-Friday World 18th Feb 2026
जब भारत AI इम्पैक्ट समिट 2026 दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुआ, तो यह देश की AI महत्वाकांक्षा का बड़ा मंच था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया, हजारों स्टार्टअप, इन्वेस्टर्स और एक्सपर्ट्स जुटे। लेकिन पहले दिन ही एक चौंकाने वाली घटना ने सबकी नजरें खींच ली – बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप NeoSapien के को-फाउंडर और CEO धनंजय यादव के स्टॉल से उनके पेटेंटेड AI वियरेबल डिवाइस गायब हो गए। यह घटना सिर्फ एक चोरी नहीं थी, बल्कि हाई-सिक्योरिटी जोन में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर गई। क्या PM की विजिट के दौरान 'सुरक्षित' इलाके में चोरी संभव है? आइए पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं।
घटना का क्रम: कैसे हुआ सब कुछ?
धनंजय यादव ने अपना छोटा-सा स्टॉल लगाया था, जहां NeoSapien के AI-पावर्ड वियरेबल डिवाइस प्रदर्शित थे – ये डिवाइस बातचीत ट्रैक करते हैं, इमोशंस एनालाइज करते हैं और भारत का पहला पेटेंटेड AI वियरेबल माने जाते हैं। कंपनी ने इसमें काफी निवेश किया था – फ्लाइट्स, लॉजिस्टिक्स, बूथ सेटअप सब कुछ।
दोपहर करीब 12 बजे, PM मोदी की विजिट से पहले सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सभी एक्जिबिटर्स को हॉल से बाहर निकाल दिया गया। स्टॉल्स को 'सैनिटाइज' और सिक्योर करने के लिए खाली करवाया गया। धनंजय ने पूछा कि सामान क्या करें? सिक्योरिटी अधिकारियों ने कहा – "सामान यहीं छोड़ दो, कोई नहीं ले जाएगा। इलाका हाई-सिक्योरिटी है, सिर्फ सिक्योरिटी पर्सनल रहेंगे।"
गेट्स बंद हो गए और 6 घंटे से ज्यादा समय तक (शाम 6:30 बजे तक) कोई अंदर नहीं जा सका। जब धनंजय वापस लौटे, तो उनके स्टॉल पर खाली बॉक्स मिले – सारे AI वियरेबल डिवाइस गायब! उन्होंने X पर पोस्ट किया: "Day 1 of the AI Impact Summit turned out to be a pain for us... Shocking how this happened in a high-security zone." उन्होंने फ्लाइट्स, होटल, लॉजिस्टिक्स का खर्चा जोड़ा और निराशा जताई।
**राजनीतिक और सोशल मीडिया पर तूफान** घटना वायरल हो गई। कई यूजर्स ने इसे "चोकीदार चोर है" जैसी टिप्पणियों से जोड़ा, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। कुछ ने कहा – "PM की सुरक्षा में चोरी? कितनी बड़ी नाकामी!" विपक्षी हैंडल्स ने इसे सरकार की 'मिसमैनेजमेंट' का उदाहरण बताया। लेकिन धनंजय ने कभी राजनीतिक रंग नहीं दिया – उन्होंने सिर्फ इवेंट ऑर्गनाइजर्स और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल की आलोचना की।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई:
धनंजय ने तुरंत शिकायत की। दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की (थेफ्ट सेक्शन के तहत), CCTV फुटेज चेक किया। महज 24 घंटे के अंदर (17 फरवरी तक) डिवाइस रिकवर हो गए। पुलिस ने दो संदिग्धों – अशिष महारिया और मनीष नागर – को गिरफ्तार किया। दोनों कॉन्ट्रैक्टुअल एम्प्लॉयी थे, जो इवेंट में इलेक्ट्रिकल वर्क और वीडियोग्राफी के लिए हायर किए गए थे।
धनंजय ने अपडेट दिया: "Just wanted to update everyone, our devices have been recovered. Huge thanks to Delhi Police for the super fast response and support. Truly grateful." उन्होंने DCP से मिलने का भी जिक्र किया और दिल्ली की तारीफ की।
क्या था असली सबक? यह घटना बताती है कि बड़े इवेंट्स में, खासकर हाई-प्रोफाइल विजिट्स के दौरान, प्रोटोकॉल कितने सख्त होते हैं – लेकिन कम्युनिकेशन और कोऑर्डिनेशन में कमी घातक साबित हो सकती है। एक्जिबिटर्स को क्लियर इंस्ट्रक्शंस नहीं मिले, सामान अकेला छूट गया। सिक्योरिटी जोन में भी 'इंसाइडर' (कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स) का रिस्क रहता है।
NeoSapien जैसे स्टार्टअप्स के लिए यह बड़ा झटका था, लेकिन रिकवरी से उम्मीद बंधी। धनंजय ने कहा कि यह "lesson in real-world security" है – इनोवेटर्स को ऐसे इवेंट्स में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे वैल्यूएबल सामान साथ रखना या इंश्योरेंस।
समिट का बाकी माहौल समिट में कई अच्छी चीजें भी हुईं – AI इनोवेशन, रोबोडॉग डेमो, इन्वेस्टमेंट टॉक्स। लेकिन पहले दिन की यह घटना, लंबी कतारें, खराब प्लानिंग और 'रोबोडॉग रो' जैसी छोटी-मोटी विवादों के साथ याद रहेगी। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मिसमैनेजमेंट पर माफी मांगी। :
इनोवेशन की रक्षा जरूरी** धनंजय यादव की कहानी एक स्टार्टअप फाउंडर की मेहनत, निराशा और फिर राहत की है। यह याद दिलाती है कि AI जैसे सेक्टर में इनोवेशन को सिर्फ टेक्नोलॉजी से नहीं, बल्कि मजबूत सिस्टम और ट्रस्ट से भी बचाना पड़ता है। दिल्ली पुलिस की फास्ट एक्शन सराहनीय है, लेकिन अगली बार ऐसे इवेंट्स में बेहतर प्लानिंग जरूरी।
क्योंकि अगर AI इंडिया का भविष्य है, तो उसके क्रिएटर्स की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 18th Feb 2026