-Friday world 14th Feb 2026
रूसी आयात में आई भारी गिरावट
भारत की ऊर्जा दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। फरवरी 2026 के शुरुआती 10 दिनों के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि सऊदी अरब ने रूस को पीछे छोड़कर भारत का नंबर-1 क्रूड ऑयल सप्लायर बन गया है। ग्लोबल टैंकर ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के डेटा के मुताबिक, फरवरी की शुरुआत में सऊदी अरब ने भारत को औसतन 11.3 लाख बैरल प्रतिदिन (1.13 मिलियन bpd) क्रूड ऑयल सप्लाई किया, जबकि रूस की सप्लाई घटकर 10.9 लाख बैरल प्रतिदिन (1.09 मिलियन bpd) रह गई। यह करीब एक साल बाद है जब सऊदी से आयात फिर से 10 लाख बैरल के स्तर को पार कर गया है।
यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भू-राजनीति, ट्रेड डील और स्मार्ट आर्थिक रणनीति का कमाल है। रूस और अमेरिका जैसे दिग्गज पीछे छूट गए, जबकि सऊदी ने शानदार वापसी की। आइए जानते हैं इस उलटफेर की पूरी कहानी।
अमेरिका-भारत ट्रेड डील: रूस पर निर्भरता घटाने का बड़ा ट्रिगर इस बदलाव का मुख्य कारण फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच हुई इंटरिम ट्रेड डील है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगे 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया। बदले में भारत ने रूसी क्रूड ऑयल की खरीद को कम करने या रोकने की प्रतिबद्धता जताई। ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से रूसी ऑयल खरीद पर लगे अतिरिक्त 25% टैरिफ को हटा दिया, लेकिन यह शर्त रखी कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा।
इस डील के बाद भारतीय रिफाइनर्स रूस पर निर्भरता घटा रहे हैं। जनवरी 2026 में रूसी आयात घटकर 1.215 मिलियन bpd रह गया था, जो नवंबर 2025 के 1.84 मिलियन bpd से काफी कम है। फरवरी में यह ट्रेंड और तेज हो गया। ट्रेड डील ने भारत को अमेरिकी बाजार में बेहतर एक्सेस दिया, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा के लिए सप्लाई सोर्स में विविधता लाना जरूरी हो गया।
सऊदी अरामको की मास्टरस्ट्रोक: कीमत कटौती और तेज लॉजिस्टिक्स
सऊदी अरब ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया। सऊदी अरामको ने एशियाई खरीदारों के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमतों में कटौती की – इसे ओमान/दुबई बेंचमार्क के बराबर या डिस्काउंट पर रखा, जो कई सालों का सबसे निचला स्तर है। साथ ही ट्रांसपोर्टेशन में बड़ी राहत:
- पश्चिम एशिया से भारत तक तेल पहुंचने में सिर्फ 3 दिन लगते हैं।
- अमेरिका से 45-55 दिन, रूस से 15 दिन।
- फ्रेट कॉस्ट: सऊदी से 40-70 सेंट प्रति बैरल, अमेरिका से 2.5-4 डॉलर।
यह भौगोलिक लाभ और कीमतों में कटौती ने सऊदी को भारतीय रिफाइनर्स की पहली पसंद बना दिया। सऊदी के पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत सप्लाई बढ़ा सकती है।
भारत की ऊर्जा निर्भरता: 90% आयात पर टिकी अर्थव्यवस्था भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल आयातक है और अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल बाहर से मंगवाता है। 2022 के बाद रूस सस्ते डिस्काउंटेड तेल के कारण टॉप सप्लायर बना रहा (कभी-कभी 35-40% शेयर तक), लेकिन अमेरिकी सैंक्शंस, ट्रेड डील और भू-राजनीतिक दबाव ने सब बदल दिया।
- जनवरी 2026 में रूस से आयात 1.16-1.215 मिलियन bpd रहा।
- इराक (1.03 मिलियन bpd), सऊदी (0.79 मिलियन bpd) और यूएई जैसे देशों से खरीद बढ़ी।
- अमेरिका से भी आयात में उछाल आया, लेकिन सऊदी ने फरवरी में बाजी मार ली।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब ऊर्जा सुरक्षा के लिए डाइवर्सिफिकेशन पर जोर दे रहा है। अगर रूसी तेल पूरी तरह बंद हुआ तो आयात बिल में 3-4 अरब डॉलर का इजाफा हो सकता है, क्योंकि रूसी क्रूड अभी भी 7-12% सस्ता है। लेकिन रणनीतिक स्वतंत्रता और अमेरिका के साथ रिश्ते इसे जरूरी बनाते हैं।
आगे क्या होगा? तेल का नक्शा और बदलेगा यह बदलाव अस्थायी नहीं लगता। अगर अमेरिका-भारत ट्रेड डील पूरी तरह लागू हुई और भारत रूस से तेल कम करता रहा, तो सऊदी, इराक, यूएई और अफ्रीकी देशों की हिस्सेदारी बढ़ेगी। रूस पूरी तरह बाहर नहीं होगा – डिस्काउंट का आकर्षण बना रहेगा। लेकिन फरवरी 2026 का यह उलटफेर साफ संकेत है कि भारत अब एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा।
सऊदी अरब ने न सिर्फ बाजी मारी, बल्कि भारत की ऊर्जा रणनीति में नया अध्याय लिख दिया। कीमत, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक साझेदारी से बाजार में टॉप पर पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन सऊदी ने इसे कर दिखाया। आने वाले महीनों में आंकड़े और बदल सकते हैं, लेकिन यह बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday world 14th Feb 2026