-Friday World 18 Feb 2026
मध्य पूर्व में तनाव अब आसमान छू रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच का विवाद इतना गहरा हो चुका है कि दोनों देश युद्ध की छाया में खड़े नजर आ रहे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिका को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने कोई गलत कदम उठाया तो ईरान के पास ऐसे घातक हथियार हैं, जो अमेरिका के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों को पल भर में समुद्र की गहराई में डुबो सकते हैं।
खामेनेई ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को बुरी तरह क्षतिग्रस्त और डूबते हुए दिखाया गया है। इस तस्वीर के साथ उनका संदेश था: "अमेरिका बार-बार कहता है कि हमने ईरान की ओर युद्धपोत भेजा है। ठीक है, युद्धपोत खतरनाक मशीन है, लेकिन उससे ज्यादा खतरनाक वह हथियार है जो इसे समुद्र की तलहटी में पहुंचा सकता है।" यह बयान न सिर्फ धमकी है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त नीतियों पर करारा तंज भी है। खामेनेई ने आगे चेतावनी दी कि दुनिया की सबसे मजबूत सेना को भी ऐसा झटका लग सकता है कि वह दोबारा उठ न सके।
यह धमकी ठीक उसी समय आई है जब अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया है। पिछले 24 घंटों में ही अमेरिका ने F-22 रैप्टर, F-35 लाइटनिंग II और F-16 जैसे 50 से ज्यादा अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को क्षेत्र में तैनात कर दिया है। इनके साथ एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर भी भेजे गए हैं, जो लंबी दूरी की ऑपरेशंस के लिए तैयार हैं। ट्रंप ने स्पष्ट घोषणा की है कि अगर बातचीत नाकाम हुई तो यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को क्षेत्र में भेजा जाएगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है और पहले से मौजूद **यूएसएस अब्राहम लिंकन** के साथ मिलकर ईरान पर दबाव बढ़ाएगा।
ईरान की तरफ से जवाबी तैयारी साफ दिख रही है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों में लाइव-फायर ड्रिल्स शुरू कर दिए हैं, जो 1980 के दशक के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है। ईरान के पास एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइलें जैसे खोर्रमशहर, सेज्जिल और अन्य उन्नत सिस्टम हैं, जिन्हें वह अमेरिकी नौसेना के खिलाफ इस्तेमाल करने की धमकी दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की रणनीति होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर अमेरिकी दबाव को सीधे चुनौती देने की है, जहां दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल व्यापार होता है।
दूसरी ओर, शांति के प्रयास भी रुके नहीं हैं। ओमान की मध्यस्थता से जेनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दूसरे दौर की वार्ता हुई। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे "सकारात्मक" बताया और कहा कि दोनों पक्षों ने कुछ "गाइडिंग प्रिंसिपल्स" पर सहमति बनाई है। लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा कि कुछ मुद्दों पर प्रगति हुई है, मगर ईरान ट्रंप द्वारा तय की गई रेड लाइन्स को मानने को तैयार नहीं है। इन रेड लाइन्स में यूरेनियम संवर्धन रोकना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर अंकुश और परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी शामिल है।
यह स्थिति मध्य पूर्व को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकती है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन की "मैक्सिमम प्रेशर" नीति और सैन्य बिल्डअप है, तो दूसरी तरफ ईरान की अटूट प्रतिरोध की मुद्रा। खामेनेई का बयान और AI तस्वीर सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि ईरान की मिसाइल क्षमता और इरादे का खुला प्रदर्शन है। अगर कूटनीति फेल हुई तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होना, तेल की कीमतों में भारी उछाल और क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ जाएगी।
दुनिया अब सांस थामे इंतजार कर रही है—क्या बातचीत कामयाब होगी या तनाव युद्ध में बदल जाएगा? ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी सैन्य दबाव के आगे नहीं झुकेगा और जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले दिन तय करेंगे कि इतिहास क्या लिखेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 18 Feb 2026