-Friday 🌎 World 20 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। मात्र 7 साल की एक निर्दोष बच्ची का उसके ही चाचा द्वारा बलात्कार कर हत्या कर दी गई, और उसके बाद शव को तालाब में फेंक दिया गया। यह क्रूरता 11 फरवरी 2026 को देवरिया के श्रीरामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई, जहां आरोपी ने बच्ची को खेत में ले जाकर पहले यौन उत्पीड़न किया और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
घटना का क्रूर सच पुलिस के अनुसार, आरोपी 35 वर्षीय विद्यासागर यादव (Vidyasagar Yadav) बच्ची का सगा चाचा था। परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2), 103(1) के साथ-साथ POCSO एक्ट की धारा 5(m) और 6 के तहत केस दर्ज हुआ। बच्ची के शव को तालाब से बरामद किया गया, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने बलात्कार व हत्या की पुष्टि की। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में कोई सांप्रदायिक कोण नहीं है। देवरिया पुलिस ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर भी इसकी पुष्टि की, जिसमें कहा गया कि आरोपी विद्यासागर यादव है, न कि कोई 'मोहम्मद अकरम'।
सोशल मीडिया पर फैला झूठा नैरेटिव घटना के वीडियो (जिसमें नदी/तालाब से बच्ची का शव निकाला जा रहा है) को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया गया, लेकिन साथ में एक खतरनाक झूठ भी फैलाया गया। कई पोस्ट्स में दावा किया गया कि आरोपी 'मोहम्मद अकरम' नाम का व्यक्ति है, जिसने अपनी भतीजी के साथ रेप कर हत्या की और शव नदी में फेंक दिया। यह दावा पूरी तरह फर्जी साबित हुआ है।
फैक्ट-चेक संगठनों जैसे Alt News, BOOM Live, Factly, India Today Fact Check, The Quint WebQoof और Newschecker ने इसकी जांच की और पाया कि:
- आरोपी का नाम विद्यासागर यादव है, जो हिंदू है।
- कोई 'मोहम्मद अकरम' नाम का व्यक्ति इस केस में शामिल नहीं है।
- देवरिया एसपी संजीव सुमन और एडिशनल एसपी सुनील कुमार सिंह ने भी पुष्टि की कि मामला पारिवारिक है, सांप्रदायिक नहीं।
- वीडियो वही है, लेकिन आरोपी की पहचान गलत बताई जा रही है ताकि कम्युनल टेंशन भड़काई जा सके।
यह एक क्लासिक उदाहरण है कि कैसे संवेदनशील अपराधों को कम्युनल कलर देकर समाज में नफरत फैलाई जाती है। पुलिस ने ऐसे फेक क्लेम्स वाले पोस्ट्स पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
समाज और कानून के लिए चुनौती यह घटना एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, खासकर घरेलू हिंसा और POCSO मामलों में तेज जांच की जरूरत पर सवाल उठाती है। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां मासूम बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। चाहे बुलंदशहर में 6 साल की बच्ची को छत से फेंककर हत्या हो या कानपुर में गैंगरेप के मामले – अपराधियों को सख्त सजा और त्वरित न्याय की मांग तेज हो रही है।
परिवार और समाज को भी सतर्क रहना होगा। बच्चियों को अकेले किसी के साथ न भेजें, और किसी भी संदिग्ध व्यवहार पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। आरोपी को उम्रकैद या फांसी जैसी सजा मिलनी चाहिए ताकि ऐसे दरिंदों में खौफ पैदा हो।
अंत में एक अपील यह दर्दनाक घटना हमें याद दिलाती है कि अपराध की पहचान नाम या धर्म से नहीं, बल्कि क्रूरता से होती है। सोशल मीडिया पर कोई भी जानकारी शेयर करने से पहले फैक्ट-चेक जरूर करें। फेक नैरेटिव फैलाने वाले खुद अपराध के सहयोगी बन जाते हैं। बच्ची की आत्मा को शांति मिले, और परिवार को न्याय मिले – यही कामना है।
देवरिया पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन ऐसे मामलों में समाज को भी जागरूक होना होगा।
Sajjadali Nayani ✍
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