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Monday, 16 February 2026

हिंद महासागर में अमेरिकी आतंकवादः'वेरॉनिका III' तेल टैंकर पर सैन्य छापा, ईरान-वेनेजुएला के 'शैडो फ्लीट' पर करारा प्रहार!

हिंद महासागर में अमेरिकी आतंकवाद: 'वेरॉनिका III' तेल टैंकर पर सैन्य छापा, ईरान-वेनेजुएला के 'शैडो फ्लीट' पर करारा प्रहार! -Friday World 16th Feb 2026

वाशिंगटन की सख्ती अब समुद्र की गहराइयों तक पहुंच गई है। हिंद महासागर की विशाल जलराशि में, जहां अंतरराष्ट्रीय जलसीमा कभी 'सुरक्षित आश्रय' मानी जाती थी, अब अमेरिकी सेना ने एक बड़ा आतंकवादी ऑपरेशन अंजाम दिया है। पनामा ध्वज वाली विशाल तेल टैंकर 'वेरॉनिका III' (Veronica III) पर अमेरिकी सैनिकों ने छापा मारा, जहाज को रोका और उसकी पूरी तलाशी ली। पेंटागन का दावा है कि यह जहाज वेनेजुएला से निकला था और ईरान-रूस-वेनेजुएला के गैरकानूनी तेल व्यापार का हिस्सा था। यह घटना पिछले एक हफ्ते में हिंद महासागर में अमेरिका की दूसरी बड़ी कार्रवाई है, जो ट्रंप प्रशासन की 'ऑइल क्वारंटाइन' नीति की कड़ी मिसाल पेश करती है। 

क्या हुआ था इस ऑपरेशन में? 15 फरवरी 2026 को अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें दिखाया गया कि अमेरिकी सैनिक हेलीकॉप्टर से उतरकर 'वेरॉनिका III' पर चढ़ गए। ऑपरेशन बिना किसी हिंसा के पूरा हुआ। पेंटागन ने लिखा, *"रातोंरात अमेरिकी बलों ने इंडो-पैसिफिक कमांड क्षेत्र में 'वेरॉनिका III' पर राइट-ऑफ-विजिट, मैरिटाइम इंटरडिक्शन और बोर्डिंग की। जहाज ट्रंप की क्वारंटाइन को तोड़ने की कोशिश कर रहा था—कैरिबियन से हिंद महासागर तक हमने उसका पीछा किया, दूरी कम की और उसे रोक दिया। कोई दूसरा देश ऐसी पहुंच, धैर्य और इच्छाशक्ति नहीं रखता।"

टैंकरट्रैकर्स डॉट कॉम जैसी मैरीटाइम इंटेलिजेंस एजेंसियों के अनुसार, यह VLCC (Very Large Crude Carrier) जहाज 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला से रवाना हुआ था—ठीक उसी दिन जब अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके राष्ट्रपति भवन से गिरफ्तार कर लिया था। जहाज पर करीब 19 लाख बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल लदा था। 2023 से यह जहाज रूस, ईरान और वेनेजुएला के तेल परिवहन में शामिल रहा है और अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के OFAC (ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल) द्वारा दिसंबर 2024 में प्रतिबंधित किया जा चुका था। 

ट्रंप की 'क्वारंटाइन' नीति: तेल पर 'पूर्ण ब्लॉकेड' डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाने के लिए दिसंबर 2025 में 'ऑइल क्वारंटाइन' की घोषणा की गई थी। इसका मकसद प्रतिबंधित तेल टैंकरों को कैरिबियन से बाहर निकलने से रोकना था। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दर्जनों टैंकर भाग निकले, लेकिन अमेरिका ने उन्हें 'शैडो फ्लीट' (छिपे हुए जहाजों का समूह) कहकर वैश्विक स्तर पर ट्रैक करना शुरू कर दिया। 'वेरॉनिका III' इसी फ्लीट का हिस्सा था, जो झूठे झंडे (फ्लैग ऑफ कन्वीनियंस) के तहत गैरकानूनी तेल बेच रहा था। पेंटागन की चेतावनी साफ है

"अंतरराष्ट्रीय जलसीमा कोई गैरकानूनी गतिविधि के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं है। जमीन, हवा या समुद्र—कहीं भी अमेरिका अपने प्रतिबंधों का सख्ती से पालन करवाएगा।"

यह कार्रवाई 'ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर' का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें अब तक 9 से ज्यादा टैंकरों को इंटरसेप्ट या जब्त किया जा चुका है। पिछले हफ्ते 'एक्विला II' नामक सुजमैक्स टैंकर को भी इसी तरह हिंद महासागर में रोका गया था। 

वेनेजुएला संकट की जड़ें और वैश्विक प्रभाव वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था तेल पर टिकी है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों ने इसे 'शैडो ट्रेड' की ओर धकेल दिया। ईरान और रूस के साथ मिलकर वेनेजुएला ने 'घोस्ट टैंकर' (बिना ट्रांसपोंडर या फर्जी नाम वाले जहाज) चलाए, जिससे तेल बाजार में सस्ता कच्चा तेल पहुंचता रहा। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद यह ट्रेड और तेज हो गया था, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे 'चोरी का तेल' करार देते हुए सैन्य स्तर पर रोक लगाई। 

इस घटना के प्रभाव दूरगामी हैं:

 - तेल की कीमतें: वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, क्योंकि वेनेजुएला का तेल सप्लाई चेन प्रभावित हो रहा है।

 - ईरान पर दबाव जहाज ईरान से जुड़ा होने के कारण तेहरान की 'शैडो फ्लीट' पर और सख्ती आ सकती है। 

- भारत-चीन जैसे देश: एशियाई देश जो सस्ता तेल खरीदते हैं, उन्हें अब सतर्क रहना पड़ेगा। 

- अंतरराष्ट्रीय कानून: कई देश इसे 'समुद्री डकैती' या 'अंतरराष्ट्रीय जल में हस्तक्षेप' मान रहे हैं, जबकि अमेरिका इसे 'प्रतिबंध प्रवर्तन' बता रहा है। 

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ? मैरीटाइम सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह रणनीति 'ग्लोबल रीच' दिखाती है। gCaptain जैसी वेबसाइट ने लिखा

"यह नौवां जहाज है जिसे अमेरिका ने जब्त किया। कैरिबियन से इंडो-पैसिफिक तक—कोई भी दूरी अब अमेरिका के लिए बाधा नहीं।"

 दूसरी ओर, वेनेजुएला और ईरान समर्थक इसे 'आर्थिक युद्ध' और 'समुद्री साम्राज्यवाद' कह रहे हैं। 

 समुद्र अब युद्ध का नया मैदान  हिंद महासागर, जो कभी शांतिपूर्ण व्यापार मार्ग था, अब भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बन गया है। 'वेरॉनिका III' पर छापा सिर्फ एक जहाज की तलाशी नहीं—यह अमेरिका की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का प्रतीक है, जहां तेल, प्रतिबंध और सैन्य शक्ति एक साथ चल रहे हैं। 

क्या यह ऑपरेशन नए संघर्ष की शुरुआत है या पुराने प्रतिबंधों का अंतिम अध्याय? समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, हिंद महासागर की लहरें अमेरिकी हेलीकॉप्टरों की गूंज से गूंज रही हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 16th Feb 2026