नई दिल्ली: मध्य पूर्व का हालात अब युद्ध की कगार पर खड़ा नजर आ रहा है। ईरान और रूस ने संयुक्त नौसेना अभ्यास की घोषणा कर दी है, जो ठीक उसी समय हो रहा है जब अमेरिकी युद्धपोत और फाइटर जेट्स पहले से ही क्षेत्र में तैनात हैं। यह अभ्यास ओमान की खाड़ी और उत्तरी हिंद महासागर में गुरुवार को शुरू होगा। ईरानी मीडिया फार्स न्यूज एजेंसी और आईआरएनए के अनुसार, ईरानी नौसेना कमांडर रियर एडमिरल हसन मगसूदलू ने कहा कि इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच समन्वय बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री आतंकवाद का मुकाबला करना है।
ईरान और रूस का यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंताओं को और बढ़ा रहा है। ट्रंप प्रशासन पहले से ही ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बना रहा है और क्षेत्र में भारी सैन्य तैनाती कर रहा है।
पिछले 24 घंटों में अमेरिका ने 50 से ज्यादा फाइटर जेट्स (F-35, F-22, F-16 सहित) मध्य पूर्व भेजे हैं। यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले से ही ओमान के तट के पास तैनात है, जबकि यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड – दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत – कैरिबियन से मध्य पूर्व की ओर रवाना हो चुका है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने खुलासा किया है कि वे ईरान के खिलाफ हफ्तों तक चलने वाली संभावित कार्रवाई के लिए तैयारियां कर रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर परमाणु समझौता नहीं हुआ तो ईरान के लिए "बुरा दिन" आएगा। ईरान-रूस अभ्यास की पृष्ठभूमि क्या है?
यह संयुक्त ड्रिल ऐसे वक्त में हो रही है जब ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कुछ दिन पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किया था। वहां फास्ट अटैक क्राफ्ट, मिसाइल और ड्रोन टेस्ट किए गए। अब रूस की ओर से कोरवेट स्टोइकी जैसे जहाज बंदर अब्बास पहुंच चुके हैं।
ईरानी कमांडर हसन मगसूदलू ने कहा, "यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने, संयुक्त ऑपरेशंस में समन्वय बढ़ाने और समुद्री आतंकवाद से निपटने के लिए है।" लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह अमेरिकी दबाव के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।
रूस का शामिल होना स्थिति को और जटिल बना रहा है। रूस पहले से ही ईरान के साथ आर्थिक और सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है, और अब नौसेना स्तर पर यह साझेदारी और गहरी हो गई है।
ट्रंप की सैन्य तैनाती: एक बड़ा शो ऑफ फोर्स
अमेरिका की तरफ से मध्य पूर्व में सैन्य बिल्डअप पिछले महीने से तेज हो गया है।
यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ 9 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और अन्य जहाज तैनात हैं।
F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट्स यूके और स्पेन से मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं।
जॉर्डन के मुवाफ्फक साल्ती एयर बेस पर F-15 अटैक प्लेन पहले से मौजूद हैं।
एक्सियोस और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमले की तैयारी कर रहा है, जो हफ्तों तक चल सकता है – यह 2025 के छोटे हमलों से कहीं बड़ा होगा।
मध्य पूर्व में अब क्या होगा?
ईरान-रूस अभ्यास और अमेरिकी तैनाती दोनों ही एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य – जहां दुनिया का 20% तेल गुजरता है – पहले से ही तनाव का केंद्र है। अगर कोई गलतफहमी हुई या कोई जहाज टकराया, तो स्थिति युद्ध में बदल सकती है।
जेनेवा में अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता चल रही है, लेकिन सैन्य गतिविधियां दिखाती हैं कि दोनों पक्ष बातचीत के साथ-साथ ताकत का प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
रूस का शामिल होना इसे सिर्फ अमेरिका-ईरान टकराव से बड़ा बना रहा है – अब यह वैश्विक शक्ति संतुलन का मुद्दा बन गया है।
क्रिकेट की तरह राजनीति में भी मैदान अलग है, लेकिन यहां स्टंप्स उखड़ने का खतरा ज्यादा है। मध्य पूर्व का पारा लगातार चढ़ रहा है – कब क्या हो जाए, कोई नहीं कह सकता। दुनिया की नजरें अब ओमान की खाड़ी पर टिकी हैं। क्या डिप्लोमेसी जीतेगी या तनाव युद्ध में बदल जाएगा? समय ही बताएगा।
फैंस और पाठकों से अपील: कमेंट में बताएं, क्या आपको लगता है कि यह अभ्यास सिर्फ ड्रिल है या बड़ा युद्ध शुरू होने वाला है?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World – 19 Feb 2026