फारस की खाड़ी में चल रहे अमेरिका-इजराइल के युद्ध उन्माद ने एक और खतरनाक मोड़ ले लिया है। 31 मार्च 2026 की सुबह ईरानी ड्रोन हमले में दुबई बंदरगाह के एंकरेज क्षेत्र में खड़े कुवैती तेल टैंकर अल-साल्मी में आग लग गई। पूरी तरह लदे हुए इस वीएलसीसी (Very Large Crude Carrier) टैंकर पर हमला ऐसे समय हुआ जब कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर हॉर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो तेहरान की बिजली, तेल और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा।
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने इस हमले को “सीधा ईरानी हमला” बताया। दुबई मीडिया ऑफिस ने पुष्टि की कि आग पर काबू पा लिया गया है, कोई तेल रिसाव नहीं हुआ और टैंकर पर सवार 24 क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। हालांकि, इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से चले आ रहे तनाव को नई ऊंचाई दी है और वैश्विक तेल बाजार को फिर हिला दिया है।
हमले की विस्तृत जानकारी टैंकर अल-साल्मी दुबई बंदरगाह से करीब 31 नॉटिकल मील उत्तर-पश्चिम में एंकरेज जोन में खड़ा था। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़े मीडिया ने हमले से कुछ देर पहले ही टैंकर की तस्वीरें जारी की थीं और उसे निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। हमला ड्रोन से किया गया, जिससे टैंकर के हल (hull) को नुकसान पहुंचा और आग लग गई।
समुद्री फायरफाइटिंग टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। कुवैत ने संभावित तेल रिसाव का अलर्ट जारी किया था, लेकिन दुबई अधिकारियों ने बताया कि कोई बड़ा रिसाव नहीं हुआ। फिर भी, पर्यावरणविदों ने खाड़ी के संवेदनशील इकोसिस्टम के लिए खतरे की चेतावनी दी है।
यह हमला युद्ध के एक महीने के अंदर व्यापारी जहाजों पर ईरान का सबसे महत्वपूर्ण हमला माना जा रहा है। इससे पहले भी हॉर्मुज क्षेत्र में कई जहाजों पर हमले हो चुके हैं, जिससे बीमा कंपनियां जोखिम बढ़ा चुकी हैं और कई शिपिंग कंपनियां इस रूट से बच रही हैं।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का जवाब हमले से कुछ घंटे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर तेहरान हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने पर सहमत नहीं होता और बंद रखता है तो अमेरिका ईरान की बिजली संयंत्रों, तेल कुओं और ऊर्जा सुविधाओं को “नष्ट” कर देगा। ट्रंप ने यूरोप को भी चेतावनी दी थी कि “अपना तेल खुद बचाओ, अब अमेरिका मदद नहीं करेगा।”
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने इस पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “ईरान के हमले फारस की खाड़ी के देशों पर नहीं, बल्कि ‘दुश्मन हमलावरों’ पर हैं जो अरबों और ईरानियों का सम्मान नहीं करते।” अराग़ची ने सोशल मीडिया पर सऊदी अरब से अपील की कि वे अमेरिकी सेनाओं को अपने इलाके से बाहर निकालें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हॉर्मुज “खुला” है, लेकिन “दुश्मनों” के लिए बंद है।
ईरान का तर्क है कि वह खाड़ी के देशों को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि अमेरिका और इजराइल जैसे “आक्रामक ताकतों” के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। लेकिन कुवैत जैसे गल्फ देशों पर पड़ने वाला असर साफ दिख रहा है।
तेल बाजार पर असर और वैश्विक चिंता इस हमले के तुरंत बाद तेल की कीमतों में उछाल आया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 4% बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड पहले ही 117 डॉलर के आसपास था। हॉर्मुज स्ट्रेट से रोजाना 15-20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। अगर हमले जारी रहे तो सप्लाई बाधित होने से कीमतें और बढ़ सकती हैं।
दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, भारत और एशियाई देशों में ईंधन महंगा हो रहा है। कई देशों में राशनिंग शुरू हो गई है।
खाड़ी देशों की मुश्किल स्थिति यह हमला संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत दोनों के लिए चिंताजनक है। दुबई दुनिया का प्रमुख व्यापारिक और तेल निर्यात केंद्र है। अगर यहां जहाजों पर हमले बढ़े तो वैश्विक शिपिंग रूट प्रभावित होंगे। कुवैत, जो तेल निर्यात पर निर्भर है, अब खुद अपने टैंकरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
ईरान के विदेश मंत्री की अपील के बावजूद, गल्फ देश अमेरिकी सुरक्षा छत्र के नीचे हैं। लेकिन बढ़ते हमलों से वे दो तरफा दबाव में हैं – एक तरफ ईरान का खतरा, दूसरी तरफ अमेरिका की मांग कि वे हॉर्मुज खोलने में मदद करें।
क्या है आगे का रास्ता? यह घटना युद्ध को खाड़ी के गहरे पानी में ले जा रही है। अगर ईरान ऐसे हमले जारी रखता है तो गल्फ देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी। दूसरी ओर, अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर बड़े हमले की आशंका बढ़ गई है।
विश्लेषक मानते हैं कि यह युद्ध अब सिर्फ ईरान-इजराइल तक सीमित नहीं रहा। यह क्षेत्रीय स्तर पर फैल रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा बिना कूटनीतिक समझौते के मुश्किल लग रही है।
ईरान का संदेश साफ है – हम अपने क्षेत्र में नियंत्रण रखेंगे और दुश्मनों को जवाब देंगे। लेकिन इसकी कीमत खाड़ी के तेल निर्यातक देश और पूरी दुनिया भुगत रही है।
आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन इस हमले की आंच अभी लंबे समय तक खाड़ी की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करती रहेगी। दुनिया अब देख रही है कि ट्रंप की चेतावनी और ईरान का जवाब आगे किस रूप में सामने आएगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 1,2026