-Friday 🌎 World 20 Feb 2026
अमेरिका और ब्रिटेन के बीच "विशेष संबंध" में अब गहरी दरार दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहे हैं, लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार ने उन्हें बड़ा झटका दिया है। ब्रिटेन ने स्पष्ट इनकार कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर किसी भी हमले के लिए ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर सकता है – खासकर इंग्लैंड के RAF फेयरफोर्ड (ग्लॉस्टरशायर) और हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया बेस का।
यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की आशंका के आधार पर लिया गया है। ब्रिटिश सरकार का मानना है कि पूर्व-नियोजित हमला (pre-emptive strike) वैश्विक कानूनों का उल्लंघन होगा, इसलिए वे इसमें शामिल नहीं होना चाहते। मीडिया रिपोर्ट्स (द टाइम्स, फॉक्स न्यूज, बीबीसी, अल जजीरा, एनडीटीवी आदि) के अनुसार, ब्रिटेन ने अमेरिका को पहले ही इसकी जानकारी दे दी है।
ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ा: ट्रुथ सोशल पर तीखा हमला ट्रंप ने इस इनकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर को "बड़ी गलती" करने वाला बताया। ट्रंप ने लिखा: "अगर ईरान डील नहीं करता, तो अमेरिका को डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड एयरफील्ड का इस्तेमाल करना पड़ सकता है ताकि इस अस्थिर और खतरनाक रेजीम के हमले को खत्म किया जा सके।" उन्होंने चेतावनी दी कि ब्रिटेन का यह रुख NATO सहयोगी के रूप में कमजोर है और इससे रूस-चीन जैसे देशों को फायदा हो सकता है।
ट्रंप ने चागोस द्वीप समूह डील पर भी जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, "डिएगो गार्सिया को किसी को मत सौंपो! DO NOT GIVE AWAY DIEGO GARCIA!" ट्रंप ने स्टार्मर को चेतावनी दी कि 99 साल की लीज पर बेस को वापस लेने की योजना "कमजोर" है और इससे अमेरिकी सुरक्षा को खतरा है।
चागोस द्वीप विवाद: डिएगो गार्सिया की रणनीतिक अहमियत यह पूरा विवाद **चागोस द्वीप समूह** (ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी) से जुड़ा है। ब्रिटेन ने मॉरीशस को चागोस द्वीप सौंपने और डिएगो गार्सिया बेस को 99 साल के लिए लीज पर रखने का समझौता किया है। इस डील में कुल 35 बिलियन पाउंड तक का भुगतान शामिल है। डिएगो गार्सिया अमेरिका-ब्रिटेन का संयुक्त बेस है, जहां B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स और अन्य भारी विमान तैनात रहते हैं। यह हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है – ईरान पर हमले के लिए लॉन्ग-रेंज बॉम्बर्स का मुख्य लॉन्च पॉइंट हो सकता है।
अमेरिका को डिएगो गार्सिया पर हमले के लिए ब्रिटेन से सिर्फ सूचना देने की जरूरत है, लेकिन RAF फेयरफोर्ड जैसे यूके में स्थित बेस के लिए लिखित अनुमति अनिवार्य है। ब्रिटेन ने ईरान हमले के लिए यह अनुमति देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने इसी इनकार के बाद चागोस डील का समर्थन वापस ले लिया और स्टार्मर की आलोचना की।
ईरान हर दबाव का जवाब देने को तैयार और अमेरिकी प्लान ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए सख्त रुख अपना रहा है। अगर ईरान न्यूक्लियर डील पर सहमत नहीं होता, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहा है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसेना और एयर फोर्स की भारी तैनाती हो चुकी है। डिएगो गार्सिया और RAF फेयरफोर्ड से सतत हमलों के लिए लॉन्ग-रेंज बॉम्बर्स का इस्तेमाल महत्वपूर्ण होता। ब्रिटेन के इनकार से अमेरिकी प्लान प्रभावित हो सकता है।
ब्रिटिश सरकार का कहना है कि वे सिर्फ अपनी और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए बेस इस्तेमाल करेंगे, न कि किसी अवैध हमले के लिए। यह फैसला ब्रिटेन की स्वतंत्र विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान दिखाता है।
अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों में नया संकट ट्रंप और स्टार्मर के बीच यह पहला बड़ा विवाद नहीं है, लेकिन यह NATO और "स्पेशल रिलेशनशिप" पर सवाल उठा रहा है। ट्रंप ने पहले भी ब्रिटेन पर "कमजोर" होने का आरोप लगाया है। अगर चागोस डील रुकती है या संशोधित होती है, तो दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
ईरान ने भी चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का "निर्णायक" जवाब दिया जाएगा। दुनिया की नजर अब ट्रंप के अगले कदम पर टिकी है – क्या अमेरिका अकेले हमला करेगा या ब्रिटेन को मनाएगा? क्या चागोस डील टूट जाएगी?
यह घटना वैश्विक भू-राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है, जहां सहयोगी देश भी अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday 🌎 World 20 Feb 2026