घोषित लक्ष्य
सरकार ने तीन मुख्य लक्ष्य बताए:
- काला धन बाहर लाना
- नकली नोटों पर रोक लगाना (खासकर पाकिस्तान से आने वाले)
- आतंकवाद की फंडिंग रोकना
प्रधानमंत्री के भाषण में अंतरराष्ट्रीय संदर्भ भी आए—आईएमएफ और विश्व बैंक की रिपोर्टों का हवाला दिया गया कि काले धन और भ्रष्टाचार वैश्विक समस्या हैं। लेकिन यह हवाला सामान्य था, न कि किसी निर्देश का प्रमाण।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: समर्थन और आलोचना दोनों फैसले की घोषणा के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं।
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भ्रष्टाचार और अवैध वित्त के खिलाफ प्रयासों का समर्थन किया, लेकिन अल्पकालिक व्यवधानों पर चेतावनी दी।
- विश्व बैंक ने इसे औपचारिक अर्थव्यवस्था बढ़ाने और वित्तीय समावेशन का अवसर माना।
- कुछ देशों के केंद्रीय बैंकर्स और विशेषज्ञों ने इसे साहसिक कदम कहा।
लेकिन आलोचना भी कम नहीं थी। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अल्पकालिक लागत लाभ से ज्यादा होगी। कई अर्थशास्त्रियों ने इसे खराब नीति कहा। फिर भी, किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था ने यह नहीं कहा कि यह उनका निर्देश था या दबाव में लिया गया।
विदेशी संस्थाओं की भूमिका: कोई ठोस प्रमाण नहीं समय-समय पर अफवाहें और साजिश सिद्धांत सामने आए कि आईएमएफ, विश्व बैंक या किसी अन्य संस्था ने कैशलेस अर्थव्यवस्था के लिए दबाव डाला। लेकिन अब तक कोई आधिकारिक दस्तावेज, लीक रिपोर्ट या स्वीकारोक्ति नहीं आई जो यह साबित करे।
- नोटबंदी के बाद आरबीआई की रिपोर्ट में 99.3% पुराने नोट वापस आए—जिससे काला धन बाहर लाने का लक्ष्य अधूरा साबित हुआ।
- अर्थव्यवस्था में अस्थायी मंदी आई, रोजगार प्रभावित हुआ, लेकिन लंबे समय में डिजिटल पेमेंट्स बढ़े।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में फैसले की वैधता को बरकरार रखा, कहा कि यह आरबीआई से परामर्श के बाद और उचित प्रक्रिया से लिया गया।
अगर कोई विदेशी निर्देश होता, तो इतनी गोपनीयता और इतने कम लोगों की भागीदारी संभव नहीं होती। फैसला राजनीतिक इच्छाशक्ति और घरेलू रणनीति का परिणाम ज्यादा लगता है।
घरेलू निर्णय की मजबूत संभावना** उपलब्ध तथ्यों, रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों से स्पष्ट है कि नोटबंदी 2016 एक पूरी तरह घरेलू स्तर पर तैयार और क्रियान्वित फैसला था। गोपनीयता का स्तर, सीमित लोगों की भागीदारी और कोई ठोस विदेशी लिंक न मिलना इसकी पुष्टि करता है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चर्चा समर्थन या सलाह के स्तर पर थी, न कि निर्देश के रूप में।
यह फैसला साहसिक था, विवादास्पद था, और इसके परिणाम मिश्रित रहे। आम आदमी की तकलीफें वास्तविक थीं, लेकिन डिजिटल इंडिया की दिशा में यह एक बड़ा कदम भी साबित हुआ। सवाल उठते रहेंगे, लेकिन प्रमाणों की कमी से विदेशी साजिश का दावा कमजोर पड़ता है।
नोटबंदी ने भारत को एक सबक दिया—बड़े फैसले लेने में साहस जरूरी है, लेकिन तैयारी और क्रियान्वयन में कमी महंगी पड़ सकती है। क्या यह भारत की आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक था या एक महंगा प्रयोग? समय और इतिहास ही अंतिम फैसला करेंगे।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 19th Feb,2026