सऊदी सियासत में ऐतिहासिक बदलाव: पहली बार शिया असना अशरी को मंत्री बनाया गया
सऊदी अरब की राजनीति और अर्थव्यवस्था में 12 फरवरी 2026 को एक ऐसा सुनहरा पन्ना जुड़ा, जिसे इतिहास हमेशा याद रखेगा। खादिम हरमैन शरीफीन शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज ने एक शाही फरमान जारी कर फहद बिन अब्दुलजलील बिन अली अल-सैफ को **वजीर-ए-इस्तिसमार** (मंत्री निवेश) नियुक्त किया। यह नियुक्ति इसलिए खास है क्योंकि सऊदी इतिहास में पहली बार एक **शिया असना अशरी** समुदाय से ताल्लुक रखने वाले शख्स को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है।
फहद अल-सैफ पूर्व में **पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF)** में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं, जहां वे ग्लोबल कैपिटल फाइनेंस डिवीजन और इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी के प्रमुख रहे। 26 साल से ज्यादा की अनुभव वाली यह शख्सियत फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी, डेट मैनेजमेंट और इंटरनेशनल फाइनेंसिंग में माहिर हैं। उन्होंने सऊदी ब्रिटिश बैंक, HSBC और नेशनल डेट मैनेजमेंट सेंटर में भी अहम भूमिकाएं निभाईं। उनकी यह नियुक्ति **विजन 2030** के तहत विदेशी निवेश आकर्षित करने, अर्थव्यवस्था को तेल से आगे बढ़ाने और नए सेक्टर्स जैसे AI, टूरिज्म व मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
पहले वजीर-ए-इस्तिसमार खालिद अल-फालीह थे, जिन्हें अब स्टेट मिनिस्टर और कैबिनेट मेंबर बनाया गया है। अल-सैफ की नियुक्ति ऐसे वक्त हुई है जब सऊदी अरब विदेशी निवेश को 100 अरब डॉलर सालाना तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। PIF के 925 अरब डॉलर के फंड को और प्रभावी बनाने में उनकी रणनीतिक समझ काम आएगी।
यह फैसला सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक समावेश का भी प्रतीक है। पूर्वी प्रांत (शरकिया) से ताल्लुक रखने वाले अल-सैफ की नियुक्ति से शिया समुदाय में खुशी की लहर है। कई विश्लेषक इसे क्षेत्रीय एकता और इंक्लूसिविटी की तरफ बढ़ता कदम मान रहे हैं, खासकर ईरान के साथ संबंध सुधारने के दौर में।
फहद अल-सैफ ने नियुक्ति पर शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वे राष्ट्रीय जिम्मेदारी को समझते हैं और विजन 2030 के मकसद को हकीकत में बदलने के लिए पूरी कोशिश करेंगे। उनकी यह नियुक्ति सऊदी अरब को ज्यादा खुले, विविध और मजबूत अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने का संकेत है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 19th Feb, 2026